बंगाल की राजनीति में महासंग्राम शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार की धर्म-आधारित योजनाओं को बंद करने की उठाई मांग
पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तुष्टिकरण और भेदभाव का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की कई प्रमुख लोक कल्याणकारी योजनाओं को 'धर्म-आधारित' बताते हुए उन्हें तुरंत बंद करने या उनमें सुधार करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने राज्य के राज्यपाल को एक विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपी है।
ममता सरकार की इन बड़ी योजनाओं पर शुभेंदु अधिकारी ने उठाए सवाल
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार की कुछ सबसे लोकप्रिय योजनाओं को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने दावा किया कि 'इमाम भत्ता' (Imam Allowance), 'मोअज्जिन भत्ता' (Moazzem Allowance) और सिख गुरुओं व अन्य धार्मिक पुरोहितों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता पूरी तरह से असंवैधानिक है। अधिकारी का तर्क है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश है, इसलिए सरकार जनता के टैक्स के पैसे का इस्तेमाल किसी खास धर्म के लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए नहीं कर सकती।
राज्यपाल से की कैबिनेट बैठकों और फाइलों की जांच करने की मांग
शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे राज्य सरकार द्वारा पारित की गई इन योजनाओं से जुड़ी कैबिनेट की फाइलों और फैसलों की गहनता से समीक्षा करें। भाजपा नेता का कहना है कि जो योजनाएं सीधे तौर पर धार्मिक आधार पर वोट बैंक को मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए ताकि राज्य के खजाने का सही और निष्पक्ष इस्तेमाल हो सके।
'लक्ष्मी भंडार' और 'कन्याश्री' जैसी योजनाओं पर भी साधा निशाना
सिर्फ धार्मिक भत्ते ही नहीं, शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे 'लक्ष्मी भंडार' (Lokkhir Bhandar) और 'कन्याश्री' (Kanyashree) के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने में भी राजनीतिक और धार्मिक आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। विपक्षी दल का आरोप है कि वास्तविक लाभार्थियों के बजाय सत्तारूढ़ दल से जुड़े और एक विशेष वर्ग के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
टीएमसी का पलटवार: भाजपा कर रही है विभाजनकारी राजनीति
शुभेंदु अधिकारी के इन तीखे हमलों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग, जाति और धर्म के लोगों के लिए काम कर रही है। टीएमसी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं या भाजपा राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ती है, वह सांप्रदायिक कार्ड खेलने लगती है। टीएमसी के मुताबिक, पुरोहितों और इमामों को दिया जाने वाला भत्ता समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके को संबल देने की एक कोशिश है, जिसे भाजपा राजनीतिक रंग दे रही है।