करियर में 100वें फर्स्ट-क्लास मैच का 'खास शतक' जड़ने के बाद बोले मोहम्मद शमी; 'मैं हमेशा सीखते रहना चाहता हूं', टीम इंडिया में वापसी पर दिया बड़ा बयान
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने अपने शानदार क्रिकेट करियर में एक और बेहद खास मुकाम हासिल कर लिया है। चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम (चेपॉक) स्टेडियम में खेले गए दलीप ट्रॉफी के फाइनल में उतरते ही शमी ने अपने करियर का 100वां प्रथम श्रेणी (First-Class) मैच पूरा किया। इस ऐतिहासिक मुकाबले में उनकी टीम 'ईस्ट जोन' ने साउथ जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर 14 साल के लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया।
36 वर्ष की उम्र पार करने और राष्ट्रीय टीम से लंबे समय से बाहर रहने के बावजूद मोहम्मद शमी के हौसले में कोई कमी नहीं आई है। करियर के इस 'खास शतक' और खिताबी जीत के बाद शमी ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे आज भी एक छात्र की तरह खेल से जुड़े हैं और उनका एकमात्र लक्ष्य लगातार सीखते रहना और अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना है।
'चाहे पहला मैच हो या 100वां, नजर हमेशा अगले स्तर पर होनी चाहिए': शमी
खिताब जीतने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए मोहम्मद शमी ने अपनी प्रेरणा और खेल के प्रति दृष्टिकोण पर खुलकर विचार साझा किए:
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100वें मैच में खिताबी जीत खास: शमी ने कहा, "अपने 100वें प्रथम श्रेणी मैच में यह उपलब्धि और दलीप ट्रॉफी हासिल करना बेहद खास है। ईस्ट जोन ने बहुत लंबे समय बाद यह खिताब जीता है और चेन्नई की भीषण गर्मी में हर खिलाड़ी ने इस अभियान में जान झोंक दी थी। जहां तक मेरी बात है, चाहे यह आपका पहला मैच हो या 100वां, आपकी मेहनत, एकाग्रता और खेलने का तरीका बिल्कुल वही रहना चाहिए। आपका ध्यान हमेशा अगले स्तर पर होना चाहिए।'
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छाती पर लगे बैज के लिए खेलता हूं: शमी ने कहा, "अगर आप प्रेरणा के कारण तलाशें तो बहुत सारे कारण मिल जाएंगे। इस स्तर पर अगर आप खुद से प्रेरित नहीं हैं तो आपका नजरिया ही गलत है। मैं हमेशा कहता हूं कि आप अपनी छाती पर लगे बैज (प्रतीक) के लिए खेलते हैं। जब आप उस गर्व के साथ मैदान में उतरते हैं तो क्रिकेट का स्तर मायने नहीं रखता, लड़ने की इच्छा और भूख अपने आप बाहर आ जाती है। मेरा माइंडसेट बिल्कुल सीधा है—मुझे जहां भी मौका मिले, मैं टीम के लिए योगदान देना चाहता हूं।'
चेपॉक की सपाट पिच पर रिवर्स स्विंग का कमाल: 'मैं हमेशा सीखता रहता हूं'
चेन्नई के चेपॉक की भीषण गर्मी और सपाट पिच पर जहां तेज गेंदबाजों के लिए कुछ खास मदद नहीं थी, वहां शमी ने अपनी लाइन-लेंथ और रिवर्स स्विंग का बेजोड़ नमूना पेश किया:
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रिवर्स स्विंग की कला: शमी ने कहा, "मैं हमेशा सीखता रहता हूं और लगातार सीखते रहना चाहता हूं। ऐसी परिस्थितियों में आप ज्यादा पारंपरिक स्विंग की उम्मीद नहीं कर सकते और बाउंस भी काफी कम था। मैंने अपनी लाइन और लेंथ पर पूरा भरोसा रखा। और सच कहूं, अगर आप ऐसी गर्मी में पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग का फायदा नहीं उठा सकते तो फिर तेज गेंदबाजी का क्या मतलब है?"
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रणनीति से निकाले अहम विकेट: उन्होंने बताया कि सेट बल्लेबाजों को आउट करने के लिए गेंद को लगातार उनसे दूर रखा गया और फिर अचानक तेजी से अंदर आती गेंद पर बल्लेबाजों को चकमा देकर विकेट निकाले गए। शमी ने मुकेश कुमार के साथ मिलकर साउथ जोन के मध्यक्रम को झकझोर कर पहली पारी में बढ़त पक्की की थी।
राष्ट्रीय टीम में वापसी की उम्मीदें कायम
शमी ने आखिरी बार 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था और 2023 के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल के बाद से वे टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अभी भी टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद रखते हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मुझे हमेशा यही सोचना होगा और उम्मीद बनाए रखनी होगी। मेरा काम केवल मैदान पर पसीना बहाना और कड़ा अभ्यास करना है, चयन मेरे हाथ में नहीं है।" 100वें फर्स्ट-क्लास मैच में यह दमदार प्रदर्शन दिखाता है कि शमी की धार और रफ्तार दोनों बरकरार हैं और वे राष्ट्रीय टीम का दरवाजा खटखटाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।