'मिताली राज का महा-रिकॉर्ड टूटने से महज 113 रन दूर!' स्मृति मंधाना ने सूजी बेट्स को पछाड़ रचा नया इतिहास; दुनिया की टॉप-2 बल्लेबाजों में बनाई जगह, जल्द बनेंगी नंबर-1
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान और विश्व की सबसे विस्फोटक व कलात्मक सलामी बल्लेबाजों में शुमार स्मृति मंधाना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। अपनी बेमिसाल निरंतरता, खूबसूरत कवर ड्राइव और मैच जिताऊ पारियों के दम पर मंधाना ने न्यूजीलैंड की दिग्गज महिला क्रिकेटर सूजी बेट्स को रनों के मामले में पीछे छोड़ दिया है। इस शानदार उपलब्धि के साथ ही वे महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (तीनों प्रारूपों को मिलाकर) में दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं।
स्मृति मंधाना का यह नया कीर्तिमान इस बात का प्रमाण है कि वे मौजूदा दौर में महिला क्रिकेट की सबसे बड़ी सुपरस्टार क्यों मानी जाती हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई से लेकर मेलबर्न और लंदन तक के क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि मंधाना की बल्लेबाजी में जो ठहराव, आक्रामकता और तकनीकी श्रेष्ठता है, उसने आधुनिक महिला क्रिकेट को एक नया आयाम दिया है।
मिताली राज का वर्ल्ड रिकॉर्ड निशाने पर: महज 113 रनों का फासला और नया इतिहास
सूजी बेट्स जैसी महान खिलाड़ी को पछाड़ने के बाद अब स्मृति मंधाना की नजरें भारतीय महिला क्रिकेट की 'गॉडमदर' मानी जाने वाली पूर्व दिग्गज कप्तान मिताली राज के उस ऑल-टाइम वर्ल्ड रिकॉर्ड पर टिक गई हैं, जिसे कभी अटूट माना जाता था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों में सर्वाधिक रन बनाने का वैश्विक कीर्तिमान फिलहाल मिताली राज के नाम दर्ज है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, स्मृति मंधाना अब मिताली राज के इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को ध्वस्त करने से महज 113 रन दूर हैं। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि जिस मौजूदा फॉर्म और लय में स्मृति मंधाना बल्लेबाजी कर रही हैं, उसे देखते हुए वे आगामी कुछ ही पारियों के भीतर इस जादुई आंकड़े को पार कर दुनिया की नंबर-1 ऑल-टाइम रन स्कोरर बन जाएंगी। यह क्षण न केवल मंधाना के व्यक्तिगत करियर के लिए, बल्कि समूचे भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक गौरव का पल होगा जब शीर्ष दो स्थानों पर भारतीय तिरंगा लहराएगा।
क्लास, टाइमिंग और निरंतरता: आधुनिक महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद रन मशीन
स्मृति मंधाना की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खूबी उनकी टाइमिंग और सहज शॉट मेकिंग है। बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हुए ऑफ साइड पर गेंद को गैप में भेजना और स्पिनरों के खिलाफ कदमों का बेहतरीन इस्तेमाल करना उनकी पहचान बन चुका है। चाहे टेस्ट क्रिकेट का धैर्य हो, वनडे की रणनीति हो या फिर टी20 अंतरराष्ट्रीय की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी, मंधाना ने हर प्रारूप में खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित किया है।
पिछले कुछ वर्षों में मंधाना ने विदेशी पिचों—विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका की तेज व उछाल भरी पिचों पर—जिस तरह से शतक और मैच विनिंग पारियां खेली हैं, उसने भारतीय शीर्ष क्रम को एक मजबूत रीढ़ दी है। वे केवल व्यक्तिगत आंकड़े बनाने के लिए नहीं खेलतीं, बल्कि टीम को पावरप्ले में तेज शुरुआत दिलाकर बड़े स्कोर की नींव रखती हैं। कप्तान हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना की यह जोड़ी मौजूदा समय में दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई है।
सांगली की गलियों से विश्व क्रिकेट के शिखर तक: मंधाना का प्रेरणादायी सफर
महाराष्ट्र के छोटे से शहर सांगली से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सर्वोच्च मंच तक पहुंचने का स्मृति मंधाना का सफर भारत के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बचपन में अपने बड़े भाई श्रवण मंधाना को बाएं हाथ से नेट्स में बल्लेबाजी करते देख स्मृति ने भी बाएं हाथ से खेलने का फैसला किया था। उनके पिता श्रीनिवास मंधाना और पूरे परिवार ने उनके क्रिकेट के सपने को पूरा करने के लिए कड़ा परिश्रम और त्याग किया।
घरेलू क्रिकेट में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए उन्होंने बेहद कम उम्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और घरेलू अंडर-19 टूर्नामेंट में दोहरा शतक जड़कर राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। साल 2013 में भारतीय टीम में पदार्पण करने के बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की कप्तानी करते हुए उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता और दबाव में शांत रहने के हुनर को भी पूरी दुनिया के सामने साबित किया है।
भारतीय महिला क्रिकेट का नया स्वर्णिम दौर और आने वाले मुकाबले
दीप्ति शर्मा द्वारा हाल ही में बनाए गए जादुई गेंदबाजी वर्ल्ड रिकॉर्ड और अब स्मृति मंधाना द्वारा ऑल-टाइम रन चार्ट के शिखर के करीब पहुंचने की यह दोहरी उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय महिला क्रिकेट आज अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा पुरुष और महिला क्रिकेटरों के लिए समान मैच फीस लागू करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद से खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और मैदान पर उनके प्रदर्शन में जबर्दस्त उछाल आया है।
भारतीय टीम के आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर अब पूरे देश की नजरें टिकी होंगी, जहां स्मृति मंधाना से 113 रनों की यह दूरी तय कर एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने की उम्मीद की जा रही है। 29 वर्षीय स्मृति मंधाना के पास अभी अपने करियर के कई स्वर्णिम वर्ष बाकी हैं। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि जब वे अपने करियर का समापन करेंगी, तो वे रनों और शतकों के ऐसे नए कीर्तिमान स्थापित कर चुकी होंगी, जिन्हें छूना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सपना जैसा होगा। स्मृति मंधाना का यह ऐतिहासिक सफर यह साबित करता है कि लगन, अनुशासन और अटूट मेहनत से किसी भी बड़े से बड़े सपने को हकीकत में बदला जा सकता है।