Ram Mandir Controversy: अयोध्या पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा हमला; बोले- दान चोरी में गिरफ्तार आरोपी केवल 'बलि का बकरा'
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा और दान चोरी के मामले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच, शुक्रवार 17 जुलाई 2026 को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अयोध्या पहुंचे। अयोध्या पहुंचते ही उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। शंकराचार्य ने इस पूरे मामले में बड़े अधिकारियों को बचाने और छोटे कर्मचारियों को फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी के इस्तीफे की मांग
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने तीखे शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, "जब मंदिर के पावन कोष में इतनी बड़ी चोरी का मामला सामने आया, तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कोषाध्यक्ष को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे केवल "बलि का बकरा" बनाए गए हैं, जबकि असली मास्टरमाइंड और बड़े जिम्मेदार लोगों तक अभी भी कानून के हाथ नहीं पहुंचे हैं।
चंपत राय के इस्तीफे पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कथित इस्तीफे पर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट तो सार्वजनिक हो गई, लेकिन चंपत राय के इस्तीफे को लेकर स्थिति साफ नहीं की गई। उनके मुताबिक, चंपत राय ने वास्तव में कोई इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि केवल माहौल शांत करने के लिए इसका झूठा प्रचार किया गया था।
शंकराचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि अयोध्या में उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौ माता को "राष्ट्र माता" का दर्जा दिलाने के लिए जनजागरण करना है। उनकी यह यात्रा रुदौली से शुरू होकर मिल्कीपुर, बीकापुर और गोसाईगंज होते हुए अयोध्या विधानसभा क्षेत्र तक जाएगी, जहां समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया।
जेल में बंद आरोपियों से पुलिस की मैराथन पूछताछ
चढ़ावा चोरी के इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानून का शिकंजा भी कसता जा रहा है। गुरुवार को थाना रामजन्मभूमि के विवेचक और क्षेत्राधिकारी (CO) अयोध्या, आशुतोष तिवारी ने जिला कारागार (जेल) जाकर गिरफ्तार आरोपियों—रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव से लंबी पूछताछ की।
पुलिस ने जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज, बरामद की गई नकदी व सामान और पूर्व में दर्ज बयानों के आधार पर दोनों का आमना-सामना कराया।
कौन है दान चोरी का मास्टरमाइंड टिन्नू?
अब तक की पुलिस जांच और साक्ष्यों के अनुसार, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को ही इस पूरी चोरी का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
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भतीजे की नियुक्ति: टिन्नू ने ही अपने भतीजे मनीष यादव की तैनाती मंदिर में दान राशि की गिनती करने वाले गणनाकर्मी के रूप में कराई थी।
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साजिश का खुलासा: विवेचक ने दोनों से मंदिर की नियुक्ति प्रक्रिया, नकदी को बाहर निकालने के तरीके, चोरी की योजना और धनराशि के आपस में बंटवारे को लेकर कई अहम सवाल-जवाब किए। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इस खेल में मंदिर के कुछ अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं।
स्टेट बैंक (SBI) के कर्मियों पर भी कसेगा शिकंजा
इस पूरे मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। वर्तमान और पूर्व बैंक कर्मियों के बयानों में बड़े अंतर (भिन्नता) देखने को मिले हैं, जिससे पुलिस का शक और गहरा गया है। मंदिर ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के नियमों का पालन कराना बैंक प्रबंधन का काम था, लेकिन नियमों की अनदेखी की गई जिससे यह चोरी लंबे समय तक निर्बाध रूप से चलती रही। पुलिस जल्द ही इस मामले में संबंधित बैंक अधिकारियों से कड़ाई से पूछताछ करने की तैयारी में है।