यूक्रेन की बारूद से ही तबाह हुआ कीव का रिहायशी इलाका: रूसी ड्रोन स्ट्राइक के बाद वेयरहाउस में महाविस्फोट, 27 नागरिकों की दर्दनाक मौत; जेलेंस्की ने मानी अधिकारियों की लापरवाही

यूक्रेन की बारूद से ही तबाह हुआ कीव का रिहायशी इलाका: रूसी ड्रोन स्ट्राइक के बाद वेयरहाउस में महाविस्फोट, 27 नागरिकों की दर्दनाक मौत; जेलेंस्की ने मानी अधिकारियों की लापरवाही

कीव/मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध में यूक्रेनी राजधानी कीव के उपनगरीय इलाके से एक दिल दहला देने वाली और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। कीव क्षेत्र के बुचा जिले में एक वेयरहाउस पर हुए रूसी ड्रोन हमले के बाद वहां छिपाकर रखे गए गोला-बारूद और विस्फोटकों में ऐसा भीषण सेकेंडरी ब्लास्ट (महाविस्फोट) हुआ, जिसने पूरे रिहायशी इलाके को मलबे और आग के शोलों में तब्दील कर दिया। इस भीषण त्रासदी में कम से कम 27 निर्दोष नागरिकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 42 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रारंभिक जांच और यूक्रेनी नेतृत्व के आधिकारिक बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि यदि रिहायशी बस्ती के ठीक बीच में नियमों को ताक पर रखकर विस्फोटक सामग्री और बारूद न रखा गया होता, तो जान-माल का इतना व्यापक नुकसान नहीं होता।

कीव के बुचा में रूसी ड्रोन स्ट्राइक और वेयरहाउस में भीषण महाविस्फोट

घटना कीव के पश्चिमी उपनगर और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील बुचा जिले के माइला (Myla) गांव की है। शुक्रवार देर रात जब स्थानीय नागरिक अपने घरों में सो रहे थे, तभी रूसी सेना द्वारा दागे गए आत्मघाती ड्रोनों ने इलाके के एक बड़े गोदाम को निशाना बनाया। ड्रोन के गोदाम से टकराते ही भीतर मौजूद भारी मात्रा में सैन्य गोला-बारूद, रॉकेट्स और विस्फोटकों में श्रृंखलाबद्ध धमाके शुरू हो गए।

विस्फोट की तीव्रता इतनी भयावह थी कि उसकी गूंज और झटके कई किलोमीटर दूर कीव के मध्य इलाके तक महसूस किए गए। धमाके के साथ आसमान में कई सौ फीट ऊंचा आग का बवंडर और काले धुएं का गुबार छा गया। देखते ही देखते भीषण आग आसपास के रिहायशी मकानों, दुकानों और एक स्थानीय रेस्तरां में फैल गई। धमाके से उड़े छर्रों और कंक्रीट के मलबे की चपेट में आकर दिमित्रिव्का स्थानीय परिषद के प्रमुख तारास दिदिच (Taras Didych) सहित 27 लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि तारास दिदिच हमला होते ही सबसे पहले लोगों को बचाने के लिए मौके पर पहुंचे थे, लेकिन भीतर हो रहे लगातार धमाकों की चपेट में आ गए।

रहवासी इलाके में छिपाकर रखा गया था गोला-बारूद: यूक्रेन की अपनी बारूद बनी काल

इस त्रासदी का सबसे त्रासद पहलू यह है कि मारे गए नागरिकों की मौत सीधे तौर पर रूसी ड्रोन के प्रभाव से कम और गोदाम में रखे यूक्रेनी सैन्य विस्फोटकों के फटने से ज्यादा हुई है। स्थानीय प्रशासन और सैन्य इकाइयों द्वारा रिहायशी इमारतों और नागरिक आबादी के बेहद करीब इस तरह के संवेदनशील हथियारों का डिपो बनाना सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।

युद्ध के दौरान यूक्रेनी सेना पर कई बार यह आरोप लगते रहे हैं कि वह रूसी हमलों से बचने के लिए नागरिक बुनियादी ढांचे, स्कूलों या रिहायशी इलाकों के नजदीकी वेयरहाउसों का इस्तेमाल सैन्य साजो-सामान छिपाने के लिए करती है। बुचा की इस घटना ने उन तमाम आशंकाओं को पुष्ट कर दिया है। जब रूसी मिसाइल या ड्रोन ने गोदाम पर प्रहार किया, तो उसके भीतर पहले से मौजूद दर्जनों टन बारूद ने एक मिनी-परमाणु विस्फोट जैसा प्रभाव पैदा कर दिया, जिसने आसपास के पूरे इलाके को तबाह कर दिया।

राष्ट्रपति जेलेंस्की का बड़ा कबूलनामा: सैन्य अधिकारियों की लापरवाही पर दर्ज हुआ आपराधिक मुकदमा

घटना की गंभीरता और जनआक्रोश को देखते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने असामान्य रूप से कड़ा और पारदर्शी रुख अपनाया है। जेलेंस्की ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि यह भारी जनहानि अधिकारियों की गंभीर लापरवाही और नियमों की अनदेखी का परिणाम है।

सोशल मीडिया और राष्ट्र के नाम जारी संदेश में राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, “हमारे नियम और कानून पूरी तरह स्पष्ट हैं—नागरिक आबादी, बस्तियों या घरों के पास किसी भी प्रकार के गोला-बारूद और विस्फोटक का भंडारण पूरी तरह प्रतिबंधित है। जिन अधिकारियों ने यह आत्मघाती फैसला लिया या इसकी अनुमति दी, उन्हें अपने कृत्यों के लिए पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाएगा।” जेलेंस्की ने बताया कि सरकारी पद के दुरुपयोग और आपराधिक लापरवाही की धाराओं के तहत सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक आपराधिक मामले दर्ज कर लिए गए हैं और उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।

रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा: यूक्रेनी ड्रोन और आर्म्स डिपो को बनाया था सटीक निशाना

दूसरी ओर, मॉस्को में रूसी रक्षा मंत्रालय ने इस हवाई हमले की पुष्टि करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। रूसी सेना का दावा है कि उसके टोही उपग्रहों और खुफिया सूत्रों ने कीव के बुचा जिले में यूक्रेनी सेना के एक गुप्त हथियार डिपो और ड्रोन असेंबली प्लांट की सटीक पहचान की थी।

रूसी पक्ष के अनुसार, इस ठिकाने का उपयोग रूसी सीमावर्ती इलाकों (जैसे बेलगोरोद और कुर्स्क) पर हमला करने वाले लंबी दूरी के ड्रोनों को तैयार करने और पश्चिमी देशों से मिले हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए किया जा रहा था। रूस ने कहा कि उसका हमला सैन्य लक्ष्य पर पूरी तरह सटीक था और वहां हुआ द्वितीयक महाविस्फोट इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि गोदाम के अंदर भारी मात्रा में विस्फोटक छिपाकर रखा गया था।

धू-धू कर जली 50 से अधिक इमारतें और केयर होम: रेस्क्यू ऑपरेशन और 380 लोगों का रेस्क्यू

कीव क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख तैमूर त्काचेंको (Tymur Tkachenko) ने बताया कि इस धमाके और आग की चपेट में आने से कम से कम 50 रिहायशी इमारतें पूरी तरह क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई हैं। सबसे दुखद स्थिति पास में स्थित बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए बने एक विशेष केयर होम (Old Age Care Facility) की रही, जिसकी इमारत के परखच्चे उड़ गए।

आपातकालीन सेवा विभाग के 300 से अधिक अग्निशामक और बचाव दल कई घंटों तक आग की लपटों पर काबू पाने और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए संघर्ष करते रहे। बचाव दलों ने बच्चों और बुजुर्गों सहित 380 से अधिक नागरिकों को प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकालकर अस्थाई शिविरों और अस्पतालों में पहुंचाया है। अस्पतालों में भर्ती 42 घायलों में से कई की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।

लगातार तीसरे दिन हवाई हमलों से दहली यूक्रेनी राजधानी: अर्थव्यवस्था और जनजीवन ठप

यूक्रेनी राजधानी कीव पिछले तीन दिनों से लगातार रूसी मिसाइलों और ड्रोन हमलों की प्रचंड लहर का सामना कर रही है। ऊर्जा संयंत्रों, सब-स्टेशनों और लॉजिस्टिक हब पर हो रहे इन ताबड़तोड़ हमलों ने राजधानी के सामान्य जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह पंगु बना दिया है। शहर के कई हिस्सों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है, जबकि नागरिक मेट्रो स्टेशनों और भूमिगत बंकरों में शरण लेने को मजबूर हैं।

युद्ध के साढ़े चार साल से अधिक समय बीत जाने के बाद, दोनों पक्षों के बीच लंबी दूरी के हमलों में अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है। बुचा में यूक्रेनी बारूद के फटने से हुई यह त्रासदी न केवल कीव के नागरिकों के लिए एक गहरा सदमा है, बल्कि यह युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सैन्य रणनीतियों और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

 

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