रियाद पर मिसाइल हमले के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा: अमेरिका पर अटैक नहीं करेंगे हूती; बोले- 'हमारे साथ लगातार संपर्क में विद्रोही

रियाद पर मिसाइल हमले के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा: अमेरिका पर अटैक नहीं करेंगे हूती; बोले- 'हमारे साथ लगातार संपर्क में विद्रोही

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और युद्ध के मुहाने पर खड़े हालातों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाकर किए गए ताजा मिसाइल हमले के बाद पूरे अरब जगत में खलबली मची हुई है। इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यमन के हूती विद्रोही अमेरिका से युद्ध नहीं लड़ना चाहते और वे अमेरिकी ठिकानों या नौसैनिक जहाजों पर हमला नहीं करने पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी प्रशासन हूतियों के साथ निरंतर कूटनीतिक संपर्क में है। हालांकि, एक तरफ जहां अमेरिका हूतियों के इस आश्वासन से राहत महसूस कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके सबसे करीबी रणनीतिक सहयोगी सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों ने वाशिंगटन की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फॉक्स न्यूज पर ट्रंप का दावा—'हूती हमारे साथ लगातार संपर्क में हैं'

अमेरिकी मीडिया नेटवर्क फॉक्स न्यूज को दिए एक बयान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और हूती नेतृत्व के बीच सीधा संवाद स्थापित है। ट्रंप ने बताया कि हूतियों ने खुद संदेश भेजकर यह साफ कर दिया है कि वे अमेरिका से किसी भी तरह का सैन्य टकराव नहीं चाहते। ट्रंप ने कहा, "हूतियों ने हमसे संपर्क किया है और वे हमारे साथ लड़ाई से बचना चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि अमेरिकी सेना उनके ठिकानों के पीछे पड़े या उन पर कोई बड़ा अभियान चलाए।"

गौरतलब है कि इससे पहले भी 12 सितंबर को अपने आयरलैंड दौरे के दौरान ट्रंप ने इसी तरह का बयान दिया था, जहां उन्होंने कहा था कि हूतियों ने अमेरिका से हमला न करने की अपील की है और वे क्षेत्र से गुजरने वाले अधिकांश व्यापारिक जहाजों को जाने दे रहे हैं। लेकिन ट्रंप का यह ताजा बयान ऐसे नाजुक समय पर आया है जब सऊदी अरब हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों से जूझ रहा है और रियाद को सुरक्षा के मोर्चे पर गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है।

सऊदी राजधानी रियाद पर दागी गई मिसाइल, यमन में जमीनी पकड़ मजबूत

हूतियों की ओर से अमेरिका पर हमला न करने के दावों के विपरीत, सऊदी अरब के खिलाफ उनकी सैन्य आक्रामकता चरम पर पहुंच चुकी है। शनिवार को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद को सीधे निशाने पर लेते हुए बैलिस्टिक मिसाइल दागी। हालांकि सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते खतरे को रोकने की कोशिश की, लेकिन रियाद के संवेदनशील इलाकों में भारी अफरातफरी और धुएं के गुबार देखे गए।

इसके अलावा, हूतियों ने यमन के भीतर भी अपने जमीनी अभियानों को बेहद तेज कर दिया है। उन्होंने सऊदी समर्थित अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण वाले बड़े इलाकों और लाल सागर के तटीय क्षेत्रों पर तेजी से अपना कब्जा जमा लिया है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की मजबूत पकड़ ने सऊदी अरब के समुद्री व्यापार और तेल निर्यात के सुरक्षित गलियारों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। हूतियों ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि वे सऊदी जहाजों और रियाद के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाना जारी रखेंगे, जिसे वे यमन पर सऊदी नाकेबंदी का सीधा जवाब मानते हैं।

सऊदी क्राउन प्रिंस की गुहार के बाद पेंटागन ने रोके हवाई हमले?

अमेरिकी रक्षा गलियारों से सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने हूतियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से टेलीफोन पर बातचीत कर तुरंत सैन्य मदद और यमन में हवाई हमले करने का दबाव बनाया था। इसके बाद पेंटागन ने हूती ठिकानों को तबाह करने के लिए लड़ाकू विमानों पर बम तक लोड कर दिए थे और टारगेट लिस्ट फाइनल हो चुकी थी।

लेकिन ठीक ऐन वक्त पर राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे सैन्य ऑपरेशन को रोक दिया। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस समय एक और लंबे और खर्चीले युद्ध के मोर्चे पर अपनी सेना को नहीं झोंकना चाहता। अमेरिका पहले भी 2025 में हूतियों के खिलाफ व्यापक बमबारी अभियान चलाकर अरबों डॉलर के हथियार खपा चुका है, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच एक अनौपचारिक सहमति बनी थी। अब जब हूती केवल सऊदी अरब को निशाना बना रहे हैं और अमेरिकी जहाजों से दूरी बनाए हुए हैं, तो ट्रंप प्रशासन सऊदी अरब की खातिर सीधे तौर पर यमन में कूदने से हिचकिचा रहा है।

'ईरान पर बहुत जल्द हो सकता है बड़ा फैसला'—ट्रंप की खुली चेतावनी

हूती संकट पर बोलने के साथ-साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को लेकर भी आक्रामक तेवर दिखाए। ट्रंप ने कहा कि वे इस समय ईरान को लेकर "फैसला लेने की स्थिति" (Deciding Mode) में हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बहुत जल्द क्षेत्र में बड़ी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं और ईरान को अपने व्यवहार में तुरंत सुधार करना चाहिए।

ट्रंप ने संकेत दिया कि उनके सामने मुख्य विकल्प यह है कि या तो ईरान के साथ कोई मजबूत कूटनीतिक समझौता किया जाए, उसे आर्थिक रूप से पूरी तरह कमजोर होने दिया जाए, या फिर उस पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया जाए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि वे इस बात पर विचार कर रहे हैं कि ईरान पर अंतिम और निर्णायक प्रहार कब और कैसे किया जाए। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए संयुक्त हवाई अभियानों के बाद से दोनों पक्षों के बीच पिछले करीब सात महीनों से गतिरोध बना हुआ है। ट्रंप के इस ताजा रुख से साफ है कि मध्य पूर्व में शांति की संभावनाएं बेहद धूमिल हैं और अमेरिका अपने सहयोगियों को आगे करके खुद रणनीतिक दूरी बनाए रखने की नीति पर काम कर रहा है।