सरकार की गोल्ड बॉन्ड स्कीम ने दिया बंपर रिटर्न, 6 साल में हर ग्राम पर ₹9,613 का तगड़ा मुनाफा

सरकार की गोल्ड बॉन्ड स्कीम ने दिया बंपर रिटर्न, 6 साल में हर ग्राम पर ₹9,613 का तगड़ा मुनाफा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित केंद्र सरकार की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सुरक्षित और दीर्घकालिक निवेश के लिए डिजिटल सोना बेहतरीन विकल्पों में से एक है। हाल ही में जारी आंकड़ों और आरबीआई द्वारा निर्धारित रिडेम्प्शन प्राइस के अनुसार, SGB 2020-21 Series VII के समय से पहले रिडेम्प्शन (प्री-मैच्योर विड्रॉल) पर निवेशकों को 192% से अधिक का शानदार रिटर्न मिला है। 6 साल पहले जिन निवेशकों ने इस सरकारी बॉन्ड में ऑनलाइन पैसा लगाया था, उन्हें प्रति ग्राम ₹9,613 का बंपर कैपिटल गेन हासिल हुआ है। इस प्रदर्शन ने न केवल पारंपरिक सोने के गहनों बल्कि कई प्रमुख म्यूचुअल फंड्स और फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FD) को भी रिटर्न के मामले में पीछे छोड़ दिया है।

कैसे हुआ हर ग्राम पर ₹9,613 का भारी मुनाफा?

अक्टूबर 2020 में जब वित्त मंत्रालय ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज VII जारी की थी, तब इसका आधिकारिक निर्गम मूल्य (इश्यू प्राइस) ₹5,051 प्रति ग्राम तय किया गया था। जो निवेशक डिजिटल माध्यम से आवेदन और भुगतान करते थे, उन्हें सरकार की नीति के तहत ₹50 प्रति ग्राम की विशेष छूट मिली थी, जिससे उनकी वास्तविक खरीद लागत केवल ₹5,001 प्रति ग्राम रह गई थी।

अब आरबीआई ने 5 वर्ष की अनिवार्य लॉक-इन अवधि पूरी होने के बाद प्री-मैच्योर रिडेम्प्शन के लिए ₹14,614 प्रति ग्राम की कीमत तय की है। यह कीमत इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले 3 कारोबारी दिनों के औसत क्लोजिंग भाव पर निर्धारित की जाती है। गणितीय रूप से:

  • ऑनलाइन खरीद मूल्य: ₹5,001 प्रति ग्राम

  • आरबीआई रिडेम्प्शन भाव: ₹14,614 प्रति ग्राम

  • सीधा कैपिटल गेन (मुनाफा): ₹14,614 - ₹5,001 = ₹9,613 प्रति ग्राम

ऑफलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों को भी ₹5,051 की लागत पर प्रति ग्राम ₹9,563 का भारी मुनाफा (लगभग 189.33% रिटर्न) प्राप्त हुआ है।

₹1 लाख का निवेश बना ₹3 लाख के करीब, साथ में मिला सालाना ब्याज

इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें सोने के भाव में बढ़ोतरी का लाभ तो मिलता ही है, साथ ही मूल निवेश पर 2.50% वार्षिक निश्चित ब्याज भी अर्धवार्षिक आधार पर सीधे बैंक खाते में जमा किया जाता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक ने अक्टूबर 2020 में 20 ग्राम सोने के बॉन्ड में ₹1,00,020 का ऑनलाइन निवेश किया था, तो आज रिडेम्प्शन पर उनके 20 ग्राम की कीमत बढ़कर सीधे ₹2,92,280 हो गई है। यानी पूंजीगत लाभ के रूप में लगभग ₹1.92 लाख का सीधा इजाफा दर्ज हुआ। इसके अतिरिक्त, 6 वर्षों के दौरान प्राप्त हुआ 2.5% का ब्याज जोड़ लें, तो कुल रिटर्न लगभग 3 गुना (तिगुना) हो जाता है।

टैक्स छूट ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को बनाया सबसे आकर्षक

भौतिक सोना (सिक्के, बिस्कुट या जेवर) बेचने पर निवेशकों को शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना पड़ता है। साथ ही आभूषण बनवाने पर मेकिंग चार्ज और 3% जीएसटी का नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसके विपरीत, आयकर अधिनियम के सेक्शन 47(viic) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से समय से पहले या 8 वर्ष की मैच्योरिटी पर किए जाने वाले रिडेम्प्शन पर होने वाला पूरा कैपिटल गेन व्यक्तिगत निवेशकों के लिए 100% टैक्स फ्री रहता है। केवल सालाना मिलने वाला 2.5% ब्याज निवेशक के स्लैब के अनुसार कर-योग्य होता है। बिना किसी टैक्स कटौती के मिला यह ₹9,613 प्रति ग्राम का शुद्ध मुनाफा ही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण साबित हुआ है।

क्या निवेशकों को अभी पैसा निकालना चाहिए या मैच्योरिटी तक रुकना चाहिए?

आरबीआई के नियमों के अनुसार एसजीबी की कुल अवधि 8 वर्ष होती है, लेकिन 5 वर्ष पूरे होने के बाद हर ब्याज भुगतान की तारीख पर प्री-मैच्योर एग्जिट का विकल्प खुल जाता है। जिन निवेशकों को नकदी (लिक्विडिटी) की तत्काल आवश्यकता है या जो अपने एसेट एलोकेशन में सोने का मुनाफा बुक करके इक्विटी या रियल एस्टेट में लगाना चाहते हैं, उनके लिए यह रिडेम्प्शन विंडो शानदार अवसर है। वहीं, जो निवेशक दीर्घकालिक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना रखना चाहते हैं, वे इसे पूरे 8 साल की मैच्योरिटी तक बनाए रख सकते हैं, जिससे उन्हें बचे हुए 2 वर्षों तक 2.5% का ब्याज और सोने के संभावित अतिरिक्त उछाल का लाभ मिलता रहेगा।