प्रयागराज में बाढ़ जैसे हालात: रामबाग रेलवे स्टेशन से लेकर गली-मोहल्ले तक जलप्रलय, गंगा-यमुना के उफान से 90% शहर डूबा

प्रयागराज में बाढ़ जैसे हालात: रामबाग रेलवे स्टेशन से लेकर गली-मोहल्ले तक जलप्रलय, गंगा-यमुना के उफान से 90% शहर डूबा

संगम नगरी प्रयागराज में बीते 72 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश और गंगा-यमुना के लगातार बढ़ते जलस्तर ने पूरे शहर को जलप्रलय के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक शहर प्रयागराज का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा भीषण जलभराव और बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुका है। रिहायशी बस्तियों से लेकर सरकारी दफ्तरों, थानों, रेलवे स्टेशनों और प्रतिष्ठित कॉलेजों तक केवल पानी ही पानी नजर आ रहा है। सड़कों ने उफनती नदियों का रूप ले लिया है और कॉलोनियों में आवागमन के लिए गाड़ियों की जगह अब एनडीआरएफ की मोटरबोट्स और स्थानीय नावें तैरती दिखाई दे रही हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों को बंद रखने का निर्देश दिया है, वहीं शहर की बदहाली पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।

रामबाग रेलवे स्टेशन बना तालाब: पटरियों पर 3 फीट पानी, कई ट्रेनें प्रभावित

शहर में बारिश और जलनिकासी व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का सबसे बड़ा असर भारतीय रेल के संचालन पर पड़ा है। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के अंतिम और प्रमुख स्टेशन प्रयागराज रामबाग रेलवे स्टेशन का पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो चुका है।

स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1, 2 और 3 के रेलवे ट्रैक पर तीन फीट से अधिक गहरा पानी भर गया है। पटरियों के पानी में पूरी तरह डूब जाने के कारण इन प्लेटफॉर्मों पर ट्रेनों का आवागमन सुरक्षा कारणों से तत्काल रोक दिया गया। रेलवे प्रशासन को आपातकालीन व्यवस्था के तहत ट्रेनों को प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर स्थानांतरित करना पड़ा, जबकि वाराणसी-हावड़ा रूट की कई मेमू और पैसेंजर ट्रेनों को आंशिक रूप से निरस्त या आउटर स्टेशनों पर रोकना पड़ा। रेलवे की इंजीनियरिंग विंग पटरियों से पानी निकालने के लिए आधा दर्जन हेवी पंपिंग सेट लगाकर युद्धस्तर पर जुटी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश से राहत कार्य में भारी मुश्किलें आ रही हैं।

गली-मोहल्लों में नाव चलने की नौबत: करेली, सलोरी और बघाड़ा में घुसा पानी

शहर के निचले रिहायशी इलाकों की स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है। करेली क्षेत्र के जसीर की पुलिया और गड्ढा कॉलोनी में घरों के भीतर चार फीट तक गंदा पानी घुस गया है। लोग रातभर अपने बिस्तरों, छतों और अलमारियों पर बैठकर रात काटने को मजबूर हुए। स्थानीय लोग बाल्टियों और बर्तनों से पानी उलीचते नजर आए, लेकिन जलस्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा।

छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, सलोरी, दारागंज, राजरूपपुर, गौसनगर, लूकरगंज, बेनीगंज, आजाद नगर, भारद्वाजपुरम, हिम्मतगंज और रसूलाबाद की संकरी गलियों में पानी का तेज बहाव देखा जा रहा है। हजारों घरों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कीमती फर्नीचर, राशन और बिस्तर पानी में तैरते देखे गए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों छात्र, जो बघाड़ा और सलोरी के लॉज व हॉस्टलों में रहते हैं, उनके कमरों में घुटनों तक पानी भर जाने से उनकी किताबें और जरूरी दस्तावेज नष्ट हो गए हैं। कई कॉलोनियों में बिजली के पोल डूबने के कारण एहतियातन बिजली आपूर्ति काट दी गई है, जिससे लोग पीने के पानी और अंधेरे के संकट से जूझ रहे हैं।

थानों और डिग्री कॉलेजों में भरा पानी, हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

बारिश का कहर केवल आम नागरिकों के घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन-प्रशासन के केंद्र भी इससे अछूते नहीं रहे। शहर के पॉश इलाके में स्थित जॉर्ज टाउन थाने के भीतर दो फीट तक पानी भर गया, जहां पुलिसकर्मी अपनी वर्दी ऊपर कर और जूते उतारकर फाइलों को बचाते नजर आए। सिविल लाइंस, महिला थाना, कैंट, कोतवाली और करेली थाने के परिसर भी जलमग्न हो चुके हैं। यहां तक कि नगर आयुक्त के आवास और नगर निगम मुख्यालय के परिसर में भी भारी जलभराव देखने को मिला।

प्रयागराज के प्रतिष्ठित सीएमपी (CMP) डिग्री कॉलेज का परिसर किसी झील जैसा दिखने लगा है। कॉलेज की कक्षाओं, पुस्तकालय और प्राचार्य कार्यालय में पानी घुसने से शैक्षणिक कार्य पूरी तरह ठप हो गया। वहीं दारागंज गंगा रिवर फ्रंट पर खड़ी एक कार अचानक बढ़ते पानी के तेज बहाव में समा गई, जिसमें सवार सात यात्रियों ने समय रहते कूदकर अपनी जान बचाई।

शहर की इस दुर्दशा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने प्रयागराज में भीषण जलभराव का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम की है। अदालत ने प्रयागराज के जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से तलब कर जवाब मांगा है कि अरबों रुपये के स्मार्ट सिटी और ड्रेनेज बजट के बावजूद शहर को जलमग्न होने से बचाने के लिए पहले से पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

गंगा और यमुना के जलस्तर में तेज बढ़ोतरी: कछारी इलाकों पर मंडराया संकट

एक तरफ जहां शहर आंतरिक जलभराव से कराह रहा है, वहीं दूसरी ओर दोनों प्रमुख नदियों—गंगा और यमुना—का उफान स्थिति को और अधिक विकराल बना रहा है। केंद्रीय जल आयोग और बाढ़ नियंत्रण कक्ष की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, फाफामऊ, छतनाग और नैनी गेज स्टेशनों पर जलस्तर लगातार चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ रहा है।

छतनाग में गंगा का जलस्तर 78.92 मीटर और नैनी में यमुना का स्तर 79.35 मीटर के पार पहुंच चुका है। पिछले 24 घंटों में दोनों नदियों में 50 सेंटीमीटर से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बक्शी बांध के पास फाफामऊ को जोड़ने वाला गंगा पथ जलमग्न हो चुका है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। दारागंज के दशाश्वमेध घाट और संगम क्षेत्र के निचले हिस्से जलमग्न हो गए हैं और वहां बनी पुरोहितों व नाविकों की झोपड़ियां पानी में समा गई हैं। नदियों के बैकफ्लो के कारण शहर के मुख्य नालों का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है, जिससे कछारी बस्तियों में पानी का स्तर घटने के बजाय और तेजी से बढ़ रहा है।

एनडीआरएफ की टीमें तैनात, 12वीं तक के सभी स्कूल बंद और अलर्ट जारी

बाढ़ और जलभराव की दोहरी मार से नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया है। करेली, मुंडेरा और कछारी इलाकों में फंसे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को नावों के जरिए सुरक्षित निकालकर ऊंचे स्थानों और शेल्टर होम में शिफ्ट किया जा रहा है।

जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने जिले में कानून व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल वैन और मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को तैनात कर दिया है ताकि जलजनित बीमारियों और संक्रामक रोगों का प्रकोप न फैले। प्रशासन ने नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और गहरे पानी वाले रास्तों पर लाल झंडियां व बैरिकेड्स लगा दिए हैं।

जल निकासी के 15 करोड़ के बजट पर सवाल, नगर निगम में पार्षदों का भारी हंगामा

शहर की इस बदहाली ने नगर निगम के मानसून पूर्व दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी है। मानसून से पहले नाला सफाई और गाद निकालने के नाम पर 15 करोड़ रुपये से अधिक का बजट खर्च करने का दावा किया गया था, लेकिन पहली बड़ी बारिश में ही शहर डूब गया।

मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय में उस समय भारी बवाल मच गया जब दर्जनों पार्षद जलभराव से त्रस्त होकर धरने पर बैठ गए। पार्षदों ने आरोप लगाया कि नाला सफाई सिर्फ कागजों पर हुई और सीएम ग्रिड योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती गई। क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने और जनता की सुध न लेने को लेकर पार्षदों ने इस्तीफे तक की चेतावनी दे डाली।

मौसम विभाग की चेतावनी: अगले 48 घंटे बेहद सतर्क रहने की जरूरत

मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने प्रयागराज समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अगले 48 से 72 घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऊपर के राज्यों और बांधों से छोड़े जाने वाले पानी के कारण गंगा और यमुना का जलस्तर अगले दो दिनों में खतरे के निशान (84.73 मीटर) के करीब पहुंच सकता है। प्रशासन ने गंगा-यमुना के किनारे रहने वाले सभी नागरिकों से अपील की है कि वे कछारी इलाकों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों अथवा प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में समय रहते शरण ले लें।

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