तिब्बत में 5 घंटे के भीतर 3 बार डोली धरती: 7 तीव्रता के महाभूकंप के बाद भारत
हिमालयी क्षेत्र के ऊंचे पठारी इलाके तिब्बत में कुदरत का भयानक कहर देखने को मिला है, जहां गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के गहरे सदमे से लोग अभी उबर भी नहीं पाए थे कि अगले पांच घंटों के भीतर धरती तीन बार फिर तेज झटकों से कांप उठी। इस जबर्दस्त टेक्टोनिक हलचल की धमक केवल तिब्बत तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि भारत के जम्मू-कश्मीर और दक्षिण भारत के कर्नाटक से लेकर पड़ोसी चीन और अफगानिस्तान की सीमाओं तक दर्ज की गई। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स और भूकंप के नए झटकों के चलते लाखों लोग कड़ाके की हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच अपने घरों से बाहर खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। प्राथमिक आंकड़ों के मुताबिक, इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 76 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सैकड़ों मकान जमींदोज हो चुके हैं और मलबे में दबे संभावित जीवित लोगों को निकालने के लिए बर्फीले दुर्गम रास्तों पर विशालकाय स्तर पर राहत और बचाव कार्य संचालित किया जा रहा है।
5 घंटे में 3 बार डोली तिब्बत की जमीन: राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने दर्ज किए आफ्टरशॉक्स के आंकड़े
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) और वैश्विक भूकंपीय वेधशालाओं से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुख्य भूकंप के बाद जमीन के भीतर फॉल्ट लाइनों के दोबारा सक्रिय होने से सिलसिलेवार झटके दर्ज किए गए। गुरुवार देर रात करीब 10:33 बजे (1433 GMT) तिब्बत के नागकू क्षेत्र में 7.0 की तीव्रता वाला मुख्य भूकंप आया था, जिसने व्यापक स्तर पर तबाही मचाई। इसके ठीक बाद जमीन शांत होने के बजाय पांच घंटे के भीतर तीन बार फिर भयानक रूप से कांपी। रिक्टर पैमाने पर पहला आफ्टरशॉक रात करीब 1:00 बजे दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 4.0 मापी गई। इसके ठीक एक घंटे बाद, रात करीब 2:00 बजे 4.6 तीव्रता का दूसरा जोरदार झटका महसूस हुआ जिसने राहत कार्य में जुटे बचाव दलों में भी खलबली मचा दी। इसके बाद सुबह करीब 5:30 बजे 4.5 की तीव्रता वाले तीसरे भूकंप ने एक बार फिर इलाके की बची-खुची कमजोर संरचनाओं को हिलाकर रख दिया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इतनी उच्च तीव्रता के भूकंप के बाद फॉल्ट लाइन पर संतुलन बनने तक कई दिनों तक मध्यम तीव्रता के झटके आते रहने का गंभीर खतरा बना रहता है।
भारत, चीन और अफगानिस्तान में भी थरथराई धरती: जम्मू-कश्मीर से कर्नाटक तक डोली जमीन
तिब्बत में हुए इस भूगर्भीय विस्फोट का व्यापक असर दक्षिण और मध्य एशिया के कई देशों के सिस्मोग्राफ पर साफ तौर पर दर्ज किया गया। भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय जिलों डोडा और किश्तवाड़ में देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि भारत में दर्ज की गई तीव्रता काफी कम रही, जहां डोडा में 2.8 और किश्तवाड़ में 2.4 तीव्रता आंकी गई। इसी क्रम में दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के चिक्कबल्लपुर जिले में भी 2.9 की तीव्रता वाला एक हल्का झटका रिकॉर्ड किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए कौतूहल और घबराहट फैल गई। वहीं पड़ोसी देश अफगानिस्तान में सुबह करीब 3:30 बजे 4.0 तीव्रता का झटका महसूस किया गया, जिसका असर हिंदुकुश की पहाड़ियों तक देखा गया। इसके कुछ ही देर बाद, सुबह करीब 4:00 बजे चीन के पश्चिमी इलाके में भी 4.6 की तीव्रता वाला तेज भूकंप दर्ज किया गया। यूरेशियन और इंडियन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित इस पूरे रीजन में एक साथ कई देशों की जमीन का हिलना वैज्ञानिकों के लिए भी गहन अध्ययन का विषय बन गया है।
नागकू में 339 घर जमींदोज: जनवरी 2024 के बाद का सबसे भीषण भूकंप, 12 हजार लोग बेघर
तिब्बत का सबसे ऊंचाई पर स्थित शहर नागकू इस प्राकृतिक आपदा का सबसे मुख्य केंद्र रहा है। यह शक्तिशाली भूकंप जनवरी 2024 के बाद से इस पूरे क्षेत्र में आया अब तक का सबसे विध्वंसक भूकंप साबित हुआ है। स्थानीय प्रशासन द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार रात आए मुख्य झटके और उसके बाद आए आफ्टरशॉक्स के कारण कम से कम 339 रिहायशी मकान पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गए। चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी (CCTV) द्वारा जारी हवाई और जमीनी फुटेज में नागकू शहर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में चारों तरफ पत्थरों की टूटी हुई दीवारें, मलबे के ढेर और धंसी हुई सड़कें साफ देखी जा सकती हैं। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, खतरे की जद में आए गांवों से अब तक 12,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकालकर अस्थायी राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा चुका है। विस्थापित हुए परिवारों के लिए अतिरिक्त टेंट, हीटर, कंबल और राशन सामग्री पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर नए आश्रय स्थल तैयार किए जा रहे हैं।
बाकेन काउंटी में शून्य से नीचे तापमान और भूस्खलन का खौफ: 5000 बचावकर्मियों ने संभाला मोर्चा
नागकू शहर की बाकेन काउंटी में बचाव अभियान सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। अत्यधिक ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, पथरीली दुर्गम भौगोलिक बनावट और शून्य से कई डिग्री नीचे जा चुके हाड़ कंपाने वाले तापमान ने राहत कर्मियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। पर्वतीय ढलानों से लगातार खिसक रही चट्टानों (रॉकस्लाइड्स) और दरकती पहाड़ियों के चलते मुख्य सड़कों पर आवागमन बाधित हो रहा है, जिससे भारी मशीनरी को मौके पर पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। नागकू शहर के कार्यवाहक मेयर डुनझू ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि शुक्रवार दोपहर तक विशेष बचाव दलों ने तीन व्यापक तलाशी अभियान पूरे कर लिए हैं, जिसके तहत प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक घर और दूर-दराज के गांव की व्यक्तिगत रूप से जांच की गई है। राहत और बचाव कार्य को गति देने के लिए तीन पड़ोसी काउंटियों से सेना, अर्धसैनिक बलों और आपदा प्रबंधन के 5,000 से अधिक प्रशिक्षित कर्मियों को ग्राउंड जीरो पर उतारा गया है ताकि मलबे में दबे किसी भी व्यक्ति को समय रहते जीवित निकाला जा सके।
यूएसजीएस का बड़ा खुलासा: 18 किमी गहराई पर था केंद्र, दर्ज हुए 7 खतरनाक आफ्टरशॉक्स
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) द्वारा साझा किए गए सैटेलाइट और सिस्मोलॉजिकल आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार रात 10:33 बजे आए मुख्य भूकंप का केंद्र बिंदु नागकू से पूर्व-उत्तर-पूर्व (ENE) दिशा में लगभग 191 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। यह भूकंप जमीन से 18 किलोमीटर की गहराई में उत्पन्न हुआ था। यूएसजीएस की वेबसाइट पर प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि मुख्य झटके के बाद इलाके में कम से कम सात बड़े आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, जिनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.3 से लेकर 5.2 के बीच रही। ये सभी आफ्टरशॉक्स जमीन की सतह से मात्र 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर केंद्रित थे, जिस कारण धरातल पर इनका कंपन और झटकों का प्रभाव कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि उथले भूकंप (शैलो अर्थक्वेक) सतही संरचनाओं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं, और यही कारण रहा कि मिट्टी और पत्थरों से बने सैकड़ों पारंपरिक मकान इन झटकों का दबाव नहीं झेल सके और भरभरा कर गिर पड़े।