यूपी में बाढ़ का रौद्र रूप: बनबसा से 1.23 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद खतरे के निशान के पार शारदा, घाघरा के उफान से 12 जिलों के सैकड़ों गांवों में घुसा पानी
पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों में जारी मूसलाधार बारिश और बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण उत्तर प्रदेश के तराई और मैदानी इलाकों में बाढ़ की स्थिति अत्यंत विकराल हो गई है। उत्तराखंड स्थित बनबसा बैराज से 1.23 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद लखीमपुर खीरी के पलियाकलां में शारदा नदी खतरे के निशान (154.70 मीटर) को पार कर गई है। वहीं दूसरी ओर, घाघरा (सरयू) नदी भी बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज, बहराइच और सीतापुर में लाल निशान के ऊपर बहते हुए रौद्र रूप दिखा रही है। दोनों प्रमुख नदियों के उफनाने से न केवल हजारों एकड़ में खड़ी गन्ने और धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं, बल्कि पानी अब रिहायशी बस्तियों, सरकारी स्कूलों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों की ओर तेजी से बढ़ने लगा है। राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 12 संवेदनशील जिलों के 166 से अधिक गांव इस समय जलप्रलय और नदी कटान की दोहरी मार झेल रहे हैं।
बनबसा बैराज से 1.23 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बिगड़े हालात, पलिया में खतरे के पार शारदा
तराई के जिलों में बाढ़ की मुख्य वजह नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रहा जलप्रवाह और उत्तराखंड के बांधों से अतिरिक्त पानी का डिस्चार्ज है। बनबसा बैराज के फाटक खोले जाने के बाद शारदा नदी में उफान आ गया और इसका जलस्तर 154.70 मीटर के पार पहुंच गया, जो खतरे के बिंदु से काफी ऊपर है।
शारदा के तेज प्रवाह ने लखीमपुर खीरी के पलिया, निघासन और धौरहरा तहसीलों के निचले तटीय इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। पानी का दबाव इतना अधिक है कि नदियों के तटबंधों पर लगातार कटाव का खतरा बना हुआ है। सिंचाई विभाग के अभियंता तटबंधों की मजबूती के लिए दिन-रात जियो-बैग्स और बोल्डर पिचिंग के जरिए संवेदनशील बिंदुओं की निगरानी कर रहे हैं, ताकि पानी आबादी वाले मुख्य शहरों में प्रवेश न कर सके।
निघासन के ग्रंट नंबर 12 में भीषण कटान: गन्ने की फसलें और वन क्षेत्र नदी में समाए
बाढ़ के पानी के साथ-साथ शारदा नदी का भीषण कटान ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा खौफ बन चुका है। तहसील निघासन के ग्रंट नंबर 12 इलाके में शारदा नदी ने किनारे की कृषि योग्य भूमि को काटना शुरू कर दिया है।
स्थानीय किसानों की लगभग 12 बीघा से अधिक गन्ने की लहलहाती फसल देखते ही देखते नदी की तेज जलधारा में समा गई। इसके साथ ही सामाजिक वानिकी और वन विभाग के सैकड़ों पुराने पेड़ कटकर नदी में बह गए हैं। नदी तेजी से कटान करती हुई रंडौहा और दौलतापुर गांव की रिहायशी बस्तियों की तरफ बढ़ रही है, जिससे ग्रामीण अपने पक्के मकानों को तोड़कर ईंटें और सामान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाने को मजबूर हो रहे हैं। दौलतापुर से बम्हनपुर जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित घाघी पुलिया के ऊपर घुटनों तक पानी बह रहा है, जिससे इलाके का आवागमन ठप हो गया है।
धौरहरा और ईसानगर में घरों और स्कूलों में घुसा पानी: चकदहा में बही पुलिया, NH-730 पर खतरा
घाघरा नदी के उफान ने धौरहरा और ईसानगर क्षेत्र में भयंकर तबाही मचा रखी है। ईसानगर के चकदहा गांव में घाघरा का पानी प्रवेश करने से लगभग सभी घरों में 3 से 4 फीट पानी भर चुका है। गांव का प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिससे शिक्षण कार्य ठप हो गया है। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली संपर्क पुलिया पानी के तेज बहाव में बह गई है, जिसके चलते गांव का सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है।
वहीं धौरहरा तहसील के जसवंत नगर तटबंध से लेकर सदर तहसील के खानीपुर तक बाढ़ का पानी फैल चुका है। नेशनल हाइवे 730 (NH-730) के किनारे तक घाघरा और शारदा का बैकवाटर पहुंचने से राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के आवागमन को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। हाइवे से सटे रेहरिया मार्ग पर भी पानी की तेज धार चलने लगी है, जिससे दोपहिया और छोटे वाहनों का गुजरना जोखिम भरा हो गया है।
चौका और घाघरा के घेरे में सदर तहसील के दर्जनों पुरवे: मुख्य मार्गों पर 3 से 4 फीट तक पानी
सदर तहसील के अंतर्गत चौका नदी और शारदा के दोहरे दबाव के कारण रेहरिया कलां, रेहरिया खुर्द, प्रधान पुरवा, लोधपुरवा, खानीपुर, पंचम पुरवा, झाला, राम सिंह पुरवा और श्यामलाल पुरवा जैसे दर्जनों मजरे पानी के टापू बन चुके हैं।
इन पुरवों में रहने वाले हजारों परिवारों के घरों में चूल्हा जलना दूभर हो गया है। हैंडपंपों के पानी में डूब जाने से शुद्ध पेयजल का भारी संकट खड़ा हो गया है। पशुपालकों के सामने मवेशियों को बचाने और उनके चारे का गंभीर संकट है, क्योंकि चारागाह और खेतों में भरा पानी मवेशियों के चारे को सड़ा चुका है। ग्रामीण छतों, मचानों और ऊंचे तटबंधों पर तिरपाल डालकर शरण लिए हुए हैं।
प्रदेश के 12 जिलों में हाहाकार: 86 रेस्क्यू टीमें मुस्तैद, 1586 बाढ़ चौकियां और शरणालय सक्रिय
उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केवल लखीमपुर खीरी ही नहीं बल्कि प्रदेश के 12 जिले—बाराबंकी, बहराइच, सीतापुर, गोंडा, अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, गोरखपुर, कासगंज, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर और प्रयागराज—बाढ़ से सीधे प्रभावित हैं। इन जिलों के 166 गांवों में 64,402 से अधिक की आबादी प्रभावित हुई है।
आपदा से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासन ने राहत एवं बचाव तंत्र को पूरी क्षमता के साथ झोंक दिया है। एनडीआरएफ (NDRF) की 18 टीमें, एसडीआरएफ (SDRF) की 16 टीमें और पीएसी (PAC) की 52 टीमें यानी कुल 86 विशेष राहत दल ग्राउंड जीरो पर तैनात हैं। प्रभावितों को सुरक्षित निकालने के लिए 5,849 देशी नावें और 1,101 मोटरबोट्स लगातार फेरे लगा रही हैं। प्रशासन ने पूरे प्रदेश में 1,586 बाढ़ चौकियां, 1,263 बाढ़ शरणालय और 308 खाद्यान्न वितरण केंद्र स्थापित किए हैं, जहां से अब तक 15 हजार से अधिक राशन किट और 24 हजार से ज्यादा लंच पैकेट बांटे जा चुके हैं।
कटान और संक्रामक रोगों से बचाव के लिए प्रशासन का हाई अलर्ट: हेल्पलाइन और मेडिकल टीमें तैनात
बाढ़ के पानी के साथ-साथ जलजनित बीमारियों, डायरिया, हैजा और सर्पदंश के खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की 69 विशेष मेडिकल टीमें और 51 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों में अब तक 22 हजार से अधिक ओआरएस पैकेट और 40 हजार से ज्यादा क्लोरीन की गोलियां बांटी गई हैं। पशुपालन विभाग ने प्रभावित 3,500 से अधिक पशुओं के लिए 154 क्विंटल सूखा भूसा और आवश्यक दवाएं पहुंचाई हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटों में तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है, जिससे शारदा, घाघरा, राप्ती और गंडक नदियों का जलस्तर अभी और बढ़ सकता है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 24 घंटे कंट्रोल रूम को एक्टिव रखें, संवेदनशील तटबंधों पर रात में भी गश्त कराएं और किसी भी स्थिति में प्रभावित परिवारों तक भोजन, शुद्ध पानी और चिकित्सा सहायता पहुंचने में कोई देरी न होने दें। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे उफनती नदियों और रपटों को पार करने का जोखिम न उठाएं और सुरक्षित शरणालयों में ही रहें।