कभी गाते हुए फूल जाती थी गले की नसें, मां को था डर कि बेटा कभी गा नहीं पाएगा, फिर ऐसे बना 90s का 'पॉप किंग'

कभी गाते हुए फूल जाती थी गले की नसें, मां को था डर कि बेटा कभी गा नहीं पाएगा, फिर ऐसे बना 90s का 'पॉप किंग'

90 के दशक का वो दौर तो आपको याद ही होगा जब 'क्या सूरत है' और 'वो चली वो चली' जैसे गानों ने हर पार्टी और रेडियो एफएम पर धूम मचा रखी थी. इन गानों के पीछे जिस जादुई आवाज का हाथ था, वो थे इंडी-पॉप स्टार नीरज श्रीधर. 23 जून को अपना 50वां जन्मदिन मना रहे नीरज श्रीधर ने संगीत की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया है, वहां तक पहुंचना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था. आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले इस सिंगर के लिए बचपन में गाना गाना एक दर्दनाक चुनौती जैसा था.

जब बचपन में सिंगर बनने के सपने पर लगा ग्रहण

मुंबई में 23 जून 1976 को जन्मे नीरज श्रीधर का बचपन से ही एक ही सपना था— सिंगर बनना. लेकिन नियति ने शुरुआत में ही उनके सामने एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी. नीरज ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में जब भी वह सुर लगाने या गाने की कोशिश करते थे, तो उनके गले की नसें बुरी तरह फूल जाती थीं.

हालत यह हो जाती थी कि वह ठीक से बोल भी नहीं पाते थे. बेटे की यह तकलीफ देखकर उनकी मां गहरे सदमे में आ गई थीं. उन्हें हमेशा यह डर सताता था कि उनके बेटे को संगीत से इतना लगाव है, लेकिन वह शायद जिंदगी में कभी पेशेवर तरीके से गा नहीं पाएगा. हालांकि, नीरज ने हार नहीं मानी और अपनी इस शारीरिक कमजोरी को कड़े रियाज से मात दी.

'बॉम्बे वाइकिंग्स' का वो दौर और रीमिक्स गानों का रीइंवेंशन

अपनी आवाज को तराशने के बाद नीरज ने साल 1994 में म्यूजिक ग्रुप 'बॉम्बे वाइकिंग्स' (Bombay Vikings) की नींव रखी. यह वह दौर था जब भारत में क्लासिक हिंदी गानों को मॉडर्न रॉक और पॉप ट्विस्ट के साथ पेश करने का क्रेज शुरू हो रहा था.

नीरज श्रीधर ने इस ट्रेंड को एक नई ऊंचाई दी. उनकी लीड वोकल्स में रिलीज हुए गानों 'छोड़ दो आंचल', 'क्या सूरत है' और 'वो चली' ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी तहलका मचा दिया. बॉम्बे वाइकिंग्स देखते ही देखते भारत का सबसे बड़ा पॉप-रॉक बैंड बन गया और नीरज घर-घर में पहचान बना चुके थे.

'भूल भुलैया' से चमकी किस्मत, बन गए बॉलीवुड के 'हिट मशीन'

पॉप म्यूजिक में अपना लोहा मनवाने के बाद नीरज ने बॉलीवुड का रुख किया. शुरुआत में उन्होंने 'गॉड तुस्सी ग्रेट हो', 'भागमभाग' और 'हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड' जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी, लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 2007 में आया.

अक्षय कुमार स्टारर फिल्म 'भूल भुलैया' के टाइटल ट्रैक (Hare Ram Hare Krishna) ने रिलीज होते ही म्यूजिक चार्ट्स पर कब्जा कर लिया. इस एक गाने ने नीरज श्रीधर को बॉलीवुड का ए-लिस्ट प्लेबैक सिंगर बना दिया. इसके बाद उन्होंने 'ट्विस्ट' (लव आज कल), 'चरित्र ढीला' (रेडी), 'तुम ही हो बंधु' (कॉकटेल) और 'लव मेरा हिट हिट' (बिल्लू) जैसे अनगिनत कल्ट पार्टी सॉन्ग्स देकर फिल्म इंडस्ट्री को झूमने पर मजबूर कर दिया.

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