अब आयुष्मान भारत योजना में होंगे हार्ट, लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट, सरकार ने गरीबों के महंगे ऑपरेशनों को मुफ्त करने का तैयार

अब आयुष्मान भारत योजना में होंगे हार्ट, लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट, सरकार ने गरीबों के महंगे ऑपरेशनों को मुफ्त करने का तैयार

देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी एक ऐसी ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है, जो हजारों लोगों को नया जीवन दे सकती है। केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयासों से संचालित आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के दायरे को अब तक के सबसे बड़े स्तर पर बढ़ाने की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। अब तक इस फ्लैगशिप हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के तहत सामान्य सर्जरी, कैंसर के कई उपचार, डायलिसिस और हार्ट स्टेंटिंग जैसी सेवाएं प्रमुखता से कवर की जाती रही हैं, लेकिन ऑर्गन फेलियर जैसी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए अंग प्रत्यारोपण हमेशा से एक बड़ा आर्थिक संकट रहा है। अस्पतालों में दिल, लिवर या फेफड़े बदलने का खर्च ₹15 लाख से लेकर ₹35 लाख तक चला जाता है, जिसे किसी भी सामान्य परिवार के लिए वहन करना लगभग नामुमकिन होता है। इसी बड़ी खाई को पाटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट को योजना के नए पैकेज में शामिल करने की उच्च स्तरीय तैयारी पूरी कर ली है।

आयुष्मान भारत योजना में ऑर्गन ट्रांसप्लांट शामिल करने की सरकारी रणनीति

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल बोर्ड की एक उच्च स्तरीय समिति ने हाल ही में सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि देश में क्रॉनिक लिवर डिजीज, एंड-स्टेज हार्ट फेलियर और फेफड़ों की फाइब्रोसिस से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अंग प्रत्यारोपण की जरूरत वाले अधिकांश मरीज आर्थिक तंगी के कारण समय पर इलाज नहीं करा पाते और अपनी जान गंवा देते हैं। इस मानवीय संकट को गंभीरता से लेते हुए सरकार आयुष्मान भारत के बेनिफिट पैकेज में हार्ट ट्रांसप्लांट, लिवर ट्रांसप्लांट और लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए अलग से विशेष कोड और पैकेज रेट निर्धारित करने पर तेजी से काम कर रही है। इसके तहत केवल सर्जरी का खर्च ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन के बाद मरीज को जीवन भर दी जाने वाली महंगी इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं के खर्च को भी इस योजना का हिस्सा बनाने पर गहन विमर्श चल रहा है।

महंगे प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर से मुक्त होंगे गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज

भारत में निजी सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों में लिवर ट्रांसप्लांटेशन का सामान्य खर्च ₹20 लाख से ₹30 लाख के बीच बैठता है, जबकि फेफड़े और दिल के ट्रांसप्लांट का खर्च ₹25 लाख से ₹40 लाख तक पहुंच जाता है। इसके अलावा सर्जरी से पहले डोनर और रिसीवर की विस्तृत जांच और सर्जरी के बाद आईसीयू की देखरेख का खर्च अलग से जुड़ता है। आयुष्मान योजना के तहत वर्तमान में ₹5 लाख प्रति परिवार प्रति वर्ष का वित्तीय कवर मिलता है, वहीं कई राज्यों ने इसमें टॉप-अप देकर इसे ₹10 लाख तक बढ़ाया है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसी अति-विशिष्ट और अत्यंत महंगी प्रक्रियाओं के लिए सरकार एक विशेष क्रिटिकल केयर पूल या हाई-कॉस्ट इलनेस फंड तैयार करने पर विचार कर रही है, ताकि ₹5 लाख से अधिक की लागत आने पर भी मरीज के इलाज में फंड की कमी आड़े न आए। यह कदम सीधे तौर पर देश के उस बड़े तबके को आर्थिक तबाही से बचाएगा, जो अपने परिजनों की जान बचाने के लिए जमीन-जायदाद और घर तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

शीर्ष सरकारी और निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों का बनेगा एकीकृत नेटवर्क

इस नई पहल को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सूचीबद्ध (Empaneled) अस्पतालों की तकनीकी और मेडिकल क्षमता की सख्त समीक्षा की जा रही है। नई दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS), पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, लखनऊ के एसजीपीजीआई जैसे प्रमुख सरकारी संस्थानों के साथ-साथ देश के चुनिंदा जेसीआई और एनएबीएच मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। सरकार की योजना है कि हर राज्य के टियर-1 और टियर-2 शहरों में ऐसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस चिन्हित किए जाएं, जिनके पास आधुनिक मॉड्यूलर ओटी, अनुभवी ट्रांसप्लांट सर्जन और 24 घंटे काम करने वाली एडवांस आईसीयू टीम उपलब्ध हो। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से आने वाले गंभीर मरीजों को अपने राज्य या नजदीकी शहर में ही विश्वस्तरीय ट्रांसप्लांट सेवाएं बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

अंगदान की प्रक्रिया और नेशनल ऑर्गन रजिस्ट्री को मिलेगा डिजिटल संबल

ट्रांसप्लांट सर्जरी की सुविधा देना तब तक पूरी तरह कारगर नहीं हो सकता जब तक कि समय पर अंग उपलब्ध न हों। भारत में अंगदान की दर दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम है, जिसके चलते हर साल हजारों मरीज सिर्फ इंतजार करते हुए दम तोड़ देते हैं। सरकार इस योजना को नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO), रीजनल (ROTTO) और स्टेट लेवल (SOTTO) की व्यवस्थाओं के साथ पूरी तरह डिजिटल रूप से इंटीग्रेट करने जा रही है। आयुष्मान पोर्टल को राष्ट्रीय अंगदान रजिस्ट्री से सीधा जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी अंग के डोनेशन की स्थिति में जरूरतमंद गरीब मरीज का नाम प्राथमिकता सूची में पारदर्शी तरीके से सामने आ सके। इस प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म होगी और हर पात्र नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मेरिट व मेडिकल इमरजेंसी के आधार पर अंग मिलने का कानूनी हक सुरक्षित होगा।

सर्जरी के बाद जीवन रक्षक दवाओं और रिकवरी का भी रखा जाएगा पूरा ध्यान

ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती केवल ऑपरेशन की सफलता तक सीमित नहीं होती, बल्कि ऑपरेशन के बाद मरीज का शरीर उस नए अंग को स्वीकार करे, इसके लिए इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं जिंदगी भर खानी पड़ती हैं। इन दवाओं का मासिक खर्च ₹10,000 से लेकर ₹25,000 तक पहुंच जाता है, जो एक गरीब परिवार के लिए जीवन भर जुटाना नामुमकिन सा होता है। यदि मरीज दवाएं बंद कर दे तो ऑर्गन रिजेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और जान जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर सरकार आयुष्मान पैकेज में 'पोस्ट-ट्रांसप्लांट ओपीडी केयर' को अनिवार्य रूप से शामिल करने जा रही है। इसके तहत डिस्चार्ज होने के बाद के नियमित फॉलो-अप टेस्ट, बायोप्सी और लाइफ-सेविंग मेडिसिन को पैकेज के तहत कवर किया जाएगा, ताकि सर्जरी के बाद भी मरीज स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सके।

स्वास्थ्य क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी सोशल सिक्योरिटी क्रांति बनने की ओर कदम

भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में जहां स्वास्थ्य खर्च की वजह से हर साल लाखों परिवार गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं, वहां हार्ट, लिवर और फेफड़ों जैसे जटिल अंगों के प्रत्यारोपण को सरकारी योजना के तहत मुफ्त करना किसी ऐतिहासिक क्रांति से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीतिगत फैसले के लागू होने से न केवल चिकित्सा क्षेत्र में भारत की साख पूरी दुनिया में मजबूत होगी, बल्कि आम नागरिक के भीतर सरकार और जन-कल्याणकारी नीतियों के प्रति विश्वास और गहरा होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही इस संबंध में सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक कर अंतिम एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) और पैकेज दरों की आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है। यह फैसला निश्चित रूप से देश के करोड़ों वंचित नागरिकों को यह भरोसा दिलाएगा कि गंभीर से गंभीर बीमारी में भी पैसे की कमी उनकी जिंदगी की राह में रोड़ा नहीं बनेगी।