राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार्जशीट में देरी पर बरसी कांग्रेस: बोली- 'बड़ी मछलियों' को बचाने की साजिश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार्जशीट में देरी पर बरसी कांग्रेस: बोली- 'बड़ी मछलियों' को बचाने की साजिश

अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे की सुनियोजित चोरी के मामले में सियासी संग्राम एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में चोरी की घटनाएं 70 से बढ़कर 105 सामने आने और सुप्रीम कोर्ट में चार्जशीट की समयसीमा तय होने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र व उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पहली गिरफ्तारी के तीन महीने (90 दिन) पूरे होने के बावजूद अब तक चार्जशीट दाखिल न होना 'बड़ी मछलियों' और चोरी के असली सरगनाओं को बचाने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने प्रसिद्ध फिल्मी गीत की पंक्ति का हवाला देते हुए तंज कसा कि "राम का नाम बदनाम ना करो" और पूरे सिस्टम के स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट की मांग दोहराई।

25 सितंबर तक चार्जशीट नहीं तो डिफॉल्ट बेल का खतरा: जयराम रमेश का तीखा वार

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली गिरफ्तारी को तीन महीने पूरे होने में अब महज दो-तीन दिन बचे हैं, लेकिन जांच एजेंसियां अभी तक औपचारिक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई हैं। रमेश ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए चेताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187 (पूर्ववर्ती CrPC 167(2)) के तहत यदि 25 सितंबर तक जांच एजेंसी ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल नहीं करती है, तो मामले के गिरफ्तार सभी आरोपियों को स्वत: वैधानिक जमानत यानी 'डिफॉल्ट बेल' मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

जयराम रमेश ने सवाल खड़ा किया कि क्या जांच में यह जानबूझकर की जा रही देरी है ताकि छोटे किरदारों को आसानी से जमानत मिल सके और बड़े संरक्षकों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके? उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों रामभक्तों को ऐसी सरकारी जांच पर कोई भरोसा नहीं है, जिसमें नीचे के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर शीर्ष प्रबंधन और राजनीतिक रसूख वाले चेहरों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही हो।

70 नहीं, CCTV में कैद हुईं 105 वारदातें: सुप्रीम कोर्ट में हुआ था बड़ा खुलासा

यह राजनीतिक घमासान उस समय और तेज हुआ जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष यूपी सरकार की एसआईटी ने अपनी सीलबंद प्रगति रिपोर्ट पेश की।

  • वारदातों का ग्राफ बढ़ा: प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी की 70 घटनाएं चिन्हित की गई थीं, लेकिन विस्तृत जांच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद यह संख्या बढ़कर 105 अनधिकृत निकासी घटनाओं तक पहुंच गई है।

  • 8 आरोपी और बरामदगी: अब तक मंदिर के दानपात्र और गिनती कक्ष से जुड़े 8 कर्मचारियों/व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे लगभग 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है।

  • सॉलिसिटर जनरल की दलील: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया था कि 90 दिनों की वैधानिक मियाद 25 सितंबर को समाप्त हो रही है, इसलिए एसआईटी 25 सितंबर को या उससे पहले ट्रायल कोर्ट में पहली चार्जशीट दाखिल कर देगी।

'चढ़ावे के नाम पर आए पैसे का श्रेय लेने वाले, चोरी की जिम्मेदारी भी लें'

कांग्रेस नेता ने सीधे तौर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब शुरुआत में यह घोटाला सामने आया था, तब इसे महज अफवाह और खारिज करने लायक बताया गया था, लेकिन अब सीसीटीवी फुटेज खुद 105 बार चोरी की गवाही दे रहे हैं। रमेश ने पूछा:

  1. भगवान राम के नाम पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई का अंश दान दिया था; जो लोग ट्रस्ट के प्रबंधन और प्रबंधकों को चुनने का श्रेय लेते रहे हैं, वे इस चोरी की जिम्मेदारी कब लेंगे?

  2. इस पूरे मामले पर देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और प्रधानमंत्री की चुप्पी क्यों नहीं टूट रही है?

  3. क्या किसी स्वतंत्र और प्रतिष्ठित एजेंसी से पूरे ट्रस्ट के खातों और चढ़ावा प्रबंधन प्रणाली का व्यापक 'फॉरेंसिक ऑडिट' कराया जाएगा?

  4. असली मास्टरमाइंड और बड़ी मछलियों से कड़ी पूछताछ कब होगी और ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था का पुनर्गठन कब किया जाएगा?

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जारी है जांच प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी कानून के तहत आगे की अग्रिम जांच (Further Investigation) जारी रखी जा सकती है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को गुण-दोष के आधार पर मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया है। हालांकि, कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बाद 25 सितंबर को दाखिल होने वाली चार्जशीट पर पूरे देश की निगाहें टिक गई हैं कि क्या उसमें केवल फील्ड के छोटे कर्मचारियों के नाम होंगे या फिर दान प्रबंधन से जुड़े किसी बड़े प्रशासनिक चेहरे पर भी शिकंजा कसेगा।