UP Politics: 12 दिसंबर को सपरिवार अयोध्या जाएंगे अखिलेश यादव, पत्नी डिंपल के साथ करेंगे रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन

UP Politics: 12 दिसंबर को सपरिवार अयोध्या जाएंगे अखिलेश यादव, पत्नी डिंपल के साथ करेंगे रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगामी 12 दिसंबर को सपरिवार अयोध्या जाएंगे। इस दौरान वे अपनी पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव, बेटे और बेटी के साथ भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन करेंगे और हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के चरणों में शीश नवाएंगे। सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि अखिलेश यादव का यह दौरा पूरी तरह से धार्मिक होगा और वे पूरा दिन अयोध्या में संतों व भक्तों के बीच बिताएंगे।

पवन पांडेय ने किया तारीख का ऐलान: भागवत कथा में सौंपी गई थी जिम्मेदारी

अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की तारीख तय करने की पृष्ठभूमि पिछले महीने ही तैयार हो गई थी। दरअसल, अक्टूबर में जब सपा मुखिया अयोध्या दौरे पर पूर्व मंत्री पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने पहुंचे थे, तब पत्रकारों ने उनसे राम मंदिर दर्शन को लेकर सवाल पूछा था। उस समय अखिलेश यादव ने मुस्कुराते हुए मंच से ही पवन पांडेय से कहा था कि वे दर्शन की तारीख तय करें, वह जरूर आएंगे। अब इस जिम्मेदारी को पूरा करते हुए पवन पांडेय ने ऐलान किया कि 12 दिसंबर (शनिवार) को सपा प्रमुख सपरिवार रामनगरी पहुंच रहे हैं।

पवन पांडेय के अनुसार:

  • दौरे की रूपरेखा: अखिलेश यादव सबसे पहले हनुमानगढ़ी पहुंचेंगे, जहां संकटमोचन हनुमान जी का पूजन-अर्चन करेंगे।

  • रामलला के दर्शन: इसके उपरांत वे श्रीराम जन्मभूमि परिसर जाएंगे और रामलला के गर्भगृह में दर्शन कर आशीर्वाद लेंगे।

  • संतों से संवाद और प्रसाद ग्रहण: अयोध्या प्रवास के दौरान अखिलेश यादव विभिन्न प्रमुख मठों व आश्रमों में जाकर पूज्य साधु-संतों व महंतों से भेंट करेंगे, उनका आशीर्वाद लेंगे और उनके साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करेंगे।

यूपी चुनाव से पहले बड़ा सियासी कदम: विरोधियों के तंज का जवाब

राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी और हिंदूवादी संगठन अखिलेश यादव के अब तक रामलला के दर्शन न करने को लेकर लगातार उन पर राजनीतिक हमले बोलते रहे हैं। विपक्ष अक्सर यह आरोप लगाता रहा है कि सपा मुखिया विशेष वोट बैंक की नाराजगी के डर से मंदिर जाने से कतराते हैं।

अब आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव का परिवार सहित राम मंदिर जाने का यह फैसला राज्य के राजनीतिक फलक पर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से समाजवादी पार्टी भाजपा के उस पुराने नैरेटिव की धार कुंद करना चाहती है जिसमें सपा को सनातन या राम मंदिर विरोधी के रूप में चित्रित करने की कोशिश की जाती रही है। लोकसभा चुनाव में फैजाबाद (अयोध्या) सीट पर सपा की जीत के बाद अब अखिलेश का खुद मंदिर परिसर में पहुंचना अवध क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को नया आयाम देगा।

भाजपा और सत्ता पक्ष का पलटवार: 'चुनाव देखकर आई सद्बुद्धि'

अखिलेश यादव के 12 दिसंबर के अयोध्या दौरे की खबर आते ही सत्तारूढ़ दल की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं।

  • भाजपा का रुख: भाजपा प्रवक्ताओं ने इसे चुनाव से प्रेरित कदम बताते हुए कहा कि यदि अखिलेश यादव वास्तव में प्रभु श्रीराम के प्रति सच्ची आस्था रखते तो उन्हें मंदिर जाने के लिए इतने महीनों का इंतजार नहीं करना पड़ता। चुनाव नजदीक आते देख मंदिर जाने से जनता उनके पुराने रिकॉर्ड को नहीं भूलने वाली।

  • सहयोगी दलों के तंज: एनडीए के सहयोगी और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुटकी लेते हुए कहा कि चुनाव करीब आते ही सपा मुखिया को अयोध्या की याद आई है, देर से ही सही लेकिन उन्हें सद्बुद्धि तो मिली। लगे हाथ उन्हें काशी और मथुरा जाने की तारीखें भी तय कर लेनी चाहिए।

सपा का पक्ष: 'आस्था व्यक्तिगत विषय, सियासत से न जोड़ा जाए'

वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं और नेताओं ने विरोधियों के बयानों को सिरे से खारिज किया है। सपा नेताओं का कहना है कि भगवान श्रीराम कण-कण में व्याप्त हैं और वे पूरे संसार के आराध्य हैं, किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं। अखिलेश यादव और उनका परिवार सदैव सनातन परंपराओं, कथाओं और धार्मिक आयोजनों से जुड़ा रहा है। सपा का मानना है कि धर्म और आस्था व्यक्ति का निजी विषय है और इसे चुनावी चश्मे से देखना भाजपा की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। 12 दिसंबर को अयोध्या में सपा कार्यकर्ताओं द्वारा अखिलेश यादव के भव्य स्वागत की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।