बाराबंकी तक दौड़ेगी लखनऊ मेट्रो, 10 नए कॉरिडोर और डिपो के लिए जमीन की तलाश तेज

बाराबंकी तक दौड़ेगी लखनऊ मेट्रो, 10 नए कॉरिडोर और डिपो के लिए जमीन की तलाश तेज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को भविष्य के महायोजना विजन-2047 और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की तर्ज पर विकसित हो रहे राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के अनुरूप विश्वस्तरीय पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। लखनऊ मेट्रो का दायरा अब केवल शहर की आंतरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पड़ोसी जिले बाराबंकी तक विस्तारित करने का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इस महाविस्तार योजना के तहत राजधानी और उसके उपनगरीय अंचलों को आपस में जोड़ने के लिए कुल 10 नए मेट्रो कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं। इन नए कॉरिडोरों पर ट्रेनों के सुरक्षित संचालन, ठहराव, सफाई और नियमित तकनीकी अनुरक्षण के लिए एक विशाल आधुनिक मेट्रो डिपो की आवश्यकता होगी, जिसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने लगभग 20 हेक्टेयर जमीन के चिह्नांकन का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।

बाराबंकी से जुड़ेगी लखनऊ मेट्रो: एससीआर कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आयाम

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UPSCR) के तहत लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, रायबरेली और बाराबंकी जनपदों को आपस में जोड़कर आर्थिक और औद्योगिक विकास का नया पहिया घुमाने की योजना है। इसी रीजनल प्लान के तहत लखनऊ मेट्रो को सीधे बाराबंकी से जोड़ा जा रहा है। इससे लखनऊ और बाराबंकी के बीच प्रतिदिन आवागमन करने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, छात्रों और आम नागरिकों को भीषण जाम और निजी वाहनों के भारी खर्च से सदा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। अनौरा कला से बाराबंकी तक बनने वाला विशेष कॉरिडोर दोनों शहरों के बीच की यात्रा को मिनटों में समेट देगा, जिससे बाराबंकी का तेजी से शहरीकरण होगा और स्थानीय रियल एस्टेट व व्यापार को भारी पंख लगेंगे।

एलडीए वीसी ने बनाई 5 सदस्यीय समिति: 20 हेक्टेयर जमीन की तलाश शुरू

मेट्रो डिपो और ट्रैक अलाइनमेंट के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने पांच वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति में एलडीए के अपर सचिव, वित्त नियंत्रक, मुख्य नगर नियोजक (सीटीपी) और मुख्य अभियंता को सदस्य बनाया गया है, जबकि अधिशासी अभियंता मनोज सागर को इस विशेष समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है। समिति को प्रस्तावित मेट्रो संरेखण (अलाइनमेंट) के 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में ऐसी उपयुक्त सरकारी व गैर-सरकारी भूमि तलाशने का जिम्मा सौंपा गया है, जिसे मुख्य मेट्रो लाइन से आसानी से जोड़ा जा सके। अब तक प्रारंभिक चरण में तीन प्रमुख स्थलों पर जमीनों का निरीक्षण भी किया जा चुका है।

डिपो के लिए खास व्यवस्था: ट्रेनों के रखरखाव और पार्किंग का बनेगा केंद्र

मेट्रो नेटवर्क के सुचारू संचालन में डिपो की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। 10 नए कॉरिडोर बनने के बाद लखनऊ मेट्रो के बेड़े में ट्रेनों की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी। इन सभी मेट्रो ट्रेनों को रात में खड़ा करने, सुबह संचालन से पहले उनकी स्वचालित वाशिंग, नियमित पहियों और ब्रेक की जांच, इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस और आपातकालीन मरम्मत के लिए बड़े यार्ड की दरकार होती है। इसलिए एलडीए की समिति जमीन का स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड, भू-उपयोग और मेट्रो ट्रैक से उसकी कनेक्टिविटी का गहन तकनीकी परीक्षण कर रही है, ताकि डिपो निर्माण में किसी भी प्रकार की कानूनी या भौगोलिक अड़चन न आए।

ये हैं प्रस्तावित 10 नए मेट्रो कॉरिडोर: देखें रूट और लंबाई का पूरा ब्योरा

लखनऊ मेट्रो के इस महत्वाकांक्षी विस्तार के तहत चिन्हित किए गए 10 नए कॉरिडोर पूरे शहर के साथ-साथ उपनगरों को कवर करेंगे:

  • कॉरिडोर 1: कल्ली पश्चिम से आईआईएम कॉरिडोर (लंबाई: 45 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 2: राजाजीपुरम से आईआईएम कॉरिडोर (लंबाई: 18.42 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 3: चारबाग से कल्ली पश्चिम कॉरिडोर (लंबाई: 13 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 4: इंदिरा नगर से सीजी सिटी कॉरिडोर (लंबाई: 7.7 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 5: इंदिरा नगर से अनौरा कला कॉरिडोर (लंबाई: 9.27 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 6: चौधरी चरण सिंह (सीसीएस) एयरपोर्ट से बंथरा कॉरिडोर (लंबाई: 11 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 7: मुंशीपुलिया से जानकीपुरम कॉरिडोर (लंबाई: 6.29 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 8: सीजी सिटी से एयरपोर्ट कॉरिडोर (लंबाई: 19.8 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 9: कल्ली पश्चिम से मोहनलालगंज कॉरिडोर (लंबाई: 6 किलोमीटर)

  • कॉरिडोर 10: अनौरा कला से बाराबंकी कॉरिडोर (लंबाई: 14 किलोमीटर)

शहर के प्रमुख केंद्रों और उपनगरों को मिलेगा तेज रफ्तार का तोहफा

इन नए कॉरिडोरों के तैयार होने से पीजीआई, सीतापुर रोड, आईआईएम रोड, राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल, इकाना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, सुशांत गोल्फ सिटी, आशियाना, जानकीपुरम और मोहनलालगंज जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र सीधे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। शहीद पथ और अयोध्या हाईवे पर आए दिन लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से लोगों को स्थायी राहत मिलेगी। साथ ही, सार्वजनिक परिवहन के मजबूत होने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा। प्राधिकरण और मेट्रो रेल कॉरपोरेशन का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक राजधानी और आसपास के पूरे शहरी क्लस्टर को एक निर्बाध, आधुनिक और सुरक्षित मेट्रो संजाल में पिरो दिया जाए।

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