क्या भारत का खाली हो जाएगा खजाना? ईरान युद्ध के बीच PM मोदी की बड़ी अपील, इन चीजों पर लग सकता है बैन

क्या भारत का खाली हो जाएगा खजाना? ईरान युद्ध के बीच PM मोदी की बड़ी अपील, इन चीजों पर लग सकता है बैन

Up kiran, Digital Desk : ईरान युद्ध की आग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लिया है और इसका सीधा असर अब भारत की जेब पर पड़ता दिख रहा है। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और डॉलर के मुकाबले टूटते रुपये ने केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI के बीच आपातकालीन बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सरकार अब कुछ ऐसे कड़े फैसले लेने जा रही है, जिसका सीधा असर आपकी जीवनशैली और जेब पर पड़ेगा।

विदेशी मुद्रा भंडार पर मंडराया संकट: आखिर भारत के पास कितना बचा है 'दम'?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 1 मई 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 690.7 बिलियन डॉलर के स्तर पर आ गया है। हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह भंडार अभी भी 10 से 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है, लेकिन जिस रफ्तार से डॉलर बाहर जा रहा है, उसने खतरे की घंटी बजा दी है। रुपये को बचाने के लिए RBI ने सट्टेबाजी पर लगाम लगानी शुरू कर दी है और बैंकों की डेली लिमिट को $100 मिलियन तक सीमित कर दिया है।

सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदना होगा मुश्किल? गैर-जरूरी आयात पर कैंची चलाने की तैयारी

डॉलर की बर्बादी रोकने के लिए सरकार 'नॉन-एसेंशियल' यानी गैर-जरूरी सामानों के आयात पर सख्त पाबंदी लगा सकती है। इस लिस्ट में सबसे ऊपर सोना (Gold) और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (जैसे स्मार्टफोन और लैपटॉप) शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि अगर इन चीजों का आयात कम किया जाए, तो अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है। इतना ही नहीं, संकट गहराने पर विदेश यात्रा के लिए डॉलर निकालने की सीमा भी तय की जा सकती है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लग सकता है 'करंट', PM मोदी ने देशवासियों से मांगा सहयोग

ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की सप्लाई चेन बाधित हुई है। सरकार जल्द ही ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से इस आर्थिक युद्ध में साथ देने की भावुक अपील की है। पीएम ने सुझाव दिया है कि नागरिक 'वर्क फ्रॉम होम' को प्राथमिकता दें और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें ताकि ईंधन की खपत कम हो सके। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि फिलहाल सोना खरीदने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें ताकि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, वियतनाम-थाईलैंड जैसी राह पर भारत

इस साल भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 5.6% तक टूट चुका है, जिससे यह एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में से एक बन गया है। भारत ही नहीं, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों ने भी अपने नागरिकों को डॉलर और तेल बचाने के लिए घर से काम करने के निर्देश दिए हैं। राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में होने के कारण मोदी सरकार अब कड़े और कड़वे आर्थिक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी, ताकि देश को श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट से बचाया जा सके।

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