फराज खान की जान लेने वाली यह दुर्लभ बीमारी कैसे बनी काल? जानिए कैसे शरीर के एक-एक अंग को खराब करता चला गया यह संक्रमण
नब्बे के दशक में रानी मुखर्जी के साथ सुपरहिट फिल्म 'मेहंदी' और विक्रम भट्ट की संगीतमय फिल्म 'फरेब' से घर-घर में अपनी खास पहचान बनाने वाले अभिनेता फराज खान (Faraaz Khan) की जिंदगी का अंत बेहद दर्दनाक और अप्रत्याशित रहा। दिग्गज बॉलीवुड चरित्र अभिनेता युसूफ खान (जिन्होंने 'अमर अकबर एंथनी' में जेबिस्को का मशहूर किरदार निभाया था) के बेटे फराज खान देखने में बेहद फिट, हैंडसम और ऊर्जावान थे। लेकिन अचानक एक दुर्लभ और आक्रामक न्यूरोलॉजिकल इन्फेक्शन (मस्तिष्क संक्रमण) ने उन्हें इस कदर अपनी गिरफ्त में लिया कि देखते ही देखते उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया। बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से कई हफ्तों तक जूझने के बाद महज 50 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
एक साधारण खांसी और सीने के संक्रमण से हुई थी शुरुआत
चिकित्सा विशेषज्ञों और उनके परिवार के अनुसार, फराज खान की बीमारी की शुरुआत किसी जानलेवा लक्षण से नहीं हुई थी। उन्हें लगभग एक साल से हल्की खांसी और सीने में संक्रमण (Chest Infection) की समस्या बनी हुई थी, जिसे शुरुआत में एक सामान्य मौसमी फ्लू या ब्रोंकाइटिस मानकर नजरअंदाज किया गया। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, यह संक्रमण फेफड़ों के भीतर गहराई तक जड़ें जमाता चला गया। जब खांसी असहनीय हो गई और सांस लेने में तकलीफ बढ़ने लगी, तो उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि फेफड़ों में फैला संक्रमण रक्त प्रवाह (Bloodstream) के जरिए तेजी से उनके मस्तिष्क यानी दिमाग की नसों तक जा पहुंचा है।
दिमाग तक कैसे पहुंचा संक्रमण? 'हर्पीज एन्सेफलाइटिस' ने किया पहला बड़ा वार
अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद फराज खान की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उन्हें अचानक तेज दौरे (Seizures/Convulsions) पड़ने लगे, जो इस बात का स्पष्ट संकेत थे कि संक्रमण दिमाग के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) में फैल चुका है। डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की कि वे हर्पीज सिम्प्लेक्स एन्सेफलाइटिस (Herpes Simplex Encephalitis) और गंभीर बैक्टीरियल-फंगल इन्फेक्शन से पीड़ित हो चुके थे।
यह एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें वायरस दिमाग के संवेदनशील ऊतकों (Brain Tissues) पर हमला कर देता है। इसके चलते:
-
दिमाग में सूजन और ब्लीडिंग: दिमाग के भीतर गंभीर सूजन (Swelling) आ गई और नसों पर अत्यधिक दबाव बन गया।
-
न्यूरोलॉजिकल डैमेज: लगातार पड़ रहे दौरों के कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट होने लगीं, जिससे शरीर के बाकी अंगों को मिलने वाले सिग्नल बाधित हो गए।
कैसे एक के बाद एक खराब होते गए शरीर के महत्वपूर्ण अंग?
हर्पीज एन्सेफलाइटिस और सेप्सिस की सबसे खतरनाक बात यह होती है कि यह केवल एक अंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक 'डोमिनो इफेक्ट' (एक के बाद एक गिरना) की तरह पूरे शरीर के सिस्टम को ढहा देता है।
-
फेफड़ों का काम करना बंद करना (Pneumonia & ARDS): सीने का संक्रमण गंभीर निमोनिया में बदल गया, जिससे फेफड़ों में हवा की थैलियों में मवाद और तरल भर गया। इससे खून में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से गिर गया और फराज खान को सांस लेने के लिए तुरंत मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा।
-
ब्लड इन्फेक्शन और सेप्टिक शॉक (Septic Shock): फेफड़ों और मस्तिष्क से बैक्टीरिया पूरे रक्तप्रवाह में फैल गए, जिसे मेडिकल भाषा में 'सेप्सिस' कहा जाता है। सेप्सिस के कारण ब्लड प्रेशर अचानक बहुत नीचे गिर गया और शरीर के बाकी अंगों तक जरूरी खून की आपूर्ति बंद हो गई।
-
किडनी और लिवर फेलियर: ऑक्सीजन और रक्त की कमी के चलते उनके गुर्दे (Kidneys) तेजी से विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करने में असमर्थ हो गए। यूरिया और क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ गया, जिसके चलते उनका डायलिसिस शुरू करना पड़ा। इसके साथ ही लिवर एंजाइम्स में भारी असंतुलन आ गया।
-
मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम (MODS): जब मस्तिष्क, फेफड़े, हृदय और किडनी चारों अंग एक साथ गंभीर रूप से प्रभावित हो गए, तो शरीर में दवाइयों और एंटीबायोटिक्स का असर होना लगभग बंद हो गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों और लगातार डायलिसिस के बावजूद उनके शरीर ने रिकवर करने से इनकार कर दिया।
आर्थिक तंगी और सलमान खान का फरिश्ता बनकर सामने आना
बीमारी की गंभीरता के साथ-साथ फराज खान के परिवार पर आर्थिक संकट का पहाड़ भी टूट पड़ा था। फिल्मों से लंबे समय से दूर रहने और बेंगलुरु में सामान्य जीवन जीने के कारण उनके परिवार के पास आईसीयू के भारी-भरकम इलाज (लगभग ₹25 लाख) का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे। उनके छोटे भाई फहमान खान (जो टीवी के जाने-माने अभिनेता हैं) ने सोशल मीडिया पर क्राउडफंडिंग के जरिए लोगों से आर्थिक मदद की गुहार लगाई थी।
इस दुखद स्थिति की खबर जैसे ही बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान तक पहुंची, वे तुरंत आगे आए। सलमान खान ने अपनी संस्था 'बीइंग ह्यूमन' के माध्यम से फराज खान के सभी मेडिकल बिलों और आईसीयू के भारी खर्चों का भुगतान अपने जिम्मे ले लिया। अभिनेत्री कश्मीरा शाह ने सोशल मीडिया पर सलमान की इस दरियादिली का खुलासा करते हुए उन्हें 'सच्चा इंसान' बताया था। हालांकि, तमाम आर्थिक सहयोग और डॉक्टरों की लगातार 28 दिनों की अथक कोशिशों के बावजूद फराज खान को बचाया नहीं जा सका।
हेल्थ एक्सपर्ट्स की सीख: हल्के संक्रमण को कभी न करें नजरअंदाज
फराज खान का यह मामला इस बात की बेहद गंभीर चेतावनी है कि शरीर में उठने वाली किसी भी लंबी खांसी, बार-बार होने वाले बुखार या सीने के संक्रमण को कभी भी सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। समय पर सही एंटीबायोटिक्स या एंटीवायरल उपचार न मिलने पर एक सामान्य संक्रमण भी खून के जरिए दिमाग या रीढ़ की हड्डी तक पहुंच सकता है। यदि सिरदर्द, अचानक दौरे, भ्रम या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए न्यूरोलॉजिस्ट और पल्मोनोलॉजिस्ट से संपर्क करना ही जीवन रक्षा का एकमात्र उपाय साबित होता है।