8वें वेतन आयोग का देशव्यापी मंथन: चेन्नई, पुडुचेरी से लेकर चंडीगढ़ और बेंगलुरु तक बैठकों का शेड्यूल जारी; फिटमेंट फैक्टर

8वें वेतन आयोग का देशव्यापी मंथन: चेन्नई, पुडुचेरी से लेकर चंडीगढ़ और बेंगलुरु तक बैठकों का शेड्यूल जारी; फिटमेंट फैक्टर

देश भर के करीब 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की ओर से एक बहुत बड़ा और निर्णायक अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वां वेतन आयोग अब अपनी सिफारिशों और नए पे-स्ट्रक्चर के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले देश भर के प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सघन दौरे पर निकल चुका है। राजस्थान के जयपुर में दो दिवसीय अहम बैठकें संपन्न करने के बाद आयोग ने अब दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत के राज्यों के लिए बैठकों का विस्तृत आधिकारिक शेड्यूल जारी कर दिया है। सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान आयोग की टीम चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में कर्मचारी यूनियनों, सर्विस एसोसिएशनों, रक्षा व रेलवे प्रतिनिधियों और पेंशनर्स संगठनों के साथ आमने-सामने बैठकर उनकी मांगों, सर्विस कंडीशन और वेतन विसंगतियों पर गहन विचार-विमर्श करेगी।

8वें वेतन आयोग का देशव्यापी दौरा: चेन्नई से चंडीगढ़ तक बैठकों का पूरा शेड्यूल

वेतन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, आयोग की परामर्श बैठकों का अगला चरण दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्र चेन्नई से शुरू हो रहा है। आयोग की टीम 7 और 8 सितंबर 2026 (सोमवार और मंगलवार) को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में रहेगी। इस दौरान तमिलनाडु क्षेत्र के उन सभी कर्मचारी व पेंशनर्स संगठनों से मुलाकात की जाएगी, जिन्होंने निर्धारित समय सीमा 18 अगस्त तक अपना आधिकारिक ज्ञापन और अपॉइंटमेंट अनुरोध जमा कराया था।

चेन्नई के तुरंत बाद आयोग 9 सितंबर 2026 (बुधवार) को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी का दौरा करेगा, जहां स्थानीय प्रशासन और क्षेत्रीय कर्मचारियों की विशिष्ट समस्याओं को सुना जाएगा। इसके पश्चात आयोग का कारवां उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा, जहां 16 से 18 सितंबर 2026 (बुधवार से शुक्रवार) तक तीन दिनों तक चंडीगढ़ में मैराथन बैठकों का आयोजन किया जाएगा। चंडीगढ़ की यह बैठक रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारी संघों, पूर्व अर्धसैनिक बलों और रक्षा पेंशनभोगियों के प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे, जिन्होंने 25 अगस्त तक अपना पंजीकरण पूरा किया था।

सितंबर के इन दौरों के बाद आयोग 7 और 8 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बैठकें करेगा, जिसके लिए स्टेकहोल्डर्स 18 सितंबर तक अपने आवेदन और ज्ञापन जमा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, देश की वित्तीय राजधानी मुंबई के लिए भी आयोग विशेष दौरे की योजना बना रहा है, जहां विशेष रूप से सेंट्रल रेलवे और वेस्टर्न रेलवे के परिचालन विभागों, लोको पायलटों और ग्राउंड स्टाफ की कार्य परिस्थितियों का जमीनी मुआयना किया जाएगा।

फिटमेंट फैक्टर, बेसिक सैलरी और 7% इंक्रीमेंट: टेबल पर रखी गई हैं ये प्रमुख मांगें

वेतन आयोग की इन क्षेत्रीय बैठकों के केंद्र में सबसे बड़ा मुद्दा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) और न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) का निर्धारण है। विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी परिसंघों (NC-JCM, AIDEF, FNPO और रेलवे यूनियनों) ने आयोग के समक्ष विस्तृत ज्ञापन सौंपकर फिटमेंट फैक्टर को 7वें वेतन आयोग के 2.57 से बढ़ाकर 3.68 से 3.83 गुना तक करने की पुरजोर वकालत की है। कर्मचारियों का तर्क है कि पिछले एक दशक में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों, आवास खर्च, स्वास्थ्य और बच्चों की उच्च शिक्षा की लागत में भारी इजाफा हुआ है, जिसके चलते न्यूनतम मूल वेतन को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 50,000 से 56,000 रुपये के दायरे में लाया जाना चाहिए।

इसके अलावा, इस बार की बैठकों में एक और नया और क्रांतिकारी प्रस्ताव चर्चा में है, जो है 'वार्षिक वेतन वृद्धि' (Annual Increment) की दर में बदलाव। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मियों को सालाना 3 प्रतिशत की दर से इंक्रीमेंट मिलता है। कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष मांग रखी है कि इस दर को बढ़ाकर 5% से 7% तक किया जाए। विश्लेषकों का मानना है कि जिन कर्मचारियों की 15 से 30 साल की लंबी सेवा बाकी है, उनके लिए 7% वार्षिक इंक्रीमेंट लंबे समय में किसी भी शुरुआती फिटमेंट फैक्टर से कहीं अधिक कंपाउंडिंग लाभ प्रदान करेगा और करियर के अंतिम पड़ाव में उनकी बेसिक पे को कई गुना बढ़ा देगा।

पेंशनर्स और अलाउंस पर भी नजर: ओपीएस, एनपीएस और एचआरए पर व्यापक मंथन

8वें वेतन आयोग की इन बैठकों में केवल सेवारत कर्मचारियों के वेतन पर ही नहीं, बल्कि देश के 65 लाख से अधिक वरिष्ठ पेंशनभोगियों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर भी गंभीर चर्चा हो रही है। पेंशनर्स एसोसिएशनों ने आयोग से स्पष्ट मांग की है कि 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पूरी करने पर अतिरिक्त पेंशन वृद्धि का स्लैब शुरू किया जाए, जो वर्तमान में केवल 80 वर्ष की उम्र के बाद मिलता है।

इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना (OPS), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और हाल ही में घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तुलनात्मक प्रावधानों पर भी कर्मचारी संगठन अपना पक्ष मजबूती से रख रहे हैं। महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को समय-समय पर मूल वेतन में 50% पर मर्ज करने की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग भी उठाई जा रही है।

भत्तों (Allowances) के मोर्चे पर, एक्स, वाई और जेड श्रेणी के शहरों में हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), चिल्ड्रन्स एजुकेशन अलाउंस (CEA) और दूरदराज या कठिन इलाकों में तैनात जवानों व अधिकारियों के लिए स्पेशल हार्डशिप अलाउंस को मुद्रास्फीति के वास्तविक आंकड़ों के अनुरूप संशोधित करने का दबाव बनाया जा रहा है।

8वें वेतन आयोग की टीम और कार्यप्रणाली: जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में तैयार हो रहा ड्राफ्ट

केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी है। जस्टिस देसाई की अध्यक्षता वाले इस उच्चस्तरीय आयोग में पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज जैन सदस्य-सचिव के रूप में प्रशासनिक और वित्तीय समन्वय संभाल रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य और प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री प्रोफेसर पुलक घोष आयोग के विशेषज्ञ सदस्य के तौर पर मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा और वित्तीय व्यवहार्यता का विश्लेषण कर रहे हैं।

आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह डेटा-संचालित और पारदर्शी बनाया है। सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और कर्मचारी संगठनों से ऑनलाइन पोर्टल के जरिए विस्तृत आंकड़े और सुझाव पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं। अब यह जो देशव्यापी दौरा हो रहा है, इसका मुख्य उद्देश्य केवल कागजी आंकड़ों को देखना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले ग्रुप 'सी' और ग्रुप 'बी' के कर्मचारियों, रेलवे ट्रैक मेंटेनर्स, डाक कर्मचारियों, रक्षा असैन्य कर्मियों और अस्पताल स्टाफ की वास्तविक कामकाजी परिस्थितियों को समझकर एक संतुलित और न्यायसंगत सिफारिश तैयार करना है।

कब आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट और कब से मिलेगा बढ़ी हुई सैलरी का फायदा?

8वें वेतन आयोग का आधिकारिक गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और सरकार ने आयोग को अपनी संपूर्ण रिपोर्ट और सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी है। इस तय समयरेखा के अनुसार, आयोग की अंतरिम या अंतिम रिपोर्ट फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच केंद्र सरकार को सौंपी जा सकती है, जबकि रिपोर्ट जमा करने की अधिकतम आखिरी तारीख मई 2027 निर्धारित है।

हालांकि, प्रशासनिक और बजटीय प्रक्रियाओं के इतिहास को देखते हुए रिपोर्ट सौंपे जाने के तुरंत बाद इसे लागू नहीं किया जाता। आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा एक सचिवों की अधिकार प्राप्त समिति (Empowered Committee of Secretaries) का गठन किया जाएगा, जो इन सिफारिशों के वित्तीय बोझ और प्रभाव का आकलन करेगी। आमतौर पर कैबिनेट की अंतिम मंजूरी और संशोधित पे-रूल्स की अधिसूचना जारी होने में कुछ महीनों का समय लगता है। हालांकि, केंद्र सरकार की यह परंपरा रही है कि वेतन आयोग की सिफारिशों को पिछली प्रभावी तिथि (1 जनवरी 2026) से लागू किया जाता है, जिसके चलते कर्मचारियों को पिछले महीनों का पूरा एरियर (बकाया) एकमुश्त प्रदान किया जाता है। चेन्नई से लेकर चंडीगढ़ तक चल रही ये बैठकें इसी बात का स्पष्ट संकेत हैं कि वेतन आयोग पूरी तत्परता के साथ अपनी रिपोर्ट को तय समय में पूरा करने के मिशन पर जुट चुका है।

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