ठाणे-कल्याण में गुटबाजी पर भड़के उद्धव ठाकरे: पदाधिकारियों को लगाई फटकार, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का दिया खास उदाहरण

ठाणे-कल्याण में गुटबाजी पर भड़के उद्धव ठाकरे: पदाधिकारियों को लगाई फटकार, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का दिया खास उदाहरण

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के ठाणे-कल्याण क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक के दौरान आपसी कलह और गुटबाजी को लेकर जमकर खरी-खोटी सुनाई। कुछ समय पहले कल्याण लोकसभा क्षेत्र में अनुभवी कार्यकर्ताओं को अचानक पार्टी से हटाए जाने के बाद से अंदरूनी कलह शुरू हुई थी, जो नेतृत्व के सामने खुली बहस में बदल गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में विधायक मिलिंद नार्वेकर, ठाणे जिला प्रमुख केदार डिघे और पूर्व विधायक विलास पोटनिस जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद थे।

अभिजीत दीपके का उदाहरण देकर नेताओं को आईना दिखाया

जब ठाकरे ने अपने सामने नेताओं को छोटे-मोटे पदों के लिए आपस में लड़ते देखा, तो वह बेहद नाराज हुए। उन्होंने देश के राजनीतिक हालात और सरकार के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए पदाधिकारियों को नसीहत दी:

  • युवा संघर्ष की मिसाल: ठाकरे ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के मौजूदा हालात में एक युवा कार्यकर्ता अकेले दम पर बड़े राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के जरिए चुनौती पेश कर रहा है, जबकि आप लोग छोटे-मोटे पदों और वर्चस्व के लिए आपस में भिड़ रहे हैं।

  • पारंपरिक गढ़ में दरारें: मातोश्री में हुई इस नाराजगी ने पार्टी के पारंपरिक गढ़ ठाणे में मौजूद अंदरूनी दरारों और जमीनी स्तर पर बढ़ती अस्थिरता को खुलकर सामने ला दिया है।

फोन पर हुई बातचीत और 'मातोश्री' का न्योता

सूत्रों के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बीच उद्धव ठाकरे ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके से फोन पर भी बात की। यह चर्चा शिवसेना (UBT) नेता चंद्रकांत खैरे के माध्यम से हुई।

  • बधाई और सराहना: ठाकरे ने सफल आंदोलन के लिए दीपके की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।

  • पारिवारिक हाल-चाल: बातचीत के दौरान उन्होंने दीपके की शादी और परिवार के बारे में भी जानकारी ली।

  • विशेष आमंत्रण: इतना ही नहीं, शिवसेना प्रमुख ने उन्हें मुंबई स्थित अपने आवास 'मातोश्री' पर आने का औपचारिक आमंत्रण भी दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ठाणे-कल्याण के इस आंतरिक असंतोष को रोकने और संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए अब पार्टी नेतृत्व पर सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाने का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।

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