ममता बनर्जी को अपने ही वॉर्ड में झटका, चुनाव आयोग के आंकड़ों से खुली अंदरूनी कलह की पोल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सामने आए आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। सूबे में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उस अभेद्य किले को ध्वस्त कर दिया है, जिसे कभी अजेय माना जाता था। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा जारी बूथ स्तर के ताजा आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि टीएमसी के बड़े-बड़े चेहरों का जादू इस बार जनता के सिर चढ़कर नहीं बोला। हैरान करने वाली बात यह है कि टीएमसी के 36 सबसे प्रमुख और दिग्गज नेताओं में से महज 14 नेता ही अपनी सीट बचा पाने में कामयाब रहे, जबकि 22 दिग्गजों को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है।
भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी का जलवा, ममता बनर्जी को फिर दी मात
इस चुनाव का सबसे बड़ा और हैरान करने वाला उलटफेर भवानीपुर सीट पर देखने को मिला। साल 2021 के उपचुनाव में भारी मतों से जीतने वाली पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर करारी शिकस्त दी है। शुभेंदु अधिकारी ने लगातार दूसरी बार ममता बनर्जी को मात देकर बंगाल की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भवानीपुर के कुल 270 पोलिंग बूथों में से ममता बनर्जी सिर्फ 62 बूथों पर ही बढ़त बना सकीं। हालांकि, ममता बनर्जी ने अपने घरेलू पोलिंग स्टेशन (बूथ संख्या 207) पर 63.33% वोट शेयर के साथ जीत जरूर हासिल की, लेकिन यह पूरी सीट को बचाने के लिए काफी नहीं था। वह पूरी विधानसभा में सिर्फ 54 बूथों पर ही 50% से अधिक वोट हासिल कर पाईं। इसके विपरीत, शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के 197 बूथों पर 50% से ज्यादा वोट शेयर के साथ एकतरफा बढ़त बनाई, जिसमें से 44 बूथ तो ऐसे थे जहां उन्हें 80% से भी अधिक बंपर वोट मिले।
टीएमसी के 4 बड़े मंत्रियों का सूपड़ा साफ, 15% बूथों पर भी नहीं टिक पाए
ममता बनर्जी के अलावा उनकी कैबिनेट के कई मौजूदा मंत्रियों को भी इस चुनाव में जनता ने पूरी तरह नकार दिया। टीएमसी के चार सबसे प्रमुख चेहरे और मंत्री—सुजीत बोस, ब्रात्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रदीप मजूमदार अपनी सीटों के कुल पोलिंग बूथों में से 15% बूथों पर भी जीत का स्वाद नहीं चख सके। इन चारों ही मंत्रियों को भाजपा उम्मीदवारों ने एक बड़े अंतर से पटखनी दी।
पूरी टीएमसी में केवल तीन मंत्री ही ऐसे रहे, जिन्होंने विपरीत लहर में भी अपना किला बचाए रखा। मोहम्मद गुलाम रब्बानी, अखरुज्जमां और सबीना यास्मिन ने अपनी सीटों के 80% से अधिक पोलिंग बूथों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की।
अपने ही घर में घिरे दिग्गज, घरेलू बूथ पर भी नहीं मिला साथ
चुनाव आयोग की रिपोर्ट में एक और बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है। चुनाव लड़ रहे टीएमसी के 36 प्रमुख नेताओं में से 25 नेता उसी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड थे, जहां से वे खुद उम्मीदवार थे। लेकिन इनमें से केवल 9 नेता ही अपने खुद के घरेलू पोलिंग बूथ पर जीत हासिल कर पाए। इन 9 नेताओं में से भी 6 नेता अंततः अपनी पूरी विधानसभा सीट हार गए और केवल 3 को ही अंतिम रूप से जीत नसीब हुई। अगर कुल मिलाकर देखें तो अपने घरेलू बूथ पर जीतने वाले 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं में से सिर्फ 6 ही अपनी विधानसभा सीट को बचा सके।
बीजेपी की माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति ने बदला बंगाल का भूगोल
आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बीजेपी ने टीएमसी के दिग्गजों को बेदखल करने के लिए बहुत ही आक्रामक और रणनीतिक योजना पर काम किया था। जिन 22 सीटों पर टीएमसी के बड़े सूरमा धड़ाम हुए हैं, उनमें से 15 सीटें ऐसी थीं जहां बीजेपी ने कुल बूथों के 30% से भी कम हिस्से पर 50% से अधिक वोट शेयर हासिल किया था, इसके बावजूद वे पूरी सीट जीतने में कामयाब रहे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य की हार है, जिन्हें बीजेपी के सौरव सिकदार ने शिकस्त दी। दिलचस्प बात यह है कि सिकदार पूरी सीट पर केवल 3.78% बूथों पर ही 50% से अधिक वोट शेयर हासिल कर पाए थे, लेकिन छोटे-छोटे अंतर की बढ़त ने उन्हें जिता दिया।
हार-जीत का बड़ा अंतर और टीएमसी के लिए राहत की कुछ बूंदें
टीएमसी के दिग्गज जिन 22 सीटों पर हारे हैं, उनमें से 16 सीटें ऐसी थीं जहां आधे से ज्यादा पोलिंग बूथों पर बीजेपी और टीएमसी उम्मीदवारों के बीच 10 प्रतिशत से अधिक वोटों का बड़ा फासला देखा गया। हालांकि, इस मायूसी के बीच टीएमसी के लिए कुछ राहत भरी खबरें भी रहीं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चंद्रनाथ सिन्हा (बोलपुर) और पुलक रॉय (उलूबेरिया दक्षिण) अपनी सीटों के आधे से अधिक बूथों पर बीजेपी से 10% से ज्यादा वोटों से पिछड़ रहे थे, लेकिन बाकी बूथों के दम पर वे अंतिम रूप से सीट जीतने में सफल रहे। टीएमसी के लिए इस पूरे चुनाव में सबसे बड़ी और एकतरफा जीत गोलपोखर सीट से मोहम्मद गुलाम रब्बानी और सुजापुर सीट से सबीना यास्मिन के खाते में दर्ज की गई।