'तुम चैन से कैसे सो सकते हो जब लोग जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं'; मुंबई में बिगड़ते प्रदूषण पर भड़का बॉम्बे हाईकोर्ट

'तुम चैन से कैसे सो सकते हो जब लोग जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं'; मुंबई में बिगड़ते प्रदूषण पर भड़का बॉम्बे हाईकोर्ट

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और आसपास के उपनगरीय इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख रुख अपनाया है। शहर में बढ़ते प्रदूषण, चारों तरफ फैली निर्माण धूल और घटते एयर क्वालिटी इंडेक्स को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताया। कोर्ट ने अधिकारियों की सुस्ती और उदासीनता पर तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा, "जब शहर का आम नागरिक, बच्चे और बुजुर्ग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, तो प्रशासनिक पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी रात को चैन की नींद कैसे सो सकते हैं?"

'दिशानिर्देश केवल कागजों पर, जमीन पर कुछ नहीं दिखता': अदालत की दो टूक

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालत द्वारा प्रदूषण नियंत्रण को लेकर पहले भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका कोई वास्तविक असर देखने को नहीं मिल रहा है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा:

  • निर्माण स्थलों पर लापरवाही: मुंबई में चल रहे सैकड़ों बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स, मेट्रो और सड़क निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के बुनियादी नियमों (जैसे ग्रीन नेट लगाना, नियमित पानी का छिड़काव और ढके हुए ट्रकों में मलबा ले जाना) का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

  • निगरानी का अभाव: बीएमसी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केवल कागजी नोटिस जारी करने तक सीमित हैं। दोषी बिल्डरों और ठेकेदारों के काम रोकने या उन पर भारी जुर्माना लगाने जैसी कोई सख्त नजीर पेश नहीं की जा रही है।

  • स्वास्थ्य संकट की अनदेखी: कोर्ट ने टिप्पणी की कि हवा में घुले पीएम 2.5 और पीएम 10 के उच्च स्तर की वजह से अस्पतालों में सांस, दमा और फेफड़ों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है, जिसे नजरअंदाज करना नागरिकों के मौलिक स्वास्थ्य अधिकारों का हनन है।

बीएमसी और एमपीसीबी को विस्तृत एक्शन प्लान पेश करने का आदेश

अदालत ने बीएमसी कमिश्नर और एमपीसीबी के शीर्ष अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए एक समयबद्ध और व्यावहारिक कार्ययोजना (Comprehensive Action Plan) दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि:

  1. शहर के सभी निर्माण स्थलों की साप्ताहिक औचक जांच (Surprise Inspection) की जाए और नियम तोड़ने वाले साइट्स को तुरंत सील किया जाए।

  2. प्रमुख सड़कों पर स्मॉग गन, एंटी-स्मॉग वाहन और पानी के छिड़काव की व्यवस्था को युद्धस्तर पर दोगुना किया जाए।

  3. कचरा जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए वार्ड स्तर पर विशेष उड़न दस्तों का गठन हो।

त्योहारी सीजन से पहले स्थिति और बिगड़ने की आशंका

पर्यावरण विशेषज्ञों और वकीलों ने पीठ के समक्ष दलील रखी कि आगामी त्योहारी सीजन, दीपावली और सर्दियों के मौसमी बदलाव के चलते हवा की गति धीमी हो जाएगी, जिससे स्थिति दिल्ली-एनसीआर जैसी गंभीर हो सकती है। अगर अभी से आपातकालीन स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक ठोस परिणाम जमीन पर दिखाई नहीं दिए, तो संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों के खिलाफ अवमानना और सीधी प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी।