CJI सूर्यकांत के 'कॉकरोच' वाले बयान पर भारी बवाल! रातों-रात बनी अनोखी पार्टी, महुआ मोइत्रा समेत कई दिग्गज सांसद हुए शामिल
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की एक तीखी टिप्पणी को लेकर इस समय पूरे देश के सियासी और सामाजिक गलियारों में जबरदस्त बखेड़ा खड़ा हो गया है। बेरोजगार युवाओं को लेकर दी गई उनकी कथित दलील के विरोध में अब सोशल मीडिया पर एक नई और अनोखी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का गठन कर दिया गया है। डिजिटल दुनिया में आते ही यह पैरोडी पार्टी इतनी जबरदस्त सुपरहिट हुई कि लॉन्च होने के महज 24 घंटे के भीतर ही इसके फॉलोअर्स का आंकड़ा 15,000 को पार कर गया, जबकि अब तक 40,000 से ज्यादा लोग इसके सदस्य बन चुके हैं। इस मुहिम को उस वक्त और बड़ा राजनीतिक धार मिल गया जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फायरब्रांड सांसदों ने भी इसकी सदस्यता ले ली।
सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' की धूम, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद की एंट्री
आपको बता दें कि यह कोई चुनाव लड़ने वाली वास्तविक राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और जागरूक नागरिकों द्वारा सीजेआई की टिप्पणी के खिलाफ दर्ज कराया गया एक अनोखा डिजिटल विरोध है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस पैरोडी पार्टी का बकायदा पेज लॉन्च किया गया है, जिसकी बायो में लिखा है कि यह 'बेरोजगारों की आवाज' बुलंद करेगी। इस अभियान को गति देते हुए टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व क्रिकेटर व सांसद कीर्ति आजाद ने भी इसकी सदस्यता ले ली है। महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि वे इस नई पार्टी (CJP) में शामिल होना चाहेंगी, जिसके बाद पार्टी के आधिकारिक हैंडल से भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
आखिर कोर्ट रूम में ऐसा क्या बोले थे चीफ जस्टिस सूर्यकांत?
यह पूरा विवाद बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान शुरू हुआ। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ एक ऐसे वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) का दर्जा हासिल करने की कोशिश कर रहा था। अदालत ने उस वकील की योग्यता पर कड़ा रुख अपनाते हुए फटकार लगाई। इसी दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कथित तौर पर समाज के कुछ तत्वों की तुलना परजीवियों से की। उन्होंने कहा कि कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें जब कोई रोजगार या किसी पेशे में मुकाम नहीं मिलता, तो वे कभी मीडिया, कभी सोशल मीडिया एक्टिविस्ट तो कभी आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता बनकर बाहर निकल आते हैं और पूरी व्यवस्था पर बेबुनियाद हमले शुरू कर देते हैं।
तीखी टिप्पणी पर जब चौतरफा घिरे सीजेआई, तो दी यह सफाई
मुख्य न्यायाधीश द्वारा देश के युवाओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए 'कॉकरोच' और 'परजीवी' जैसे कड़े शब्दों के इस्तेमाल की खबर जैसे ही बाहर आई, सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक उनकी आलोचना शुरू हो गई। लोगों का कहना था कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। विवाद को लगातार बढ़ता देख आखिरकार सीजेआई सूर्यकांत को इस पर अपनी सफाई पेश करनी पड़ी।
जस्टिस सूर्यकांत ने एक स्पष्टीकरण बयान जारी करते हुए कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने अदालती कार्यवाही के दौरान उनके द्वारा हल्के-फुल्के अंदाज में की गई मौखिक टिप्पणी को पूरी तरह मरोड़कर और गलत संदर्भ में पेश किया है, जिससे उन्हें बेहद दुख पहुंचा है। उन्होंने साफ किया कि उनका इरादा देश के सामान्य युवाओं की आलोचना करना कतई नहीं था। उन्होंने यह तल्ख टिप्पणी केवल उन लोगों के लिए की थी जो नकली और फर्जी डिग्रियों के सहारे कानूनी पेशे में घुसने का प्रयास कर रहे हैं और सिस्टम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालांकि, इस सफाई के बाद भी सोशल मीडिया पर युवाओं का गुस्सा शांत होता नहीं दिख रहा है।