जेफ्री एपस्टीन फाइलों के जरिए सऊदी अरब की घेराबंदी, बड़ा प्रॉपगैंडा बेनकाब
पश्चिम एशिया की तपती सरजमीं पर वर्षों से रॉकेट, आत्मघाती ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के दम पर कोहराम मचाने वाले यमन के हूती विद्रोहियों ने अब पारंपरिक युद्धक्षेत्र से हटकर एक नई और बेहद घातक 'इन्फॉर्मेशन वॉर' यानी सूचना युद्ध छेड़ दिया है। लाल सागर में मालवाहक जहाजों को निशाना बनाने और खाड़ी देशों के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले बोलने वाला यह विद्रोही संगठन अब किसी बारूदी हथियार के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम अमेरिकी यौन अपराधी और फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन की फाइलों का इस्तेमाल कर रहा है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (NYT) की एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही सऊदी अरब के राजपरिवार और शीर्ष नेतृत्व की वैश्विक छवि को धूमिल करने के लिए अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए गोपनीय अदालती दस्तावेजों का आक्रामक डिजिटल हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस सुनियोजित अभियान के जरिए हूती खुद को विशुद्ध इस्लामी मूल्यों और आस्था का सच्चा रक्षक साबित करने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं, जिससे पूरे मध्य पूर्व में एक नया कूटनीतिक और वैचारिक बवंडर खड़ा हो गया है।
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक फाइलों पर हूतियों की नजर: काबा के चित्र वाले टेपेस्ट्री पर खड़ा किया विवाद
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा विभिन्न किस्तों में जारी किए गए जेफ्री एपस्टीन से जुड़े कानूनी दस्तावेजों और ईमेल रिकॉर्ड्स को हूतियों के रणनीतिकारों ने बारीकी से खंगाला है। इन फाइलों के बीच हूतियों के हाथ कुछ ऐसे पन्ने लगे हैं जिनमें सऊदी अरब के शाही दरबार से जुड़े संपर्कों और एपस्टीन के पुराने रिश्तों के कुछ अस्पष्ट संकेत मिलते हैं। फाइलों में दावा किया गया है कि सऊदी के शाही दरबार से संबंधित कुछ पुराने सहयोगियों ने सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन को ऐसे विशेष पर्दे (टेपेस्ट्री) तोहफे के तौर पर भेजे थे, जिन पर इस्लाम के सबसे मुकद्दस और पवित्र स्थल 'काबा शरीफ' के चित्र उकेरे गए थे। चूंकि काबा पूरी दुनिया के मुसलमानों की सर्वोच्च धार्मिक आस्था का केंद्र है, इसलिए हूतियों ने इसी भावनात्मक और संवेदनशील बिंदु को पकड़कर सऊदी अरब के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखा नैरेटिव गढ़ना शुरू कर दिया है ताकि मुस्लिम जगत में सऊदी हुकूमत के नैतिक अधिकार पर सवाल खड़े किए जा सकें।
सोशल मीडिया से लेकर पारंपरिक संगीत तक: हूती सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के अध्यक्ष का बयान
हूती विद्रोहियों ने इस सनसनीखेज मुद्दे को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक बहुआयामी मनोवैज्ञानिक अभियान में तब्दील कर दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, हूती आंदोलन के आधिकारिक मीडिया विंग और उनकी सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के अध्यक्ष महदी अल-मशात का आधिकारिक बयान जारी किया गया, जिसमें इस दावे की पुष्टि करते हुए सऊदी अरब पर सीधा धार्मिक हमला बोला गया। हूती मशीनरी इस नैरेटिव को फैलाने के लिए डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स, वीडियो, व्यंग्य, भाषणों और संगीत का सहारा ले रही है। यमन के मशहूर सोशल मीडिया कॉमेडियन मुस्तफा अल-मोमारी, जिनके एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 27 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, उन्होंने इस विषय पर तंज कसते हुए एक खास वीडियो बनाया जो देखते ही देखते वायरल हो गया। इसके अलावा, यमन के एक पारंपरिक संगीतकार ने भी इन आरोपों को पिरोते हुए एक लोकगीत तैयार किया है, जिसे हूती नियंत्रित रेडियो और ऑनलाइन चैनलों पर प्रसारित किया जा रहा है ताकि जनमानस के भीतर सऊदी विरोधी भावनाएं भड़काई जा सकें।
यमन का गृहयुद्ध और मक्का पर कथित हमलों की पृष्ठभूमि: सऊदी अरब को घेरने का असली मकसद
हूतियों द्वारा छेड़े गए इस नए प्रचार अभियान के पीछे दशकों पुरानी भू-राजनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्विता छिपी हुई है। सऊदी अरब लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त चुनी हुई सरकार की बहाली के लिए अरब सैन्य गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है, जबकि हूती विद्रोही ईरान के कथित समर्थन से इस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए लड़ रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच जारी इस खूनी गृहयुद्ध के दौरान सीमा पार से लगातार मिसाइलें और ड्रोन दागे जाते रहे हैं। हाल ही में सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों पर आरोप लगाया था कि उनके ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पवित्र शहर मक्का की दिशा को भी निशाना बनाने की नापाक कोशिश की थी, जिसे हूतियों ने सिरे से खारिज कर दिया था। अब एपस्टीन फाइलों के हवाले से पवित्र काबा के नाम पर सऊदी अरब को घेरकर हूती असल में अपनी उस रक्षात्मक छवि को आक्रामक रूप देने की फिराक में हैं और दुनिया भर के सुन्नी-शिया मुसलमानों के सामने खुद को पश्चिम के प्रभाव से मुक्त और इस्लाम का एकमात्र निष्ठावान रक्षक दिखाना चाहते हैं।
2019 में एपस्टीन की रहस्यमयी मौत और सऊदी अरब की रणनीतिक चुप्पी
अमेरिकी वित्तीय हलकों से लेकर दुनिया भर की नामचीन राजनीतिक और कॉरपोरेट हस्तियों के साथ संबंध रखने वाले जेफ्री एपस्टीन की वर्ष 2019 में न्यूयॉर्क की एक अति-सुरक्षित जेल में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिसे आधिकारिक जांच में आत्महत्या करार दिया गया था। उसके बाद से अमेरिकी अदालतों द्वारा समय-समय पर जारी की जा रही फाइलों ने वैश्विक राजनीति में कई बार भूचाल लाया है। हूतियों द्वारा इस साल की शुरुआत से ही इन अदालती कागजातों के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों पर सऊदी अरब की सरकार और उसके आधिकारिक प्रवक्ताओं ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सऊदी प्रशासन इसे हूतियों की एक हताशा भरी चाल और युद्ध के मोर्चे पर कमजोर पड़ने के बाद गढ़ा गया बेबुनियाद राजनीतिक प्रॉपगैंडा मानकर रणनीतिक चुप्पी साधे हुए है। हालांकि, रक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल युग में हथियारों से ज्यादा खतरनाक सूचना और धारणाओं की लड़ाई हो चुकी है, और हूतियों का यह कदम दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में साइबर प्रचार कितना बड़ा हथियार बन चुका है।