'हवाई हमले कर भाग जाते हो, दम है तो सेना भेजो'; ईरान ने अमेरिका को ललकारा, मोहसिन रेजाई बोले- 'युद्ध का फैसला जमीन पर होता है'

'हवाई हमले कर भाग जाते हो, दम है तो सेना भेजो'; ईरान ने अमेरिका को ललकारा, मोहसिन रेजाई बोले- 'युद्ध का फैसला जमीन पर होता है'

पश्चिम एशिया में जारी भारी सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच ईरान ने सीधे तौर पर वाशिंगटन को सीधी चेतावनी जारी की है। तेहरान और अमेरिकी बलों के बीच लगातार चल रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के दौरान ईरान के शीर्ष सुरक्षा रणनीतिकार और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिकी सेना की युद्ध रणनीति पर तंज कसते हुए उन्हें आमने-सामने की जमीनी लड़ाई (Ground Combat) में उतरने की खुली चुनौती दी है। रेजाई ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि दूर से मिसाइल दागने या फाइटर जेट से हवाई हमले करके वापस लौट जाना किसी मजबूत सैन्य शक्ति का लक्षण नहीं है; यदि अमेरिका अपने सैन्य अभियानों को लेकर सचमुच गंभीर है, तो वह ईरान की जमीन पर अपनी थलसेना उतारकर दिखाए।

'हवाई हमले कर लौट जाते हो, युद्ध का फैसला जमीन पर होता है'—रेजाई का सीधा तंज

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) कमांडर मोहसिन रेजाई ने अपने आधिकारिक बयान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के तरीके पर कड़े सवाल खड़े किए। रेजाई ने कहा, "अमेरिकी सेना केवल दूर से बमबारी और हवाई हमले करने तक सीमित क्यों है? वे सिर्फ आसमान से हमला करते हैं और वापस सुरक्षित बेस पर लौट जाते हैं। अगर अमेरिकी प्रशासन अपनी सैन्य कार्रवाई को लेकर वाकई गंभीर है, तो उनके सैनिक ईरान की सरजमीं पर कदम रखें।"

रेजाई ने सैन्य सिद्धांतों का हवाला देते हुए दो टूक शब्दों में रेखांकित किया कि आधुनिक युद्धों में सिर्फ हवाई हमलों या ड्रोन तकनीक से कोई अंतिम विजय हासिल नहीं की जा सकती; किसी भी जंग में असली और निर्णायक भूमिका थलसेना (ग्राउंड ट्रूप्स) की ही होती है। उनका यह बयान साफ तौर पर यह संदेश देने की कोशिश है कि ईरान किसी भी हवाई दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और यदि अमेरिका ने जमीनी स्तर पर आगे बढ़ने की भूल की, तो उसे अभूतपूर्व प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिकी ठिकानों पर और घातक हमलों की चेतावनी

मोहसिन रेजाई ने अपनी इस ललकार के साथ-साथ यह भी साफ कर दिया कि ईरान भविष्य में किसी भी नए अमेरिकी हमले की आशंका को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है और उसके लिए अपनी रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह तैयार कर चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने अपनी उकसावे वाली कार्रवाई या बमबारी को जारी रखा, तो ईरान मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, रडार स्टेशनों और सामरिक हितों पर अपने मिसाइल व ड्रोन हमलों की रफ्तार और तीव्रता कई गुना बढ़ा देगा।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ने अब तक मुख्य रूप से अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमताओं, स्टील्थ फाइटर जेट्स और नौसैनिक क्रूज मिसाइलों के जरिए ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके विपरीत, ईरान की रणनीति अमेरिकी सेना को सीधे पारंपरिक आमने-सामने की लड़ाई में घसीटने की है, जहां अमेरिका के हताहत होने का जोखिम सबसे अधिक होता है।

ईरान में जमीनी अभियान शुरू करना अमेरिका के लिए क्यों है नामुमकिन जैसा?

रक्षा जानकारों के अनुसार, मोहसिन रेजाई द्वारा अमेरिका को सेना भेजने की चुनौती देना एक अत्यंत सोची-समझी रणनीतिक बयानबाजी है, क्योंकि वे जानते हैं कि ईरान के भीतर जमीनी सेना उतारना किसी भी विदेशी ताकत के लिए सबसे घातक कदम साबित हो सकता है।

ईरान का भौगोलिक ढांचा अत्यधिक जटिल है; इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा बीहड़, ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों (जैग्रोस और अल्बोर्ज पर्वत श्रृंखलाओं) से घिरा हुआ है। इसके अलावा, ईरान की आबादी 8.5 करोड़ से अधिक है और उसके पास अत्यधिक प्रशिक्षित 'बसीज' मिलिशिया व इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लाखों समर्पित सैनिक मौजूद हैं। इराक और अफगानिस्तान के दो दशकों के लंबे और थकाऊ युद्धों का दंश झेलने के बाद अमेरिका कभी भी ईरान जैसे विशाल देश में बड़े पैमाने पर अपनी पैदल सेना झोंकने का जोखिम नहीं उठाएगा। जानकारों का कहना है कि जहां बड़े पैमाने पर जमीनी हमला लगभग असंभव है, वहीं तटीय इलाकों में सीमित कमांडो या स्पेशल फोर्सेज ऑपरेशनों की आशंका बनी रहती है।

तीखी बयानबाजी के बीच बातचीत का रास्ता भी खुला, कतर निभा रहा मध्यस्थता

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां ईरान के उच्च पदस्थ अधिकारी अमेरिका को युद्ध की खुली चुनौती दे रहे हैं, वहीं पर्दे के पीछे कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। मोहसिन रेजाई ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि ईरान ने मध्यस्थ देश कतर के माध्यम से युद्ध समाप्त करने और तनाव घटाने से संबंधित अपनी आधिकारिक शर्तें वाशिंगटन तक पहुंचा दी हैं।

ईरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से मिलने वाले औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। ट्रंप प्रशासन पर भी इस टकराव को खत्म करने का भारी घरेलू दबाव है, क्योंकि पेंटागन की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अमेरिकी खजाने पर भारी पड़ रहा है और अब तक अरबों डॉलर के गोला-बारूद व उपकरण खप चुके हैं। ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि आने वाले दिनों में दोनों देश कूटनीतिक संवाद की मेज पर पहुंचते हैं या फिर यह जुबानी जंग किसी और बड़े क्षेत्रीय संकट को जन्म देती है।