तुकाराम मुंढे के FDA ने मारा छापा, करोड़ों का सड़ा माल और डेट मिटाने की मशीनें जब्त; ऐसे चल रहा था सेहत से खिलवाड़ का सिंडिकेट

तुकाराम मुंढे के FDA ने मारा छापा, करोड़ों का सड़ा माल और डेट मिटाने की मशीनें जब्त; ऐसे चल रहा था सेहत से खिलवाड़ का सिंडिकेट

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बच्चों और युवाओं के पसंदीदा स्नैक्स और पैकेज्ड फूड की एक्सपायरी डेट बदलकर बाजार में बेचने वाले एक बहुत बड़े और संगठित गोरखधंधे का पर्दाफाश किया है। अपने कड़े और बेबाक फैसलों के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी और महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे के सीधे आदेश पर एफडीए की विजिलेंस विंग और टास्क फोर्स ने मुंबई, ठाणे और भिवंडी के बड़े गोदामों (Warehouses) पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस सघन अभियान के दौरान अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई जब उन्होंने देखा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नामी ब्रांड्स—लेज (Lay's), कुरकुरे (Kurkure), मैग्गी नूडल्स (Maggi), बिस्कुट, चॉकलेट और पैकेज्ड जूस के एक्सपायर्ड पैकेट्स पर केमिकल और थिनर का इस्तेमाल कर पुरानी तारीखें मिटाई जा रही थीं और आधुनिक कोडिंग मशीनों के जरिए नई 'मैन्युफैक्चरिंग' व 'बेस्ट बिफोर' डेट्स छापी जा रही थीं। एफडीए ने मौके से करोड़ों रुपये का एक्सपायर्ड माल, री-पैकेजिंग मशीनरी और केमिकल सॉल्वेंट्स जब्त कर सिंडिकेट के सरगनाओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है।

एक्सपायरी डेट मिटाने का हाई-टेक खेल: गोदामों में केमिकल और प्रिंटर से ऐसे बदली जा रही थीं तारीखें

एफडीए की छापेमारी में इस पूरे मिलावटी और गैरकानूनी रैकेट की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह सिंडिकेट बड़े रिटेल मार्ट्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और सुपरमार्केट्स से उन खाद्य उत्पादों को कौड़ियों के दाम पर खरीदता था जिनकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी होती थी या निकलने वाली होती थी। नियमानुसार एक्सपायर्ड हो चुके माल को कंपनियों द्वारा रिसाइकल या नष्ट (Destroy) किया जाना चाहिए, लेकिन गोदाम मालिक इन्हें ब्लैक मार्केट से सस्ते दामों में उठा लेते थे।

गोदामों के भीतर एक पूरा अवैध प्लांट स्थापित किया गया था। वहां मौजूद मजदूर एसीटोन, नेल पॉलिश रिमूवर जैसे तीव्र केमिकल सॉल्वेंट्स और थिनर की मदद से पैकेट पर छपे बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट को पूरी तरह मिटा देते थे। इसके बाद, कंप्यूटर से जुड़ी हाई-स्पीड इंडस्ट्रियल इंकजेट प्रिंटिंग मशीनों के जरिए उसी पैकेट पर एक से दो साल आगे की नकली निर्माण तिथि और ताजा एक्सपायरी डेट प्रिंट कर दी जाती थी। प्रिंटिंग की गुणवत्ता इतनी बारीक और असली जैसी होती थी कि सामान्य तौर पर किसी भी ग्राहक या छोटे दुकानदार के लिए असली और जाली पैकेट में अंतर कर पाना लगभग नामुमकिन था।

बच्चों की सेहत से खिलवाड़: लेज, कुरकुरे और मैग्गी जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स बने निशाना

इस सिंडिकेट का सबसे खतरनाक पहलू यह था कि उन्होंने अपने इस काले कारोबार के लिए उन उत्पादों को चुना जिनकी खपत सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों और परिवारों में होती है। लेज के पोटैटो चिप्स, कुरकुरे के नमकीन स्नैक्स और नेस्ले की मैग्गी नूडल्स भारत के हर घर और हर गली के नुक्कड़ पर दैनिक रूप से बिकने वाले उत्पाद हैं।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सपायर्ड पैकेज्ड फूड खाना मानव शरीर के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। चिप्स, नूडल्स और फ्राइड स्नैक्स में इस्तेमाल होने वाला तेल समय बीतने के साथ 'रैनसिड' (Rancid - सड़ा हुआ और विषाक्त) हो जाता है। इसमें हानिकारक फ्री-रेडिकल्स और टॉक्सिन्स पैदा हो जाते हैं जो लिवर और आंतों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे सड़े हुए तेल और मसालों से बने खाद्य पदार्थ खाने से फूड पॉइजनिंग, एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी-दस्त, पेट में गंभीर संक्रमण और लंबे समय में पेट के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से बच्चों का कमजोर पाचन तंत्र ऐसे जहरीले रसायनों और बैक्टीरिया के हमले को झेल नहीं पाता।

तुकाराम मुंढे के एफडीए का चक्रव्यूह: भिवंडी और ठाणे के गोदामों पर एक साथ कार्रवाई

महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे को जब इस संगठित रैकेट के बारे में गोपनीय इनपुट मिला, तो उन्होंने स्थानीय पुलिस और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक संयुक्त विशेष टीम का गठन किया। ऑपरेशन को पूरी तरह गोपनीय रखा गया ताकि आरोपियों को माल हटाने का जरा सा भी मौका न मिले।

भिवंडी के लॉजिस्टिक्स हब और ठाणे के उपनगरीय इलाकों में स्थित विशाल गोदामों पर जब अधिकारियों ने एक साथ दबिश दी, तो वहां दर्जनों मजदूर एक्सपायरी डेट मिटाने के काम में रंगे हाथों पकड़े गए। एफडीए की टीम ने मौके से 50 लाख से अधिक मूल्य के एक्सपायर्ड स्नैक्स, सैकड़ों लीटर केमिकल सॉल्वेंट्स, दर्जनों पैकेजिंग व इंकजेट कोडिंग मशीनें और हजारों जाली लेबल्स जब्त किए। अधिकारियों ने पूरा परिसर सील कर दिया है और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSA 2006) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जालसाजी, धोखाधड़ी और जानलेवा मिलावट से जुड़ी कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एक्सपायरी माल कैसे पहुंचता था रिटेल मार्केट में? सप्लाई चेन का पर्दाफाश

पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह एक्सपायर्ड और रि-प्रिंटेड माल बड़े और ब्रांडेड स्टोर्स में भेजने के बजाय टियर-2 और टियर-3 शहरों, ग्रामीण इलाकों, साप्ताहिक हाट-बाजारों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों के पास मौजूद छोटी किराना दुकानों में खपाया जाता था। सिंडिकेट के एजेंट इन छोटे दुकानदारों को 40 से 50 प्रतिशत के भारी-भरकम डिस्काउंट और कमीशन का लालच देते थे।

अधिक मुनाफे के लालच में कई छोटे दुकानदार बिना बिल और बिना आधिकारिक डिस्ट्रीब्यूटर चैनल के यह माल खरीद लेते थे। चूंकि इन इलाकों में ग्राहक अक्सर पैकेट पर केवल कंपनी का नाम और बड़ा लोगो देखकर सामान खरीद लेते हैं और एक्सपायरी डेट की बारीक जांच नहीं करते, इसलिए यह सिंडिकेट पिछले कई महीनों से बेखौफ होकर लाखों लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था। एफडीए अब उन डिस्ट्रीब्यूटर्स और थोक व्यापारियों की लिस्ट भी तैयार कर रहा है जिन्होंने जानबूझकर यह सड़ा माल बाजार में सप्लाई किया था।

उपभोक्ता कैसे पहचानें असली और एक्सपायरी पैकेट? एफडीए की सख्त एडवाइजरी

इस बड़े खुलासे के बाद महाराष्ट्र एफडीए ने आम जनता और उपभोक्ताओं के लिए एक जरूरी और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। एफडीए ने नागरिकों से अपील की है कि वे कोई भी पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें:

  • डेट प्रिंटिंग की जांच करें: यदि पैकेट पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग या एक्सपायरी डेट के अक्षरों के आसपास स्याही फैली (Smudged) हुई दिखे, फॉन्ट धुंधला हो या तारीख के नीचे किसी पुराने अक्षर का निशान नजर आए, तो वह पैकेट बिल्कुल न खरीदें।

  • पैकेट की सीलिंग देखें: यदि पैकेट की मूल सील से छेड़छाड़ की गई हो या किनारे से दोबारा चिपकाया गया लगे, तो सतर्क हो जाएं।

  • अजीब गंध या स्वाद: पैकेट खोलते ही यदि तेल की तीखी बदबू (बासीपन) आए या स्नैक्स का कुरकुरापन खत्म होकर स्वाद कड़वा लगे, तो उसे तुरंत फेंक दें और बच्चों को खाने न दें।

  • अधिकृत दुकानों से पक्के बिल पर खरीदारी: सड़क किनारे के संदिग्ध विक्रेताओं से भारी छूट वाले पैकेज्ड फूड खरीदने से बचें और हमेशा पक्का बिल मांगें।

  • टोल-फ्री नंबर पर करें शिकायत: यदि किसी भी दुकान पर एक्सपायरी डेट से छेड़छाड़ किया हुआ माल नजर आए, तो तुरंत एफडीए के टोल-फ्री नंबर (1800-222-365) या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एफडीए की इस आक्रामक और ताबड़तोड़ कार्रवाई ने पूरे खाद्य सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता की सेहत और जीवन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी मिलावटखोर और सिंडिकेट को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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