फ्रांस में महंगाई के खिलाफ फूटा जन-आक्रोश: पेरिस में उग्र झड़प, आगजनी और दुकानों में भीषण लूटपाट के बाद 855 उपद्रवी गिरफ्तार

फ्रांस में महंगाई के खिलाफ फूटा जन-आक्रोश: पेरिस में उग्र झड़प, आगजनी और दुकानों में भीषण लूटपाट के बाद 855 उपद्रवी गिरफ्तार

फ्रांस की राजधानी पेरिस सहित कई बड़े शहर एक बार फिर भयंकर अशांति, तोड़फोड़ और आगजनी की लपटों से घिर गए हैं। देश में आसमान छूती महंगाई, जीवन-यापन की भारी लागत (कॉस्ट ऑफ लिविंग क्राइसिस) और सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल व्यवस्था के खिलाफ शनिवार को लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में शांतिपूर्ण दिखने वाला यह राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन दोपहर होते-होते अचानक हिंसक संघर्ष में तब्दील हो गया। राजधानी पेरिस में नकाबपोश उपद्रवियों और हिंसक समूहों ने सुरक्षा बलों पर सीधा हमला बोल दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें हुईं। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने देर रात से लेकर रविवार सुबह तक सघन कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया, जिसके तहत पेरिस क्षेत्र से रिकॉर्ड 855 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

5 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर: पेरिस के 'प्लेस डे ला रिपब्लिक' पर बिखरा पड़ा था कांच

फ्रांसीसी गृह मंत्रालय और पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को पेरिस क्षेत्र में लगभग 1.10 लाख लोग मार्च में शामिल हुए थे, जबकि पूरे फ्रांस में यह संख्या 5.50 लाख के करीब दर्ज की गई। हालांकि प्रदर्शन का आयोजन करने वाले ट्रेड यूनियनों और जनसंगठनों का दावा है कि देश भर में 8 लाख से अधिक लोग सरकारी नीतियों के खिलाफ लामबंद हुए थे। रविवार की सुबह जब पेरिस के ऐतिहासिक चौराहे 'प्लेस डे ला रिपब्लिक' (Place de la République) पर दिन का उजाला हुआ, तो वहां का मंजर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आया। उपद्रवियों ने फुटपाथों के भारी पत्थर उखाड़कर सुरक्षा बलों पर फेंके थे। चौराहे के आसपास स्थित कई लग्जरी रिटेल स्टोर्स, सुपरमार्केट्स और बैंकों के शीशे तोड़ दिए गए और दुकानों से कीमती सामान लूट लिया गया।

सरकारी इमारतों को बनाया निशाना: 19वीं सदी के ऐतिहासिक सिटी हॉल में लगाई आग

हिंसा का यह बवंडर सिर्फ राजधानी पेरिस तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि फ्रांस के अन्य प्रमुख शहरों में भी सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। दक्षिणी बंदरगाह शहर मार्सेई में उग्र प्रदर्शनकारियों का एक झुंड सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए सिटी हॉल की लॉबी तक घुस गया और वहां पास के एक पुलिस स्टेशन में भी तोड़फोड़ की गई। वहीं, लियोन शहर में उपद्रवियों ने एक स्थानीय पर्यटन कार्यालय (टूरिज्म ऑफिस) के भीतर आग लगा दी। सबसे भयावह घटना मध्य फ्रांस के लिमोज (Limoges) शहर से सामने आई, जहां 19वीं सदी की ऐतिहासिक सिटी हॉल इमारत को उपद्रवियों ने जानबूझकर आग के हवाले कर दिया। आग इतनी भीषण थी कि सदियों पुरानी इस इमारत की छत ढह गई, जिस पर दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद रविवार सुबह जाकर काबू पाया।

1 व्यक्ति की मौत, 15 सुरक्षाकर्मी घायल: सरकार ने कट्टर वामपंथियों पर मढ़ा आरोप

पेरिस पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, प्रदर्शन और भगदड़ के दौरान दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। इसके अलावा उपद्रवियों द्वारा किए गए पथराव और पेट्रोल बम हमलों में 13 पुलिसकर्मी व जेंडरमेरी के जवान तथा आग बुझाने में जुटे 2 दमकलकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस गंभीर घटना पर फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू और गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस हिंसा की साजिश कट्टर वामपंथी समूहों (रेडिकल लेफ्ट विंग) ने रची थी, जिसके बाद असामाजिक तत्वों और लुटेरों की भीड़ भी इसमें शामिल हो गई। प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का पूरा अधिकार है, लेकिन आगजनी, लूटपाट और पुलिस पर हमलों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पेरिस, मार्सेई और लियोन के मेयरों ने बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर प्रधानमंत्री से तत्काल आपात बैठक बुलाने की मांग की है।