शेख हसीना को भारत से वापस लाकर देंगे फांसी: बांग्लादेश सरकार की दो टूक, प्रत्यर्पण को बताया द्विपक्षीय संबंधों की पहली शर्त
भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। बांग्लादेश सरकार ने नई दिल्ली में शरण लिए बैठीं अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) को लेकर बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाते हुए दो टूक बयान जारी किया है। बांग्लादेश सरकार के सूचना सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि ढाका प्रशासन शेख हसीना के स्वयं सरेंडर करने का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं के जरिए उन्हें भारत से वापस 'पकड़कर' लाएगा और मौत की सजा पर अमल करेगा। इसके साथ ही बांग्लादेश ने यह स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि जब तक भारत शेख हसीना को उनके हवाले नहीं करता, तब तक दोनों मुल्कों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।
अपील का कोई मौका नहीं मिलेगा, लौटते ही होगी फांसी: ज़ाहिद उर रहमान
बांग्लादेश के सूचना सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि शेख हसीना के खिलाफ इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मृत्युदंड (Death Penalty) का फैसला पहले ही सुनाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले के बाद 30 दिनों के भीतर अपील दायर करने की निर्धारित कानूनी समय-सीमा अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। ऐसे में बांग्लादेश वापसी पर शेख हसीना को किसी भी अदालत में फैसले के खिलाफ अपील करने का कोई अवसर नहीं मिलेगा।
रहमान ने कहा, "हम शेख हसीना को पकड़कर वापस बांग्लादेश लाएंगे। जैसे ही वे बांग्लादेश की धरती पर कदम रखेंगी, उन्हें तत्काल मौत की सजा दी जाएगी। हमारा प्रत्यर्पण अनुरोध केवल भारत पर राजनीतिक दबाव बनाने का कोई दिखावा नहीं है, बल्कि सरकार उन्हें वापस लाकर सजा दिलाने को लेकर पूरी तरह गंभीर है। भारत को बांग्लादेशी आवाम की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।"
भारत में बैठकर बयानबाजी पर ढाका को भारी ऐतराज
बांग्लादेश सरकार ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई कि शेख हसीना भारत में रहते हुए वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को लगातार इंटरव्यू दे रही हैं। ज़ाहिद उर रहमान ने कहा कि एक तरफ बांग्लादेश की जनता पूर्ववर्ती शासन द्वारा की गई हिंसा और चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ हसीना का भारतीय सरजमीं से राजनीतिक बयान देना बांग्लादेश के लोगों के गुस्से को भड़का रहा है।
ढाका ने नई दिल्ली से मांग की है कि जब तक प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक भारत सरकार को शेख हसीना को किसी भी प्रकार की सार्वजनिक बयानबाजी या प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से पूरी तरह रोकना चाहिए। बांग्लादेश के अनुसार दोनों देशों के संबंधों में किसी भी सकारात्मक संवाद के लिए यह पहली बुनियादी शर्त होनी चाहिए।
भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि 2013 और कानूनी पेच
बांग्लादेश भले ही शेख हसीना की वापसी पर अड़ा हुआ है, लेकिन कानूनी जानकारों के अनुसार भारत के लिए उन्हें सौंपना इतना आसान नहीं है। भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 2013 में एक द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) हुई थी, जिसे 2016 में संशोधित भी किया गया था। हालांकि, इस संधि के अनुच्छेद 6(1) में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति पर दर्ज अपराध 'राजनीतिक प्रकृति' (Political Character) के पाए जाते हैं, तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है।
इसके अलावा संधि का अनुच्छेद 8(3) कहता है कि यदि यह साबित होता है कि आरोप दुर्भावनापूर्ण तरीके से लगाए गए हैं या निष्पक्ष सुनवाई के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं हुआ है, तब भी व्यक्ति को सौंपा नहीं जाएगा। भारत पहले ही आईसीटी (ICT) के फैसले पर बेहद नपी-तुली प्रतिक्रिया देते हुए कह चुका है कि वह बांग्लादेश में शांति, स्थिरता और सभी हितधारकों के समावेशी हितों के प्रति प्रतिबद्ध है।
5 अगस्त 2024 के तख्तापलट के बाद से भारत में हैं हसीना
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में छात्रों के हिंसक विरोध प्रदर्शन और व्यापक जनआक्रोश के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर अचानक ढाका छोड़ना पड़ा था। वे विशेष सैन्य विमान से भारत पहुंची थीं और तभी से सुरक्षा कारणों से नई दिल्ली में सुरक्षित स्थान पर रह रही हैं। उनके जाने के बाद गठित न्यायाधिकरण ने आंदोलन के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए उनकी अनुपस्थिति (in absentia) में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। अब बांग्लादेश में नई चुनी गई सरकार के रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि हसीना का प्रत्यर्पण आने वाले दिनों में भारत और बांग्लादेश के राजनयिक रिश्तों की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है।