नकाबपोश इजरायली सेटलर्स ने अमेरिकी महिला पत्रकार और यूरोपीय राजनयिकों को पीटा
मध्य पूर्व के सबसे संवेदनशील और विवादित क्षेत्रों में शुमार इजरायली कब्जे वाले वेस्ट बैंक में हिंसा और तनाव ने एक बार फिर भयानक रूप अख्तियार कर लिया है। इस बार यह संघर्ष केवल स्थानीय फिलिस्तीनी नागरिकों और यहूदी बस्तियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हिंसा की इस आग में अंतरराष्ट्रीय मीडिया और यूरोपीय राजनयिक सीधे तौर पर झुलस गए हैं। वेस्ट बैंक के तैबेह गांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जैतून की कटाई के दौरान नकाबपोश इजरायली बाशिंदों (कट्टरपंथी सेटलर्स) ने वाशिंगटन पोस्ट की वरिष्ठ अमेरिकी फोटो जर्नलिस्ट हेइडी लेविन और फ्रांस, बेल्जियम व पोलैंड के आधिकारिक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल पर लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और पत्थरों से सुनियोजित हमला बोल दिया। इस अप्रत्याशित और हिंसक घटना ने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। अमेरिका के नवनिर्वाचित प्रशासन से लेकर यूरोपीय संघ (ईयू) के शीर्ष नेतृत्व तक ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकार और राजनयिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन करार दिया है। जब युद्ध और टकराव के बीच काम करने वाले निष्पक्ष पत्रकारों और विदेशी राजनयिकों को इस तरह खुलेआम निशाना बनाया जाने लगे, तो यह वेस्ट बैंक की जमीनी स्थिति के पूरी तरह बेकाबू होने का पुख्ता प्रमाण बन जाता है।
वाशिंगटन पोस्ट की महिला पत्रकार पर कायरतापूर्ण प्रहार: हेलमेट और जैकेट ने बचाई जान
इस खूनी सिलसिले की पहली घटना शुक्रवार सुबह उस वक्त घटी जब अमेरिकी नागरिक और वाशिंगटन पोस्ट से जुड़ी पुरस्कार विजेता फोटो जर्नलिस्ट हेइडी लेविन फिलिस्तीनी किसानों द्वारा जैतून तोड़े जाने की वार्षिक गतिविधि को कैमरे में कैद कर रही थीं। 63 वर्षीय हेइडी लेविन पिछले चार दशकों से अधिक समय से मध्य पूर्व के संघर्षों को कवर करती आ रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो फुटेज के अनुसार, हेइडी लेविन ने स्पष्ट रूप से 'प्रेस' लिखा हुआ बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट पहन रखा था। इसके बावजूद पत्थरों और डंडों से लैस नकाबपोश इजरायली सेटलर्स की भीड़ ने उन पर पीछे से हमला कर दिया। हमलावरों ने उन्हें जमीन पर पटक दिया और पैरों से लगातार लातें मारते रहे। हमले में लेविन के शरीर की कई हड्डियां चोटिल हुईं और वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। बाद में मीडिया से भावुक होकर बात करते हुए लेविन ने कहा कि अगर उनके पास हेलमेट और सुरक्षात्मक जैकेट न होती, तो शायद वे आज जिंदा भी न बचतीं। उन्होंने कहा कि इन कट्टरपंथियों ने उनके शरीर की हड्डियां भले ही तोड़ दी हों, लेकिन चार दशकों से सच दिखाने के उनके जज्बे को कभी नहीं तोड़ सकते। वाशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि एक मान्यता प्राप्त पत्रकार पर इस तरह का जानलेवा हमला पूरी तरह अस्वीकार्य और अक्षम्य अपराध है, जिसकी स्वतंत्र जांच और दोषियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए।
यूरोपीय राजनयिकों और फ्रांसीसी मेयर पर हमला: 'विव ला फ्रांस' चिल्लाते हुए बरसाईं लाठियां
अमेरिकी पत्रकार पर हुए हमले की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि शनिवार को वेस्ट बैंक के तैबेह गांव में नकाबपोश चरमपंथियों ने एक और बड़े राजनयिक प्रतिनिधिमंडल को अपना शिकार बना लिया। फ्रांस के ऑल्नोय-आयमरी शहर के 78 वर्षीय मेयर बर्नार्ड बौडॉक्स, कैम्ब्राई के आर्कबिशप विंसेंट डोलमैन और बेल्जियम व पोलैंड के कई शीर्ष राजनयिक जैतून की फसल के हालात का जायजा लेने पहुंचे थे। फ्रांसीसी मेयर ने अपने पद का आधिकारिक लाल, सफेद और नीला त्रि-रंगीय सैश पहन रखा था। जैसे ही वे राजनयिक नंबर प्लेट वाली अपनी सरकारी गाड़ी में बैठने लगे, चेहरे पर मास्क बांधे सात हथियारबंद चरमपंथियों के एक गिरोह ने उन पर धावा बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर नफरत भरी आवाज में 'विव ला फ्रांस' (फ्रांस जिंदाबाद) के तंज भरे नारे लगाते हुए लोहे की रॉड और लाठियों से प्रहार करने लगे। इस हमले में 78 वर्षीय मेयर को जमीन पर गिराकर पीटा गया और बेल्जियम के एक राजनयिक वाहन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवो और फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो ने इस हिंसक कृत्य पर तीव्र आक्रोश जताते हुए इजरायली सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लिया और यूरोपीय संघ से इजरायली सेटलर्स के खिलाफ अतिरिक्त आर्थिक व राजनयिक प्रतिबंध लगाने की मांग की।
जैतून कटाई का मौसम और हिंसा का खूनी चक्र: हर साल क्यों भड़कती है यह आग
वेस्ट बैंक में जैतून की फसल केवल खेती का साधन नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से बसे फिलिस्तीनी किसानों की पहचान, संस्कृति और आजीविका की जीवन रेखा है। हर साल अक्टूबर और नवंबर के महीनों में जब जैतून तोड़ने का मौसम आता है, तो वेस्ट बैंक के जैतून के बागों में तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच जाता है। इजरायल द्वारा बसाई गई अवैध बस्तियों के चरमपंथी निवासी अक्सर फिलिस्तीनी किसानों को उनकी ही पुश्तैनी जमीनों पर जाने से रोकने के लिए संगठित हिंसा का सहारा लेते हैं। सदियों पुराने जैतून के पेड़ों को कुल्हाड़ियों से काटना, आग के हवाले करना, फसलों की चोरी करना और निहत्थे किसानों पर पथराव करना यहां की कड़वी सच्चाई बन चुका है। इस वर्ष जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, विदेशी पत्रकार और यूरोपीय डिप्लोमैट्स जमीनी हकीकत का जायजा लेने और किसानों को सुरक्षा कवच देने पहुंचे, तो सेटलर्स ने अपनी आक्रामकता का रुख सीधे इन विदेशी प्रतिनिधियों की तरफ मोड़ दिया। इससे पहले भी समाचार एजेंसी एएफपी के फोटोग्राफर जाफर अश्तियाह पर ऐसा ही जानलेवा हमला किया गया था, जिसमें उनकी पसलियां तोड़ दी गई थीं।
वाशिंगटन से येरुशलम तक मची खलबली: अमेरिकी प्रशासन ने उठाए कड़े सवाल
अमेरिका और इजरायल के बीच बेहद करीबी रणनीतिक रिश्ते होने के बावजूद अमेरिकी नागरिक और पत्रकार पर हुए इस हमले ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग को असहज स्थिति में डाल दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हमले की वायरल तस्वीरों और वीडियो पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस घटना से बेहद व्यथित हैं और उन्होंने इजरायली सरकार से ऐसे चरमपंथी तत्वों पर बिना किसी नरमी के सख्त कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। वहीं इजरायल में अमेरिका के नए राजदूत माइक हकाबी ने इस हमले को सीधे तौर पर 'कायरतापूर्ण आतंकी कृत्य' करार दिया। हकाबी ने दो टूक शब्दों में कहा कि नकाब पहनकर एक अकेली निहत्थी महिला फोटोग्राफर पर लाठी-डंडों से हमला करना किसी भी सभ्यता में स्वीकार्य नहीं है और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए। इस घटना ने इजरायल के अंदरूनी सुरक्षा ढांचे पर भी सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि पूर्व इजरायली सैन्य और खुफिया अधिकारियों के एक समूह ने राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के साथ मिलकर इस घटना को राष्ट्रीय शर्मिंदगी बताया है।
नेतन्याहू सरकार का रुख और इजरायली राजनीति की जटिलताएं
इस चौतरफा अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके दक्षिणपंथी गठबंधन का रुख काफी उलझा हुआ नजर आ रहा है। नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान जारी करते हुए सामान्य हिंसा की निंदा तो की, लेकिन इस हमले को 'कथित' बताते हुए कहा कि पूरी जांच से पहले यहूदी निवासियों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। नेतन्याहू सरकार का तर्क है कि यूरोपीय राजनयिकों को सुरक्षा के लिहाज से सेना को पूर्व सूचना देकर जाना चाहिए था। हालांकि इजरायली विदेश मंत्रालय और पुलिस ने मामले की औपचारिक जांच शुरू करने और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेने की बात कही है। विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल में आसन्न चुनावी दबाव और सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कट्टरपंथी सेटलर लॉबी के प्रभाव के चलते सरकार अक्सर इन चरमपंथियों पर ठोस कानूनी शिकंजा कसने से हिचकिचाती रही है। पीड़ित फ्रांसीसी मेयर ने भी इसी बात की ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि सेटलर्स इस तरह खुलेआम कानून हाथ में ले रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि उन्हें सत्ता का मौन संरक्षण हासिल है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठती प्रतिबंधों की मांग और आगे की राह
वेस्ट बैंक में विदेशी राजनयिकों और पत्रकारों पर हुए इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या केवल बयानों से इस हिंसा को रोका जा सकता है। बेल्जियम, फ्रांस, चीन और संयुक्त राष्ट्र के कई अंगों ने वेस्ट बैंक में बस्तियों के जबरन विस्तार को रोकने और हिंसा भड़काने वाले तत्वों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंध और संपत्तियों को जब्त करने जैसी ठोस कार्रवाइयों की वकालत शुरू कर दी है। यदि इजरायली प्रशासन ने अपने घरेलू चरमपंथी तत्वों पर लगाम नहीं लगाई, तो यह विवाद केवल वेस्ट बैंक के खेतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह यूरोप और अमेरिका के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों में एक गहरा कूटनीतिक संकट पैदा कर देगा। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि वैश्विक दबाव के सामने नेतन्याहू प्रशासन इन हिंसक घटनाओं के असली जिम्मेदारों के खिलाफ क्या मिसाली कार्रवाई करता है।