एक महीने में ₹7,510 सस्ता हुआ सोना, दिवाली-धनतेरस से पहले भारी गिरावट; क्या त्योहार तक और गिरेंगे दाम?
शादियों और त्योहारी सीजन की शुरुआत के बीच सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला बना हुआ है। बीते एक महीने के कारोबारी सत्रों पर नजर डालें तो 24 कैरेट शुद्ध सोने के दाम में लगभग ₹7,510 प्रति 10 ग्राम तक का बड़ा करेक्शन आ चुका है। अपने हालिया उच्चतम स्तरों से नीचे फिसलने के बाद घरेलू खुदरा बाजार में सोना काफी सस्ता हुआ है, जिससे धनतेरस और दिवाली पर सोने के सिक्के, बार और गहने खरीदने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं के चेहरे खिल उठे हैं। लंबे समय से रिकॉर्ड स्तर पर चल रहे भावों के कारण जो खरीदार बाजार से दूरी बनाए हुए थे, वे अब एक बार फिर ज्वेलरी शोरूम्स की ओर रुख करते दिखाई दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली और मजबूत डॉलर का दोहरा झटका
सोने के भाव में आई इस तेज गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय घटनाक्रम सबसे बड़ा कारण बनकर उभरे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर अपनाए गए सतर्क रुख और बॉन्ड यील्ड में आई मजबूती ने बुलियन मार्केट पर दबाव डाला है। इसके साथ ही, डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने की वजह से विदेशी निवेशकों ने कीमती धातुओं से मुनाफावसूली कर डॉलर और शेयर बाजारों में पूंजी लगाना शुरू कर दिया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर मजबूत होता है, तो गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने और चांदी की मांग में स्वाभाविक रूप से कमी आती है, जिसका सीधा असर भारत के घरेलू वायदा और हाजिर बाजार पर भी पड़ा है।
भू-राजनीतिक तनाव में तात्कालिक स्थिरता और मांग का असर
सोने की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सेफ-हेवन डिमांड की अहम भूमिका रही थी। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में मध्य पूर्व और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में कूटनीतिक वार्ताओं के चलते बाजार में जो तात्कालिक घबराहट थी, उसमें कुछ हद तक कमी आई है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत निवेशकों और हेज फंड्स ने सोने में जमा अपनी लंबी पोजीशन से मुनाफा समेटना शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी एक्सचेंजों पर आई इस तेज बिकवाली का असर भारत में आयात होने वाले सोने की लैंडिंग कॉस्ट पर भी पड़ा, जिससे घरेलू हाजिर बाजार में प्रति 10 ग्राम सोने के दाम में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई।
क्या दिवाली और धनतेरस तक और गिर सकते हैं सोने के दाम?
बाजार विश्लेषकों और कमोडिटी जानकारों का मानना है कि अल्पकालिक स्तर पर सोने में और थोड़ा तकनीकी करेक्शन संभव है, लेकिन दिवाली तक बहुत बड़ी गिरावट की संभावना सीमित नजर आ रही है। तकनीकी चार्ट्स के मुताबिक, एमसीएक्स पर सोने को महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों पर लगातार देखा जा रहा है। दिवाली और धनतेरस भारत में सोने की मांग के लिहाज से साल का सबसे बड़ा समय होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता देश है, और जैसे ही धनतेरस करीब आएगी, भौतिक मांग (फिजिकल डिमांड) में तेज उछाल देखने को मिलेगा। स्थानीय ज्वेलर्स और थोक व्यापारियों की लिवाली कीमतों को एक मजबूत सपोर्ट देगी, जिससे गिरावट की गुंजाइश सीमित हो सकती है।
खरीदार और निवेशक क्या करें: सही समय पर सही रणनीति
जो उपभोक्ता शादी-ब्याह या त्योहार के लिए आभूषण खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट खरीदारी का एक बेहतरीन अवसर है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि ग्राहकों को पूरे बजट का सोना एक साथ खरीदने के बजाय धीरे-धीरे किश्तों में खरीदारी करनी चाहिए, ताकि अगर त्योहार तक 500 से 1000 रुपये का और उतार-चढ़ाव आए तो उसका औसत लाभ मिल सके। वहीं, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वाले लंबी अवधि के निवेशकों को मौजूदा गिरावट को एक सुधारात्मक अवसर मानकर एसआईपी के जरिए अपनी होल्डिंग्स बढ़ानी चाहिए, क्योंकि लंबी अवधि में मुद्रास्फीति के खिलाफ सोना हमेशा एक सुरक्षित विकल्प साबित हुआ है।