'NTA को UPSC की तरह जीवंत और मजबूत संस्थान बनना होगा': राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा एक्शन प्लान; संस्थागत क्षमता पर उठाए कड़े सवाल

'NTA को UPSC की तरह जीवंत और मजबूत संस्थान बनना होगा': राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा एक्शन प्लान; संस्थागत क्षमता पर उठाए कड़े सवाल

देश भर में नीट-यूजी (NEET-UG) और अन्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक व अनियमितताओं के मामलों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के व्यापक पुनर्गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और एनटीए की कार्यप्रणाली, बुनियादी ढांचे और संस्थागत क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि परीक्षा सुधार केवल कागजों या तदर्थ (Ad-hoc) सुरक्षा प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रहने चाहिए। जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC का उदाहरण देते हुए स्पष्ट नसीहत दी कि एनटीए को भी उसी की तरह एक मजबूत, जीवंत और वैज्ञानिक रूप से दक्ष संस्थान के रूप में खुद को विकसित करना होगा।

'कागज पर सब अच्छा लगता है, जमीन पर ढांचा कहां है?': सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल

पीठ ने पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और नंदन नीलेकणि पैनल के सुझावों के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि राधाकृष्णन कमेटी ने बिल्कुल सही कहा था कि यह एक 'सिस्टम से जुड़ी समस्या' (Systemic Problem) है, जिसे संस्थागत रूप (Institutionalisation) देने की जरूरत है।

जस्टिस नरसिम्हा ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और केंद्र सरकार से एनटीए के मौजूदा ढांचे पर सीधे सवाल पूछे:

  • कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति: "आपने एक महानिदेशक (DG) दिया है, इसके अलावा संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी, आईटी निदेशक और संयुक्त निदेशक के पद तय किए गए थे। इनमें से कितनों की नियुक्ति हो चुकी है? कितनों ने कार्यभार संभाला है?"

  • सुरक्षित परिसर और भौतिक ढांचा: "एनटीए का वास्तविक निकाय कहां है? उनके पास कितना स्थायी स्टाफ उपलब्ध है? क्या एजेंसी के पास सुरक्षित और गोपनीय कामकाज के लिए अपना अलग स्वतंत्र परिसर है?"

  • डिजिटल और सॉवरेन डेटाबेस: कोर्ट ने पूछा कि क्या एनटीए के पास प्रश्नपत्रों और गोपनीय परीक्षा सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए अपना संप्रभु डेटाबेस (Sovereign Database) और सॉफ्टवेयर तैयार है?

UPSC वाली नसीहत: 'तदर्थ व्यवस्था नहीं, निरंतर विशेषज्ञता तैयार करें'

सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा प्रक्रिया में यूपीएससी (UPSC) की साख और कार्यप्रणाली का हवाला देते हुए एनटीए को उससे सीखने की नसीहत दी।

जस्टिस नरसिम्हा ने टिप्पणी करते हुए कहा, "यूपीएससी को ही देख लीजिए। आयोग ने दशकों से लगातार परीक्षाएं आयोजित करके अपनी एक मजबूत 'संस्थागत स्मृति' (Institutional Memory) और विशेषज्ञता विकसित की है। यदि एनटीए को साल-दर-साल देश के लाखों छात्रों की महत्वपूर्ण परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, तो उसे भी खुद को लगातार अपग्रेड करना होगा और यूपीएससी जैसा एक जीवंत व विश्वसनीय संस्थान बनना होगा।"

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि हर परीक्षा के लिए अलग से तात्कालिक सुरक्षा व्यवस्था करने के बजाय एनटीए को ऐसा स्थायी ढांचा बनाना चाहिए जो भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अपने कर्मियों को निरंतर प्रशिक्षित कर सके।

केंद्र का पक्ष: 'राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें पूरी तरह स्वीकार, भर्ती प्रक्रिया जारी'

केंद्र सरकार और एनटीए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार ने राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को पूरी तरह (In Toto) स्वीकार कर लिया है और उन पर तेजी से अमल किया जा रहा है:

  • भर्ती और तकनीकी टीम: कोर्ट को सूचित किया गया कि मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO), मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) और जनरल मैनेजर्स समेत प्रमुख तकनीकी पदों के लिए भर्तियां जारी हैं और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से एक समर्पित तकनीकी विंग तैयार की जा रही है।

  • क्वेश्चन पेपर सिक्योरिटी: सरकार ने बताया कि चार-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी सर्विलांस, सीआईएसएफ (CISF) सुरक्षा वाले प्रिंटिंग प्रेस और जीपीएस-ट्रैक्ड वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

  • स्थान परिवर्तन: एनटीए के कार्यालय को ओखला औद्योगिक क्षेत्र से मिंटो रोड (सेंट्रल दिल्ली) स्थित सरकारी प्रेस भवन में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है।

3 सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा सचिव को निर्देश दिया है कि वे तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करें। इस हलफनामे में यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि डॉ. के. राधाकृष्णन कमेटी और नंदन नीलेकणि पैनल की सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और शेष सुधारों को पूरा करने की समय-सीमा (Timelines) क्या है।

कोर्ट ने साफ कर दिया कि केवल कमेटियां बनाने और रिपोर्ट सौंपने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन सभी वैज्ञानिक और प्रशासनिक सुधारों को जमीन पर एक स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था के रूप में स्थापित करना अनिवार्य है ताकि देश के करोड़ों परीक्षार्थियों का विश्वास परीक्षा प्रणाली पर बना रहे।

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