Adhik Maas 2026: अधिक मास में तुलसी जी के साथ कर लें यह 1 छोटा काम, मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु खोल देंगे खुशियों का भंडार

Adhik Maas 2026: अधिक मास में तुलसी जी के साथ कर लें यह 1 छोटा काम, मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु खोल देंगे खुशियों का भंडार

हिंदू धर्म में अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास को बेहद पवित्र और चमत्कारी महीना माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, यह पूरा महीना जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है। साल 2026 में यह पावन महीना 17 मई से शुरू हो चुका है और 15 जून को इसका समापन होगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दौरान किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। ज्योतिषाचार्यों और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, अधिक मास में तुलसी जी के साथ एक विशेष देव की पूजा करने से घर की दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है और मां लक्ष्मी साक्षात घर में वास करने आती हैं। आइए जानते हैं इस अद्भुत संयोग और पूजा की सही विधि के बारे में।

शालिग्राम और तुलसी का यह संयोग बदल देगा आपकी किस्मत

पुरुषोत्तम मास में तुलसी जी के साथ शालिग्राम जी की संयुक्त पूजा का सबसे बड़ा महत्व बताया गया है। शास्त्रों में तुलसी जी को धन की देवी मां लक्ष्मी का स्वरूप और शालिग्राम जी को भगवान विष्णु का साक्षात काला पत्थर रूप माना गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, जिस घर में तुलसी और शालिग्राम एक साथ विराजमान होते हैं, वह स्थान किसी पवित्र तीर्थ स्थल से कम नहीं होता। इस महीने में हर दिन शालिग्राम जी का पंचामृत से अभिषेक करके उन्हें तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि, सुख-शांति और अपार धन-दौलत का आगमन होता है।

जानिए अधिक मास में तुलसी-विष्णु पूजन का खास महत्व

पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु की कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। अधिक मास क्योंकि भगवान विष्णु का ही महीना है, इसलिए इस समय तुलसी-शालिग्राम की जोड़ी की पूजा करने से दोनों महाशक्तियां एक साथ प्रसन्न होती हैं। जो भक्त इस पवित्र महीने में नियमपूर्वक आराधना करते हैं, उनके परिवार पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं और कुंडली के कई अशुभ योग भी शुभ फल देने लगते हैं।

सुख-समृद्धि के लिए ऐसे करें रोजाना तुलसी पूजन

अधिक मास के दौरान प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सबसे पहले तुलसी के पौधे में साफ और शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु या शालिग्राम जी की मूर्ति के सामने चंदन, पीले फूल, पंचामृत और तुलसी के पत्ते श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं। पूजा करते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' महामंत्र का मन ही मन निरंतर जाप करें। सबसे जरूरी बात, शाम के समय तुलसी के पौधे के पास शुद्ध घी का दीपक जलाना बिल्कुल न भूलें। इस उपाय से मां लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर की आर्थिक तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

पितृदोष और पैसों की किल्लत से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति

शास्त्रों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में तुलसी और विष्णु जी की संयुक्त साधना करने से व्यक्ति को कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। यदि आपके घर में पितृ दोष, गृह क्लेश या कोई बड़ा ग्रह दोष है, तो इस महीने की पूजा से वे शांत हो जाते हैं। इसके अलावा, व्यापार में घाटा, विवाह में आ रही अड़चनें, संतान सुख की कमी और सेहत से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। इस महीने में की गई भक्ति से मोक्ष का मार्ग सुलभ हो जाता है।

भूलकर भी न करें ये गलतियां, इन नियमों का करें पालन

अधिक मास का पूर्ण लाभ उठाने के लिए भक्तों को कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इस पूरे महीने तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह दूरी बना लें और सात्विक दिनचर्या अपनाएं। मन में किसी के प्रति क्रोध, ईर्ष्या या झूठ बोलने की आदत से बचें। अपने घर में नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम या श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करें या सुनें। तुलसी के पौधे को कभी भी सूखने न दें और उसकी उचित देखभाल करें। इन नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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