ईरान का नया चक्रव्यूह! होर्मुज में ला रहा ऐसा ट्रैफिक सिस्टम कि दुश्मनों के लिए बंद हो जाएगा रास्ता..

ईरान का नया चक्रव्यूह! होर्मुज में ला रहा ऐसा ट्रैफिक सिस्टम कि दुश्मनों के लिए बंद हो जाएगा रास्ता..

वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सप्लाई के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग को लेकर एक ऐसा बड़ा ऐलान कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में दुनियाभर के कई शक्तिशाली देशों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच सकती हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज के लिए ईरान अब एक नया और सख्त ट्रैफिक सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। ईरान के इस कदम को सीधे तौर पर उसके विरोधी देशों की घेराबंदी के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान की संसद का बड़ा ऐलान, तैयार हुआ 'प्रोफेशनल मैकेनिज्म'

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने शनिवार को इस रणनीति का आधिकारिक तौर पर खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ईरान ने होर्मुज में समुद्री यातायात को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेने के लिए एक विशेष 'प्रोफेशनल मैकेनिज्म' तैयार कर लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पहले ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए अजीजी ने स्पष्ट किया कि ईरान अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सुरक्षा की गारंटी के दायरे में रहते हुए ही इस योजना को आगे बढ़ा रहा है। इस नए ट्रैफिक सिस्टम के तहत जहाजों के आने-जाने के लिए एक निर्धारित मार्ग तय किया जाएगा, जिसका विस्तृत खाका जल्द ही दुनिया के सामने रखा जाएगा।

सिर्फ मददगारों को मिलेगी एंट्री, विरोधियों के लिए 'नो एंट्री'

ईरानी रणनीतिकार इब्राहिम अज़ीज़ी के बयान से साफ है कि यह नया सिस्टम बेहद सख्त होने वाला है। उनके अनुसार, इस नई व्यवस्था का फायदा केवल उन्हीं देशों या पक्षों को मिलेगा जो ईरान के साथ सहयोग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इस सिस्टम के तहत दी जाने वाली विशेष सेवाओं और सुरक्षा के बदले ईरान जहाजों से आवश्यक शुल्क (टैक्स या फीस) भी वसूलेगा। सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए अजीजी ने कहा कि जो लोग ईरान के खिलाफ 'समुद्री फ्रीडम प्रोजेक्ट' या किसी भी तरह के ऑपरेटरों के रूप में काम कर रहे हैं, उनके लिए यह रास्ता पूरी तरह से बंद रहेगा। ईरान के इस कड़े रुख के बाद खाड़ी देशों और पश्चिमी ताकतों के बीच एक बार फिर सैन्य और कूटनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।

बंदरगाहों की घेराबंदी और होर्मुज पर पलटवार

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ें हालिया सैन्य टकराव से जुड़ी हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरानी क्षेत्रों पर हवाई हमले शुरू किए थे, जिसके बाद मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति बन गई थी। हालांकि, 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच एक युद्धविराम की घोषणा तो हुई, लेकिन पर्दे के पीछे की जंग थमी नहीं। अमेरिका ने इसके बाद ईरानी बंदरगाहों की आर्थिक और रणनीतिक घेराबंदी (Blockade) कर दी। अब इसी घेराबंदी के पलटवार में ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए ट्रैफिक नियमों का चक्रव्यूह तैयार कर लिया है, ताकि वह वैश्विक व्यापार की नब्ज को अपने हाथ में रख सके।

ट्रंप और जिनपिंग की बातचीत: चीन को रोज हो रहा 50 करोड़ डॉलर का नुकसान

इस बीच, दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं के बीच भी ईरान को लेकर गंभीर चर्चा हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी हालिया मुलाकात और बातचीत को बेहद सकारात्मक बताया है। ट्रंप के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति का भी यही मानना है कि ईरान के पास किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही, शी जिनपिंग ने होर्मुज जलमार्ग को बिना किसी बाधा के खुला रखने के महत्व पर विशेष जोर दिया। जिनपिंग का कहना था कि ईरान की इन हालिया कार्रवाइयों से वैश्विक ऊर्जा का प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे दुनिया को प्रतिदिन लगभग 50 करोड़ डॉलर का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ रहा है।

चीन की दुखती रग पर ईरान का हाथ, अमेरिका बेअसर

होर्मुज का यह संकट चीन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। चीनी राष्ट्रपति ने इस बात का भी विशेष जिक्र किया कि चीन अपनी कुल ऊर्जा (क्रूड ऑयल) जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज मार्ग के जरिए आयात करता है। ऐसे में यहां जरा सी भी हलचल चीनी अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला सकती है। दिलचस्प बात यह है कि इस संकट का अमेरिका पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज के इस समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं है। अब देखना यह होगा कि ईरान के इस नए ट्रैफिक सिस्टम के लागू होने के बाद अमेरिका, चीन और वैश्विक समुदाय का अगला कदम क्या होता है।

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