दूध पर जमेगी मोटी और मलाईदार परत, बस उबालते समय अपनाएं यह देसी किचन ट्रिक

दूध पर जमेगी मोटी और मलाईदार परत, बस उबालते समय अपनाएं यह देसी किचन ट्रिक

घर में अक्सर शिकायत रहती है कि बाजार या डेयरी से आने वाले दूध को उबालने के बाद भी उस पर पतली सी परत ही जमती है, जबकि हलवाई के यहां कड़ाही में मलाई की मोटी चादर दिखाई देती है। दूध पर गाढ़ी मलाई जमने का सीधा संबंध दूध में मौजूद फैट ग्लोब्यूल्स (वसा कणों) और प्रोटीन के ऊपर आने की प्रक्रिया से होता है। इसके लिए सबसे पहले सही बर्तन का चयन जरूरी है। हमेशा मोटे तले वाले चौड़े बर्तन या पतीले का इस्तेमाल करें। उबालने से पहले बर्तन के तले में एक से दो चम्मच सादा पानी डाल लें; ऐसा करने से दूध नीचे चिपकता नहीं है और जलने की गंध नहीं आती।

धीमी आंच का जादू: उफान आने के बाद तुरंत गैस बंद करने की न करें गलती

ज्यादातर लोग दूध में पहला उफान आते ही गैस बंद कर देते हैं, जिससे मलाई की परत पतली रह जाती है। हलवाई जैसी मोटी मलाई पाने के लिए जरूरी है कि जब दूध में पहला उबाल आ जाए, तो गैस की आंच को बिल्कुल धीमा कर दें। धीमी आंच पर दूध को कम से कम 5 से 8 मिनट तक उबलने दें। हल्की आंच पर लगातार पकने से दूध में मौजूद पानी की अतिरिक्त भाप धीरे-धीरे उड़ जाती है और फैट कण ऊपर की सतह पर तैरने लगते हैं। इस दौरान पतीले पर कोई भारी ढक्कन पूरी तरह से बंद न करें, बल्कि जालीदार छलनी का उपयोग करें ताकि भाप आसानी से बाहर निकल सके और सतह पर पानी की बूंदें न गिरें।

ठंडा करने का तरीका तय करता है मलाई की मोटाई और बनावट

उबालने के बाद दूध को ठंडा करने का चरण सबसे महत्वपूर्ण होता है। जब गैस बंद कर दें, तो दूध को किसी हवादार जगह पर जाली से ढककर कमरे के सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। गरम दूध को कभी भी सीधे फ्रिज में न रखें और न ही चम्मच से हिलाएं, क्योंकि हिलाने से ऊपर बनने वाली नाजुक परत टूट जाती है। जब दूध सामान्य तापमान पर आ जाए, तब इसे बिना हिलाए सावधानी से फ्रिज में रख दें। फ्रिज के ठंडे वातावरण में कम से कम 5 से 6 घंटे या पूरी रात रहने देने से वसा कण आपस में जम जाते हैं और अगली सुबह एक ठोस, रोटी जैसी मोटी मलाई की परत बनकर तैयार हो जाती है।

कच्चे फुल क्रीम दूध और सही स्टोरेज से पाएं बेहतरीन नतीजे

मलाई की गुणवत्ता इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप किस प्रकार के दूध का उपयोग कर रहे हैं। टोंड या डबल टोंड दूध के मुकाबले कच्चा फुल क्रीम दूध (विशेष रूप से भैंस का दूध) मलाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि आप पैकेज्ड पाश्चुरीकृत दूध इस्तेमाल करते हैं, तो भी यह धीमी आंच वाली तकनीक काफी हद तक बेहतर परिणाम देती है। निकाली गई मलाई को एयरटाइट कंटेनर में रखकर फ्रीजर में स्टोर करें, जिसका उपयोग बाद में दानेदार देसी घी, मक्खन या स्वादिष्ट मिठाइयां बनाने में आसानी से किया जा सकता है।