'विधानसभा उड़ा दिया': AI से डीपफेक वीडियो बनाकर फंसा बिहार का युवक, हजरत अली को पुलिस ने भेजा जेल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला बिहार की राजधानी पटना से सामने आया है। राज्य के अति-सुरक्षित परिसर 'बिहार विधानसभा' को विस्फोट से उड़ाए जाने का एक फर्जी और भ्रामक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले युवक को पुलिस ने दबोच लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले हजरत अली (22) के रूप में हुई है। पटना पुलिस की साइबर सेल और कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
क्या था वायरल वीडियो में?
जानकारी के अनुसार, आरोपी हजरत अली ने सोशल मीडिया पर लाइक, शेयर और फॉलोअर्स जुटाने के चक्कर में एआई जनरेटेड टूल्स का इस्तेमाल करके एक बेहद रियलिस्टिक (सजीव) वीडियो तैयार किया था। इस वीडियो में दिखाया गया था कि बिहार विधानसभा के मुख्य गुंबद और इमारत के भीतर एक शक्तिशाली बम धमाका हुआ है, जिसमें से भीषण आग की लपटें और काला धुआं उठ रहा है। वीडियो के बैकग्राउंड में सायरन की आवाजें थीं और कैप्शन लिखा गया था— "विधानसभा उड़ा दिया गया", जिसके साथ हैशटैग लगाकर इसे बड़ी आतंकी घटना की तरह पेश किया गया था। यह वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक पर तेजी से वायरल होने लगा, जिससे आम जनता और सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मच गई।
साइबर सेल ने 24 घंटे के भीतर ट्रेस किया आईपी एड्रेस
जैसे ही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल की नजर इस भ्रामक और संवेदनशील क्लिप पर पड़ी, पुलिस मुख्यालय ने तुरंत जांच के आदेश दिए। पटना साइबर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून की गंभीर धाराओं के तहत सार्वजनिक शांति भंग करने, झूठी अफवाह फैलाने और राज्य की संप्रभुता व सुरक्षा को चुनौती देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया। डिजिटल फॉरेंसिक टीम ने वीडियो अपलोड करने वाले यूजर के आईपी एड्रेस और सोशल मीडिया प्रोफाइल की पड़ताल की, जिसके बाद आरोपी हजरत अली के ठिकाने का पता चला और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में कबूला जुर्म: 'व्यूज और रील के लिए किया था कांड'
पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी हजरत अली ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि वह सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएटर बनने की कोशिश कर रहा था और रील्स पर व्यूज बढ़ाने के लिए उसने जनरेटिव एआई ऐप की मदद से इस वीडियो को तैयार किया था। उसका दावा था कि उसका कोई आतंकी इरादा नहीं था, बल्कि वह केवल सनसनी फैलाकर ट्रेंडिंग में आना चाहता था। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा प्रतिष्ठानों और संवैधानिक भवनों से जुड़ी फर्जी व दहशत फैलाने वाली किसी भी सामग्री को साधारण शरारत मानकर माफ नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया यूजर्स को पुलिस की सख्त चेतावनी
पटना पुलिस ने आम नागरिकों और युवाओं को सख्त हिदायत दी है कि सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स या व्यूज पाने की चाहत में किसी भी प्रकार की भड़काऊ, देश विरोधी, फर्जी या सुरक्षा से जुड़ी भ्रामक एआई सामग्री (डीपफेक) न बनाएं और न ही शेयर करें। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर हर गतिविधि की 24 घंटे निगरानी की जा रही है और गैर-जिम्मेदाराना हरकत करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में सीधे जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।