रेखा संग 5 मिनट लंबे किसिंग सीन पर बोले बिस्वजीत: 'आज के बेडरूम सीन देख रह जाता हूं हैरान', 'एनिमल' का दिया हवाला
बॉलीवुड की सदाबहार अभिनेत्री रेखा के शुरुआती करियर का एक ऐसा विवाद है, जिसकी गूंज दशकों बाद आज भी सिनेमा गलियारों में सुनाई देती है। साल 1969 में शूट हुई फिल्म 'अंजाने सफर' (जो 10 साल बाद 'दो शिकारी' नाम से रिलीज हुई) के सेट पर रेखा और दिग्गज अभिनेता बिस्वजीत चटर्जी के बीच फिल्माए गए 5 मिनट लंबे किसिंग सीन ने उस दौर में तहलका मचा दिया था। अब वर्षों बाद 80 के दशक को पार कर चुके अभिनेता बिस्वजीत चटर्जी ने इस पूरे विवाद पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बिस्वजीत ने दो टूक कहा कि उस पुराने विवाद का आज कोई मतलब ही नहीं है, क्योंकि आज के दौर में ऑनस्क्रीन किसिंग बहुत सामान्य बात हो चुकी है और अब फिल्मों में जो बेडरूम सीन्स दिखाए जाते हैं, उन्हें देखकर वह खुद हैरान रह जाते हैं।
बिस्वजीत का यह बयान सामने आते ही एक बार फिर क्लासिक बॉलीवुड के पर्दे के पीछे की कार्यप्रणाली, अभिनेत्रियों की सहमति और आधुनिक सिनेमा के बोल्ड कंटेंट को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
विवादित किसिंग सीन पर बिस्वजीत का बयान, 'एनिमल' का भी किया जिक्र
हाल ही में समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के साथ खास बातचीत के दौरान जब बिस्वजीत चटर्जी से रेखा संग उनके उस विवादित किसिंग सीन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि आज के समय में उस बात का कोई औचित्य नहीं बचा है। अभिनेता ने कहा, "आज के दिन में उस बात का कोई मतलब ही नहीं है। आज स्क्रीन पर किसिंग सीन तो कुछ भी नहीं रह गया है। आज के बेडरूम सीन्स देखकर मैं हैरान रह जाता हूं। रणबीर कपूर की फिल्म 'एनिमल' में जो देखा..."।
बिस्वजीत ने आगे कहा कि जब लोग आज भी उस पुराने सीन को लेकर बातें करते हैं, तो उन्हें लगता है कि लोगों के पास कोई काम नहीं है और वे सिर्फ टाइमपास करने के लिए इन बातों को खींचते हैं। जब अभिनेता से पूछा गया कि क्या उस वाकये के बाद उनके और रेखा के रिश्तों में कोई कड़वाहट आई थी, तो उन्होंने साफ किया कि ऐसा बिल्कुल नहीं था। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद भी रेखा ने उनकी बनाई और निर्देशित की हुई फिल्म 'कहते हैं मुझको राजा' में काम किया था। उनके बीच हमेशा एक सहज पेशेवर संबंध बना रहा।
क्या था 'अंजाने सफर' के सेट का वह चौंकाने वाला वाकया?
इस विवाद की जड़ें साल 1969 में मुंबई के महबूब स्टूडियो से जुड़ी हैं। उस वक्त रेखा महज 15 साल की थीं और साउथ से हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने आई थीं। फिल्म 'अंजाने सफर' के निर्देशक राजा नवाथे और अभिनेता बिस्वजीत के बीच एक रोमांटिक सीन को लेकर चर्चा हुई थी। निर्देशक चाहते थे कि सीन में अभिनेत्री का स्वाभाविक और हैरान कर देने वाला रिएक्शन कैमरे में कैद हो। इसी योजना के तहत रेखा को पहले से यह नहीं बताया गया था कि सीन में लिप-टू-लिप किस शामिल है।
जैसे ही निर्देशक ने 'एक्शन' बोला, बिस्वजीत ने रेखा को बाहों में भरकर किस करना शुरू कर दिया। इस अप्रत्याशित हरकत से 15 साल की रेखा बुरी तरह सन्न रह गईं। कैमरा लगातार रोल होता रहा और निर्देशक ने काफी देर तक 'कट' नहीं बोला। रिपोर्ट्स और रेखा की बायोग्राफी 'रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी' (लेखक यासिर उस्मान) के मुताबिक, यह किसिंग सीन करीब 5 मिनट तक चला था। उस दौरान सेट पर मौजूद क्रू मेंबर्स सीटियां और तालियां बजा रहे थे, जबकि रेखा की आंखें आंसुओं से भरी थीं और वह अंदर से बुरी तरह टूट गई थीं। इस घटना के बाद रेखा इतनी आहत हुईं कि उस दिन की पूरी शूटिंग रद्द करनी पड़ी थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा था विवाद, बेटी पल्लवी ने भी जताई थी नाराजगी
यह सीन उस जमाने में इतना बड़ा विवाद बन गया था कि भारतीय सेंसर बोर्ड ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और फिल्म सालों तक लटकी रही। यहां तक कि अमेरिका की मशहूर 'लाइफ मैगजीन' (Life Magazine) ने भी अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रति के कवर पर इस सीन की तस्वीर छापी थी और इसे 'द किसिंग क्राइसिस ऑफ इंडिया' का नाम दिया था।
कुछ समय पहले बिस्वजीत की बेटी और अभिनेत्री पल्लवी चटर्जी ने भी एक इंटरव्यू में इस घटना पर अपने पिता का बचाव करने से इनकार कर दिया था। पल्लवी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जो कुछ भी रेखा के साथ हुआ, वह पूरी तरह गलत था। पल्लवी का मानना था कि 15 साल की एक अनजान लड़की के साथ बिना उसकी सहमति के ऐसा सीन करना मानसिक आघात पहुंचाने जैसा था। उनके पिता को या तो यह सीन करने से साफ मना कर देना चाहिए था या फिर पहले रेखा की अनुमति लेनी चाहिए थी।
सिनेमा का बदलता दौर और सहमति के मायने
बिस्वजीत चटर्जी का यह नया बयान इस बात को रेखांकित करता है कि पिछले पांच दशकों में भारतीय सिनेमा कितना बदल चुका है। जहां 60 और 70 के दशक में एक किसिंग सीन पूरे देश में भूचाल ला देता था, वहीं आज के ओटीटी और आधुनिक सिनेमा के दौर में बोल्डनेस, बेडरूम सीन्स और इंटिमेट सीक्वेंस मुख्यधारा की फिल्मों का आम हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, आधुनिक फिल्म निर्माण में अब 'इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर' रखे जाते हैं ताकि किसी भी कलाकार की सहमति के बिना कोई भी सीन शूट न हो सके। बिस्वजीत का रेखा के साथ हुआ वह वाकया आज भी बॉलीवुड में सहमति और कार्यस्थल की नैतिकता के संदर्भ में सबसे अधिक चर्चा में रहने वाले उदाहरणों में गिना जाता है।