12 क्रेन, 250 से ज्यादा कर्मचारी-मजदूर और 308 पहियों वाला ट्रेलर; भारी-भरकम रिएक्टर को उतारने का अद्भुत मेगा ऑपरेशन

12 क्रेन, 250 से ज्यादा कर्मचारी-मजदूर और 308 पहियों वाला ट्रेलर; भारी-भरकम रिएक्टर को उतारने का अद्भुत मेगा ऑपरेशन

औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का एक अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। रिफाइनरी और केमिकल कॉम्प्लेक्स के लिए तैयार किए गए सैकड़ों टन वजनी विशालकाय रिएक्टर को उतारने के लिए एक ऐसा महा-अभियान (Mega Operation) शुरू किया गया है, जिसकी भव्यता और तकनीकी जटिलता देखकर हर कोई हैरान है। इस भीमकाय उपकरण को उसके आधार स्थल (फाउंडेशन) तक सुरक्षित पहुंचाने और उतारने के लिए 12 आधुनिक हाइड्रोलिक क्रेन, 250 से अधिक कुशल इंजीनियर, भारी मशीनरी ऑपरेटर और तकनीकी मजदूरों की एक विशेष टीम दिन-रात जुटी हुई है। सबसे खास बात यह है कि इस भारी-भरकम रिएक्टर को सैकड़ों किलोमीटर की कठिन दूरी तय कराने के बाद 308 पहियों वाले अत्याधुनिक हाइड्रोलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर (Modular Hydraulic Trailer) पर टिकाकर कार्यस्थल तक पहुंचाया गया है, जहां अब इसे नीचे उतारने की जटिल प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

308 पहियों वाला हाइड्रोलिक ट्रेलर: वजन बांटने की अनूठी तकनीक

इस पूरे ऑपरेशन में सबसे बड़ा आकर्षण 308 पहियों से लैस विशाल ट्रेलर है। सामान्य सड़कों, पुलों और हाईवे पर इतने अत्यधिक वजन (Over-Dimensional Cargo - ODC) को ले जाना बिना विशेष तकनीक के असंभव होता है। यदि यह वजन सामान्य ट्रकों पर लाद दिया जाए, तो सड़क की सतह धंसने और पुलों के ढहने का खतरा पैदा हो जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए कंप्यूटर नियंत्रित हाइड्रोलिक सस्पेंशन वाले 308 पहियों के मॉड्यूल को आपस में जोड़ा गया। यह प्रणाली रिएक्टर के विशालकाय भार को सभी पहियों पर समान रूप से वितरित (Equal Weight Distribution) करती है। ट्रेलर के प्रत्येक एक्सल को स्वतंत्र रूप से 360 डिग्री तक घुमाया जा सकता है, जिससे तंग मोड़ों और संकरे औद्योगिक रास्तों पर भी इस विशालकाय ढांचे को मिलीमीटर की सटीकता के साथ आगे बढ़ाया गया।

12 भारी क्रेनों का सिंक्रोनाइज्ड ऑपरेशन: संतुलन बिगड़ा तो हो सकता है बड़ा हादसा

ट्रेलर से रिएक्टर को उठाकर उसके तय फाउंडेशन पर स्थापित करना इंजीनियरिंग का सबसे नाजुक चरण होता है। इसके लिए विभिन्न क्षमताओं (200 टन से लेकर 800 टन तक) की कुल 12 हाई-कैपेसिटी क्रेनों को तैनात किया गया है। क्रेन ऑपरेशंस में सबसे बड़ी चुनौती सभी क्रेनों की लिफ्टिंग स्पीड, एंगल और खिंचाव में पूर्ण तालमेल (Tandem Lifting Synchronization) बनाए रखना है। यदि किसी एक क्रेन ने भार उठाने में एक सेकंड की भी देरी की या उसका कोण जरा सा भी भटका, तो संतुलन बिगड़ने से क्रेन के पलटने या रिएक्टर के गिरने का भयावह खतरा हो सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए क्रेन के केबिन में लगे डिजिटल लोड इंडिकेटर्स, लेजर गाइडेड सेंसर और मुख्य नियंत्रण कक्ष में बैठे चीफ रिगिंग इंजीनियर्स लगातार रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए पल-पल का तालमेल बिठा रहे हैं।

250 से अधिक प्रोफेशनल्स की फौज: शिफ्टों में काम कर रहे एक्सपर्ट्स

इस महा-अभियान की सफलता के पीछे 250 से ज्यादा लोगों की अनुशासित टीम का अथक परिश्रम है। इस दल में जर्मनी और भारत के शीर्ष रिगिंग स्पेशलिस्ट, स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स, हाइड्रोलिक तकनीशियन, वेल्डर और अनुभवी ग्राउंड रिगर्स शामिल हैं। हर कर्मचारी को इस ऑपरेशन के लिए विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है। कार्यस्थल के चारों ओर 500 मीटर के दायरे को जीरो-टोलरेंस सेफ्टी जोन घोषित किया गया है, जहां अनाधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। हवा की गति मापने के लिए एनेमोमीटर लगाए गए हैं, क्योंकि तेज हवाओं के झोंकों के दौरान इतने बड़े ढांचे को क्रेन से उठाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

सुरक्षित स्थापना के बाद शुरू होगा प्रोजेक्ट का अगला चरण

मल्टी-एक्सल ट्रेलर से रिएक्टर को पहले हाइड्रोलिक जैक और स्टैकिंग मैकेनिज्म की मदद से धीरे-धीरे उठाया जाता है, जिसके बाद क्रेनें इसे थामती हैं और ट्रेलर को नीचे से सावधानीपूर्वक बाहर निकाल लिया जाता है। इसके बाद सभी क्रेनें रिएक्टर को धीरे-धीरे नीचे लाकर उसके कंक्रीट फाउंडेशन और रीइनफोर्स्ड बोल्ट्स पर स्थिर करती हैं। इस रिएक्टर की सफल अनलोडिंग और स्थापना के साथ ही रिफाइनरी विस्तार परियोजना अपने सबसे महत्वपूर्ण मील के पत्थर को पार कर लेगी, जिससे आगामी महीनों में उच्च क्षमता के उत्पादन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो जाएगा।