जानिए पुतिन की 'ऑरस सीनेट' के सुरक्षा फीचर्स, पानी में भी नहीं डूबता यह चलता-फिरता किला
दुनिया के सबसे ताकतवर और कद्दावर नेताओं में शुमार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भी सड़क मार्ग से निकलते हैं, तो उनकी सुरक्षा का घेरा किसी अभेद्य किले से कम नहीं होता। लेकिन इस सुरक्षा चक्र की सबसे मजबूत कड़ी उनकी वो आधिकारिक सवारी है, जिसे इंजीनियरिंग और डिफेंस टेक्नोलॉजी का बेजोड़ नमूना माना जाता है। इस कार का नाम है 'ऑरस सीनेट' (Aurus Senat Limousine)। यह केवल एक आलीशान लग्जरी गाड़ी नहीं है, बल्कि पहियों पर दौड़ता हुआ एक ऐसा बख्तरबंद बंकर है जिस पर दुनिया के सबसे घातक हथियारों, ऑटोमैटिक बंदूकों, स्नाइपर राइफल्स और यहां तक कि लैंडमाइन व ग्रेनेड विस्फोटों का भी कोई असर नहीं होता। यदि इस कार पर जैविक या रासायनिक हथियारों से वार किया जाए, या फिर यह पूरी तरह पानी में डूब जाए, तब भी इसके भीतर बैठे रूसी राष्ट्रपति को खरोंच तक नहीं आ सकती।
'प्रोजेक्ट कॉर्टेज': विदेशी कारों की निर्भरता खत्म कर रूस ने खुद तैयार किया स्वदेशी मास्टरपीस
साल 2018 से पहले तक रूसी राष्ट्रपति आमतौर पर जर्मन निर्मित मर्सिडीज-बेंज एस600 गार्ड (Mercedes-Benz S600 Guard) का इस्तेमाल करते थे। लेकिन पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के दौर में व्लादिमीर पुतिन ने फैसला किया कि रूस के शीर्ष नेतृत्व के पास अपनी खुद की, शत-प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से बनी अल्ट्रा-सिक्योर कार होनी चाहिए।
इसी सोच के तहत रूस के सेंट्रल साइंटिफिक रिसर्च ऑटोमोबाइल एंड ऑटोमोटिव इंजन इंस्टीट्यूट (NAMI) ने एक गुप्त मिशन 'प्रोजेक्ट कॉर्टेज' (Project Kortezh) शुरू किया। अरबों रूबल के निवेश और वर्षों के गहन शोध के बाद जन्म हुआ 'ऑरस' (Aurus) ब्रांड का। इसका नाम लैटिन शब्द 'Aurum' (सोना) और 'Russia' (रूस) को मिलाकर गढ़ा गया, जिसका सीधा संदेश था—रूस की स्वर्णिम ताकत। 2018 में अपने चौथे राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह में पुतिन ने इसी कार से आधिकारिक एंट्री कर दुनिया को चौंका दिया था।
VR10 बैलिस्टिक प्रोटेक्शन: गोलियों और ग्रेनेड को बेअसर करने वाला अभेद्य कवच
ऑरस सीनेट की सुरक्षा का पैमाना उच्चतम अंतरराष्ट्रीय मानक VR10 बैलिस्टिक सर्टिफिकेशन पर आधारित है। इसका मतलब यह है कि यह कार सैन्य स्तर के हथियारों से होने वाले सीधे हमलों को आसानी से झेल सकती है।
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कवच और बॉडी पैनल: कार की बॉडी में बेहद मजबूत बख्तरबंद स्टील प्लेट्स, टाइटेनियम मिश्र धातु और विशेष सिरेमिक कंपोजिट्स की कई परतें लगी हुई हैं। यह बख्तरबंद ढांचा ड्रैगुनोव (SVD) जैसी ताकतवर स्नाइपर राइफल और 7.62x54mmR की आर्मर-पियर्सिंग (कवचभेदी) गोलियों को भी अंदर घुसने नहीं देता।
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विस्फोटक रोधी अंडरबॉडी: गाड़ी का निचला हिस्सा पूरी तरह से रीइन्फोर्स्ड वी-शेप (V-hull) ब्लास्ट प्लेट से लैस है। यदि कार के ठीक नीचे दो हैंड ग्रेनेड फट जाएं या सड़क पर बिछाई गई एंटी-टैंक लैंडमाइन सक्रिय हो जाए, तो भी इसका शॉक-एब्जॉर्बिंग ढांचा धमाके के झटके को बाहर ही मोड़ देता है, जिससे केबिन में बैठे यात्रियों को झटका तक महसूस नहीं होता।
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बुलेटप्रूफ ग्लास: कार की खिड़कियों पर लगा शीशा साधारण कांच नहीं है, बल्कि कई परतों वाला पॉलीकार्बोनेट लैमिनेटेड ग्लास है जिसकी मोटाई करीब 65 मिलीमीटर (लगभग 2.5 इंच) है। यह भारी से भारी गोलीबारी में भी चटक सकता है लेकिन टूटकर बिखरता नहीं है।
केमिकल अटैक और पानी में भी महफूज: सबमरीन की तरह सील हो जाता है केबिन
ऑरस सीनेट की सबसे हैरतअंगेज खासियत इसका आंतरिक जीवन रक्षा तंत्र (Life Support System) है। यदि दुश्मन कार पर जहरीली गैस, नर्व एजेंट या जैविक हथियारों से हमला कर दे, तो कार के बाहरी सेंसर तुरंत हवा में जहर की पहचान कर लेते हैं।
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एयर-टाइट आइसोलेशन: रासायनिक खतरे का संकेत मिलते ही कार की सभी एयर-वेंट्स स्वतः बंद हो जाती हैं और केबिन पूरी तरह 'हर्मेटिकली सील्ड' (Hermetically Sealed) हो जाता है। इसके बाद कार के भीतर पहले से मौजूद स्वतंत्र ऑक्सीजन सिलेंडर सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे कई घंटों तक अंदर बैठे लोगों को ताजा और शुद्ध हवा मिलती रहती है।
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पानी में तैरने की क्षमता: यदि किसी हमले या दुर्घटना में कार गहरी नदी या झील में गिर जाए, तो यह सबमरीन (पनडुब्बी) के सिद्धांत पर काम करती है। पानी का एक कतरा भी इसके इंजन और केबिन में दाखिल नहीं हो सकता और यह तैरते हुए सुरक्षित निकलने में सक्षम है।
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सेल्फ-सीलिंग फ्यूल टैंक: कार का ईंधन टैंक विशेष अग्नि-प्रतिरोधी सामग्री से ढका है। गोली लगने पर यह छेद को खुद-ब-खुद बंद (Self-seal) कर लेता है, जिससे पेट्रोल रिसाव और धमाके का खतरा शून्य हो जाता है। इसमें ऑटोमैटिक फायर-सप्रेशन (आग बुझाने का) सिस्टम भी इनबिल्ट है।
598 हॉर्सपावर का हाइब्रिड इंजन और पंक्चर-प्रूफ केवलर टायर्स
करीब 6.7 मीटर लंबी और लगभग 7 टन (7000 किलोग्राम) वजनी इस महाकाय लिमोजिन को बिजली जैसी रफ्तार देने के लिए एक बेहद शक्तिशाली इंजन लगाया गया है।
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इंजन और परफॉर्मेंस: ऑरस सीनेट में 4.4-लीटर का ट्विन-टर्बो V8 हाइब्रिड इंजन दिया गया है, जिसे रूसी विशेषज्ञों ने प्रसिद्ध स्पोर्ट्स कार निर्माता पोर्श (Porsche) के सहयोग से विशेष रूप से ट्यून किया है। यह इंजन 598 हॉर्सपावर की जबरदस्त ताकत और 880 Nm का भारी टॉर्क पैदा करता है। 9-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन और ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) की बदौलत 7 टन वजनी होने के बावजूद यह कार महज 6 सेकंड में शून्य से 100 किमी/घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है।
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रन-फ्लैट टायर्स: इसके टायरों को स्टील और केवलर (Kevlar) से सुदृढ़ किया गया है। यदि चारों टायरों पर गोलियां मार दी जाएं या वे पूरी तरह फट जाएं, तब भी पहियों के भीतर मौजूद सॉलिड मेटल रिंग्स के सहारे यह कार 80 से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से मीलों दूर सुरक्षित ठिकाने तक भाग सकती है।
लग्जरी का शिखर: चलते-फिरते कमांड सेंटर जैसी सुविधाएं
बाहर से एक दुर्जेय टैंक जैसी दिखने वाली ऑरस सीनेट अंदर से किसी सात सितारा होटल के प्रेसिडेंशियल सुइट और सैन्य कमांड रूम का मिश्रण है।
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इंटीरियर और प्राइवेसी: केबिन के भीतर प्रीमियम रशियन लेदर, प्राकृतिक लकड़ी के ट्रिम्स और पॉलिश किए गए मेटल का इस्तेमाल किया गया है। ड्राइवर और वीआईपी पैसेंजर के बीच एक बुलेटप्रूफ पार्टीशन वॉल होती है।
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एनक्रिप्टेड सैटेलाइट कम्युनिकेशंस: कार के भीतर रूस के ग्लोनास (GLONASS) सैटेलाइट नेटवर्क से सीधे जुड़े सुपर-सिक्योर, अनब्रेकेबल कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हुए हैं। राष्ट्रपति यात्रा के दौरान भी सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी तीनों सेनाओं, परमाणु बलों और क्रेमलिन के कमांडरों से सीधे संपर्क में रह सकते हैं।
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इमरजेंसी मेडिकल किट: अमेरिकी राष्ट्रपति की 'द बीस्ट' (The Beast) की तरह ऑरस सीनेट में भी राष्ट्रपति के ब्लड ग्रुप का ब्लड बैंक, डिफाइब्रिलेटर और जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरण हर समय मौजूद रहते हैं।
व्लादिमीर पुतिन की ऑरस सीनेट आधुनिक ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, अत्याधुनिक बैलिस्टिक सुरक्षा और सैन्य आत्मनिर्भरता का ऐसा बेमिसाल प्रतीक है, जो यह साबित करता है कि जमीन पर जंग हो या आतंकी हमला, क्रेमलिन के इस बख्तरबंद किले को भेद पाना नामुमकिन है।