महंगाई के झटके से दहला शेयर बाजार: सेंसेक्स 73000 के नीचे फिसला और निफ्टी 22700 के पार नहीं टिका
भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सत्र के दौरान जबर्दस्त बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक अपने अहम मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। खुदरा महंगाई दर (CPI Inflation) में अप्रत्याशित उछाल और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में कटौती टलने की आशंकाओं ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर सीधा प्रहार किया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक 'सेंसेक्स' (BSE Sensex) 250 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 72,781 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने एक बार 73,000 का स्तर बचाने की कोशिश की, लेकिन चौतरफा मुनाफावसूली के आगे बुल्स टिक नहीं सके। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक 'निफ्टी' (NSE Nifty) भी 99 अंक टूटकर 22,622 के स्तर पर आ गया, जिससे 22,700 का अहम सपोर्ट स्तर पूरी तरह टूट गया।
खुदरा महंगाई में उछाल और ब्याज दरों में कटौती पर संशय का असर
बाजार में आई इस तेज गिरावट का सबसे बड़ा कारण हाल ही में जारी हुए महंगाई के आंकड़े हैं। खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सहज दायरे के ऊपरी हिस्से पर दबाव बना दिया है। बाजार के विश्लेषक मान रहे हैं कि महंगाई के फिर से सिर उठाने के कारण केंद्रीय बैंक द्वारा आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट में कटौती की संभावना काफी क्षीण हो गई है। जब तक खाद्य और कोर महंगाई में स्थायी नरमी नहीं आती, तब तक नीतिगत दरों में नरमी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका ने कॉरपोरेट मुनाफे और लोन ग्रोथ पर असर पड़ने की चिंता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर पड़ा।
एफआईआई की निरंतर बिकवाली और बॉन्ड यील्ड में तेजी
घरेलू बाजार पर दबाव का दूसरा प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का आक्रामक बिकवाली रुख है। अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और डॉलर इंडेक्स के उच्च स्तर पर बने रहने से विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी से लगातार फंड निकाल रहे हैं। कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई हालिया अस्थिरता ने भी आयात बिल बढ़ने और चालू खाता घाटा (CAD) पर असर पड़ने का जोखिम खड़ा कर दिया है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी कर गिरावट को थामने की कोशिश जरूर की, लेकिन विदेशी निवेशकों के भारी आउटफ्लो के सामने बाजार का मूड नकारात्मक ही बना रहा।
किन सेक्टर्स पर टूटा सबसे ज्यादा कहर, किन शेयरों ने झेला नुकसान
बाजार की इस व्यापक गिरावट में लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। फाइनेंशियल सर्विसेज, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर सेक्टर में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ, अपोलो हॉस्पिटल्स और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गज लार्ज-कैप शेयरों में 2 से 3 फीसदी तक की भारी गिरावट देखने को मिली। इसके उलट, केवल चुनिंदा आईटी कंपनियों के शेयरों में निचले स्तरों पर हल्की मजबूती देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बिकवाली के दबाव से अछूते नहीं रहे और निफ्टी मिडकैप इंडेक्स भी लाल निशान में फिसलकर बंद हुआ।
तकनीकी स्तर: 22,500 के सपोर्ट पर टिकी नजर, क्या करें खुदरा निवेशक
चार्ट पर तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी का 22,700 के स्तर से नीचे फिसलना शॉर्ट-टर्म में कमजोरी का स्पष्ट संकेत है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि जब तक निफ्टी दोबारा 22,750 के पार स्थिरता से बंद नहीं होता, तब तक बाजार में पुलबैक रैली टिकने की संभावना कम है। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए 22,550 और 22,500 का स्तर अगला मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह सपोर्ट टूटता है, तो सूचकांक में 22,350 तक की और गिरावट देखी जा सकती है। बाजार विशेषज्ञों ने खुदरा निवेशकों को सलाह दी है कि वे इस अस्थिरता के दौर में आक्रामक खरीदारी करने या भारी लीवरेज वाली पोजीशन लेने से बचें और केवल मजबूत बुनियादी ढांचे (फंडामेंटल्स) वाली कंपनियों में ही चरणबद्ध तरीके से लंबी अवधि का नजरिया रखकर निवेश करें।