BRICS समिट का माहौल बिगाड़ने की फिराक में कौन? दिल्ली में ड्रोन अटैक और VVIP रूट पर घुसपैठ का खतरा

BRICS समिट का माहौल बिगाड़ने की फिराक में कौन? दिल्ली में ड्रोन अटैक और VVIP रूट पर घुसपैठ का खतरा

राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित होने जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा समेत कई वैश्विक राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी के बीच देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है।

खुफिया ब्यूरो (Intelligence Bureau - IB) ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को गोपनीय इनपुट भेजकर आगाह किया है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की वैश्विक साख और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने के इरादे से असामाजिक और चरमपंथी संगठन बड़े पैमाने पर व्यवधान डालने की साजिश रच रहे हैं। खुफिया इनपुट्स में खासतौर पर अनधिकृत ड्रोन गतिविधियों, वीवीआईपी काफिले के रास्तों में घुसपैठ और सार्वजनिक स्थलों पर विवादित ग्रैफिटी के जरिए सनसनी फैलाने की आशंका जताई गई है।

कौन बिगाड़ना चाहता है माहौल? IB की जांच में इन 3 बड़े खतरों की पहचान

खुफिया एजेंसियों ने भाग लेने वाले देशों के आपसी विवादों और संवेदनशील मुद्दों का सूक्ष्म विश्लेषण कर संभावित उपद्रवियों की पहचान की है:

  • खालिस्तानी चरमपंथी गुट: एजेंसियों को पिछले कुछ दिनों में खालिस्तान समर्थक तत्वों से जुड़े धमकी भरे ईमेल और डिजिटल इनपुट्स प्राप्त हुए हैं। इनपुट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचने के लिए वीवीआईपी रूट्स, प्रमुख चौराहों और सरकारी इमारतों पर स्प्रे-पेंट से आपत्तिजनक व भड़काऊ नारे लिखने (Graffiti) की तैयारी की गई है।

  • चीन और तिब्बत से जुड़े विरोध-प्रदर्शन: चीनी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी को देखते हुए तिब्बती संगठनों द्वारा अचानक सड़कों पर उतरकर फ्लैश-प्रोटेस्ट करने या दूतावास व आयोजन स्थल के पास सुरक्षा घेरा तोड़ने की आशंका जताई गई है।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े एक्टिविस्ट्स: रूसी नेतृत्व की यात्रा के विरोध में कुछ अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतीकात्मक विरोध या राजनयिक रूट पर रुकावट पैदा करने की संभावना को भी सुरक्षा प्लान में शामिल किया गया है।

आसमान से जमीन तक पहरा: 'एंटी-ड्रोन सिस्टम' और एयरस्पेस पर सख्त पहरा

खुफिया चेतावनी में सबसे संवेदनशील पहलू सब-कन्वेंशनल एरियल प्लेटफॉर्म्स यानी छोटे ड्रोन और रिमोट-कंट्रोल्ड ग्लाइडर्स का संभावित दुरुपयोग है।

  • ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध: दिल्ली पुलिस ने राजधानी के पूरे इलाके को 'नो-फ्लाई जोन' घोषित करते हुए सभी प्रकार के निजी ड्रोन, हॉट एयर बैलून और माइक्रो-लाइट एयरक्राफ्ट्स पर पूर्ण पाबंदी लगा दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी संदिग्ध हवाई ऑब्जेक्ट को 'दुश्मन ड्रोन' मानकर हवा में ही मार गिराया जाएगा।

  • NSG और IAF का एयर डिफेंस ग्रिड: भारत मंडपम और विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले पांच सितारा होटलों की छतों पर नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक रडार और एंटी-ड्रोन जैमर्स तैनात किए गए हैं।

  • हवाई उड़ानों के लिए कड़े नियम: दिल्ली से 200 किलोमीटर के दायरे में उड़ान भरने वाले वाणिज्यिक विमानों के लिए ऊंचाई के कड़े मानक तय किए गए हैं, जबकि सफदरजंग एयरपोर्ट और रोहिणी हेलीपैड को गैर-आपातकालीन उड़ानों के लिए पूरी तरह सील कर दिया गया है।

जमीन पर 15,000 पुलिस जवान और 200 अर्धसैनिक कंपनियां तैनात

सम्मेलन स्थल प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम, दिल्ली हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशनों और वीवीआईपी होटलों के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा चक्र (Multi-layered Security) स्थापित किया गया है:

  • दिल्ली पुलिस के करीब 15,000 जवान और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 200 कंपनियां संवेदनशील सेक्टरों में तैनात की गई हैं।

  • दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, स्वात (SWAT) कमांडो और बम निरोधक दस्ते रियल-टाइम सूचनाओं के आधार पर लगातार मॉक ड्रिल कर रहे हैं।

  • खुफिया एजेंसियों की साइबर विंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, एन्क्रिप्टेड चैट ग्रुप्स और डिजिटल चैनलों पर 24 घंटे नजर रख रही है, ताकि भीड़ जुटाने या किसी हिंसक योजना के डिजिटल सुराग को समय रहते पकड़ा जा सके।

सुरक्षा एजेंसियों का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई, अवैध प्रदर्शन या सुरक्षा उल्लंघन के प्रयास से सख्ती से निपटा जाएगा, ताकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सुरक्षित और निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सके।

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