4 हजार करोड़ की 'रामायण' के मेकर नमित मल्होत्रा पर IT का बड़ा एक्शन, मुंबई दफ्तर पर रेड

4 हजार करोड़ की 'रामायण' के मेकर नमित मल्होत्रा पर IT का बड़ा एक्शन, मुंबई दफ्तर पर रेड

बॉलीवुड गलियारों और ग्लोबल सिनेमा जगत में उस वक्त सनसनी फैल गई जब भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े प्रोजेक्ट 'रामायण' के मुख्य कर्ताधर्ता नमित मल्होत्रा के दफ्तरों पर आयकर विभाग की टीमों ने अचानक दबिश दी। करीब 4,000 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट और भारी-भरकम अंतरराष्ट्रीय निवेश से बन रही इस महागाथा के निर्माता के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने वित्तीय महकमे में हलचल तेज कर दी है। मुंबई के अंधेरी, बांद्रा और लोअर परेल स्थित व्यावसायिक परिसरों में सुबह तड़के अधिकारियों की कई टीमें एक साथ दाखिल हुईं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई प्राइम फोकस लिमिटेड और उससे जुड़ी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में विदेशी लेन-देन, कर अनुपालन और फंडिंग के स्रोतों की पड़ताल के सिलसिले में की गई है।

जांच अधिकारियों ने ऑफिस में मौजूद डिजिटल डेटा, अकाउंट बुक्स, हार्ड ड्राइव्स और हालिया वित्तीय अनुबंधों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। विभाग की टीम मुख्य रूप से भारत और विदेशों के बीच हुए बड़े फंड ट्रांसफर के रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है। नमित मल्होत्रा केवल बॉलीवुड तक सीमित नाम नहीं हैं, बल्कि उनकी अगुवाई वाली ऑस्कर विजेता कंपनी डीएनईजी (DNEG) हॉलीवुड की शीर्ष विजुअल इफेक्ट्स कंपनियों में शुमार है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए वित्तीय समझौतों और विदेशी निवेश के रास्तों की पारदर्शिता को लेकर आयकर विभाग ने यह सख्त कदम उठाया है। दफ्तरों के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात रही और कर्मचारियों के बाहर आने-जाने पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया।

मुंबई में प्राइम फोकस और डीएनईजी से जुड़े ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान

आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग को कथित तौर पर कुछ वित्तीय विसंगतियों और अघोषित संपत्ति के लेन-देन को लेकर गुप्त सूचनाएं मिली थीं। इसके बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्देशों पर मुंबई जोनल यूनिट ने इस बड़े सर्च ऑपरेशन का खाका तैयार किया। छापे के दौरान कंपनी के शीर्ष चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और वित्तीय सलाहकारों से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मुख्य फोकस उन विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों पर है, जिनके माध्यम से भारत में बनने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स में पूंजी का निवेश किया जा रहा था। कर विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी वैश्विक स्तर की फिल्मों में शेल कंपनियों या टैक्स हेवन देशों के जरिए आने वाले धन की निगरानी बेहद सख्त होती है।

विभाग इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या प्रोडक्शन हाउस और सहयोगी कंपनियों ने भारत में लागू प्रत्यक्ष कर नियमों का पूरी तरह पालन किया है या फिर किसी बड़े टैक्स स्ट्रक्चरिंग मॉडल के जरिए देनदारियों को कम दिखाया गया। जांच दल ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के ऑडिटेड खातों, टर्नओवर रिपोर्ट्स और विदेशी मुद्रा विनिमय (फेमा) से जुड़े विवरणों को तलब किया है। दफ्तर के वरिष्ठ प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज का डेटा बैकअप तैयार किया गया है ताकि किसी भी तरह के डिजिटल साक्ष्य को सुरक्षित रखा जा सके।

रणबीर कपूर स्टारर महागाथा 'रामायण' के प्रोडक्शन बजट और विदेशी फंडिंग पर नजर

फिल्म 'रामायण' को भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे महत्वाकांक्षी और खर्चीला सिनेमाई प्रयास माना जा रहा है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फ्रेंचाइजी में रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे दिग्गज कलाकार जुड़े हैं। फिल्म का बजट करीब 4,000 करोड़ रुपये (लगभग 500 मिलियन डॉलर) आंका गया है, जिसे हॉलीवुड के स्तर पर तीन भागों में तैयार करने की योजना है। इस भारी भरकम बजट के पीछे नमित मल्होत्रा की अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और डीएनईजी की वीएफएक्स तकनीक की सबसे अहम भूमिका मानी जा रही है। जब बजट इतना विशाल हो, तो उसमें लगने वाली पाई-पाई का ब्योरा वित्तीय एजेंसियों की रडार पर आना स्वाभाविक है।

फिल्म विश्लेषकों और वित्तीय जानकारों का मानना है कि इस स्तर की फिल्म में अंतरराष्ट्रीय स्टूडियोज, निजी इक्विटी फंड्स और घरेलू प्रोडक्शन पार्टनर्स का मिश्रित निवेश शामिल होता है। आयकर विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि प्रोजेक्ट के लिए जुटाए गए फंड्स की उत्पत्ति पारदर्शी है और इसमें किसी प्रकार की अघोषित आय का इस्तेमाल नहीं किया गया। हालांकि, प्रोडक्शन टीम से जुड़े अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह एक सामान्य वित्तीय स्क्रूटनी और सर्वे का हिस्सा हो सकता है, जिसका नियमित रूप से बड़े कॉर्पोरेट्स को सामना करना पड़ता है।

हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक नमित मल्होत्रा के कारोबारी साम्राज्य का प्रभाव

नमित मल्होत्रा का नाम आज केवल भारतीय सिनेमा तक सीमित नहीं है। उन्होंने मुंबई में एक छोटे से एडिटिंग स्टूडियो 'प्राइम फोकस' से अपने करियर की शुरुआत की थी और कुछ ही दशकों में हॉलीवुड की सबसे सम्मानित वीएफएक्स कंपनियों में से एक डीएनईजी का अधिग्रहण कर वैश्विक स्तर पर तहलका मचा दिया। उनकी कंपनी ने 'ड्यून', 'टेनेट', 'इंसेप्शन' और 'ब्लेड रनर 2049' जैसी हॉलीवुड फिल्मों के लिए कई ऑस्कर पुरस्कार अपने नाम किए हैं। यही कारण है कि उनके ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई की गूंज सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में भी इसकी चर्चा हो रही है।

वैश्विक स्तर पर फैले इस कारोबार में लंदन, लॉस एंजेलिस, वैंकूवर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में हजारों कर्मचारी काम करते हैं। टैक्स अधिकारियों का मानना है कि जब किसी कंपनी की कानूनी और वित्तीय संरचना कई देशों में फैली होती है, तो ट्रांसफर प्राइसिंग और रॉयल्टी भुगतान जैसे मामलों में कर नियमों का अनुपालन बेहद जटिल हो जाता है। इस सघन जांच के जरिए एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या भारत से बाहर भेजे गए या विदेशों से भारत लाए गए मुनाफे पर उचित टैक्स अदा किया गया है या नहीं।

शूटिंग शेड्यूल और सिनेमाई भविष्य पर पड़ताल का संभावित असर

इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद फिल्म इंडस्ट्री में इस बात को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि क्या इससे 'रामायण' के चल रहे निर्माण कार्य पर कोई असर पड़ेगा। फिल्म के कई हिस्सों की शूटिंग मुंबई और विदेशों के सेट्स पर पहले ही शुरू हो चुकी है, जबकि प्री-विजुअलाइजेशन और वीएफएक्स का काम लगातार जारी है। कानूनी जानकारों का कहना है कि आयकर विभाग की जांच वित्तीय मामलों तक सीमित होती है और जब तक कोई कानूनी रोक न लगाई जाए, तब तक रचनात्मक और तकनीकी गतिविधियों पर सीधा असर नहीं पड़ता। फिर भी, बड़े स्तर पर हो रही जांच के चलते वित्तीय लेन-देन में अस्थायी देरी हो सकती है।

निर्माता पक्ष या प्राइम फोकस की ओर से अब तक इस रेड को लेकर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी तरफ, आयकर विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जब्ती और दस्तावेजों की प्रारंभिक पड़ताल पूरी होने के बाद ही किसी निश्चित आंकड़े या निष्कर्ष की पुष्टि की जा सकेगी। फिलहाल सभी की निगाहें आयकर विभाग की अगली कार्रवाई और नमित मल्होत्रा की कानूनी व वित्तीय टीम के आधिकारिक रुख पर टिकी हैं। भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े प्रोजेक्ट से जुड़े निर्माता पर हुई यह छापेमारी आने वाले दिनों में देश के मनोरंजन उद्योग में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ सकती है।