Palamu Mustard Oil Incident: मिलावटी सरसों का तेल कितना खतरनाक, जिसने झारखंड में छीन लीं 6 लोगों की सांसें? जानें क्या है 'एपिडेमिक ड्रॉप्सी'

Palamu Mustard Oil Incident: मिलावटी सरसों का तेल कितना खतरनाक, जिसने झारखंड में छीन लीं 6 लोगों की सांसें? जानें क्या है 'एपिडेमिक ड्रॉप्सी'

रांची/नई दिल्ली: बाजार में मुनाफाखोरी के लिए खाद्य पदार्थों में मिलावट (Food Adulteration) का धंधा किस कदर इंसानी जिंदगी पर भारी पड़ सकता है, इसका एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला झारखंड से सामने आया है। झारखंड के पलामू जिले के सिक्का गांव में मिलावटी सरसों के तेल (Mustard Oil Adulteration) का सेवन करने से एक ही हंसते-खेलते परिवार के छह सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई है। रांची की स्टेट फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन सभी मौतों की वजह कोई रहस्यमयी बीमारी नहीं, बल्कि मिलावटी तेल के कारण होने वाली 'एपिडेमिक ड्रॉप्सी' (Epidemic Dropsy) नामक जानलेवा बीमारी थी।

कैसे एक-एक कर उजड़ गया पूरा परिवार?

पलामू जिले के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, पीड़ित परिवार अनजाने में जिस सरसों के तेल का इस्तेमाल खाना बनाने में कर रहा था, उसमें आर्जिमोन मैक्सिकाना (Argemone Mexicana) यानी 'सत्यानाशी' या 'पीले धतूरे' के तेल की मिलावट थी।

इस धीमे जहर ने पूरे परिवार को अपनी चपेट में ले लिया:

  • 19 जून: परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की सबसे पहले मौत हुई।

  • 20 जून: अगले ही दिन उनकी बेटी बबिता कुमारी ने दम तोड़ दिया।

  • 26 से 29 जून: पिता और बहन की मौत की खबर सुनकर बेंगलुरु से लौटे बेटे अनुज महतो की छोटी बहन इंदु कुमारी (26 जून), पत्नी श्वेता देवी (28 जून) और भाई नकुल महतो (29 जून) की भी मौत हो गई।

  • 8 जुलाई: अंत में अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहीं अनुज की मां लाखो देवी ने भी दम तोड़ दिया।

आर्जिमोन का मिलावटी तेल कितना खतरनाक और क्या है एपिडेमिक ड्रॉप्सी?

सरसों के बीज और आर्जिमोन (सत्यानाशी) के खरपतवार वाले बीज दिखने में काफी हद तक एक जैसे (काले और गोल) होते हैं। सस्ते मुनाफे के चक्कर में मिलावटखोर सरसों के साथ इसे भी पेर देते हैं।

  • सैन्गुइनरीन टॉक्सिन (Sanguinarine): आर्जिमोन के तेल में 'सैन्गुइनरीन' नाम का एक अत्यंत जहरीला केमिकल (एल्कलॉइड) पाया जाता है। जब यह शरीर में प्रवेश करता है, तो कोशिकाओं के स्तर पर जहर फैलाना शुरू कर देता है।

  • अंगों का फेल होना (Organ Damage): यह जहरीला तत्व सीधे तौर पर शरीर के सबसे नाजुक अंगों जैसे दिल (Heart), लिवर (Liver) और किडनी (Kidney) को गंभीर रूप से डैमेज करता है।

  • एपिडेमिक ड्रॉप्सी के लक्षण: इस बीमारी में शरीर के अंगों और ऊतकों में पानी भर जाता है जिससे भारी सूजन (Edema) आ जाती है। इसके अलावा, अचानक दिल का दौरा पड़ना (Heart Failure), पेट में गंभीर संक्रमण, सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ और आंखों में ग्लूकोमा जैसी समस्याएं हो जाती हैं, जिससे मरीज की तड़पकर मौत हो जाती है।

घर पर कैसे करें शुद्ध और मिलावटी सरसों तेल की पहचान?

इस तरह के जानलेवा हादसों से बचने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय है। आप इन घरेलू तरीकों से तेल की शुद्धता परख सकते हैं:

  • तीखी खुशबू (Pungent Aroma): शुद्ध सरसों के तेल में प्राकृतिक रूप से 'एलील आइसोथियोसाइनेट' के कारण एक बेहद तीखी गंध होती है, जो नाक में तेज झनझनाहट और आंखों में पानी ला देती है। अगर तेल से कोई महक नहीं आ रही है या अजीब सी केमिकल जैसी गंध है, तो वह मिलावटी हो सकता है।

  • रंग और गाढ़ापन (Color & Viscosity): असली सरसों का तेल गहरा पीला और काफी गाढ़ा होता है। यदि तेल बहुत ज्यादा साफ, हल्का या पानी की तरह पतला दिख रहा है, तो उसमें आर्जिमोन या राइस ब्रान/मिनरल ऑयल की मिलावट की आशंका बढ़ जाती है।

  • रेफ्रिजरेटर टेस्ट (Alternative Test): थोड़े से सरसों के तेल को एक कटोरी में लेकर फ्रिज में रख दें। यदि तेल में मिलावट होगी, तो उसमें सफेद रंग की परत या मिलावटी तेल के तत्व अलग से जमने लगेंगे, जबकि शुद्ध तेल पूरी तरह जमेगा नहीं।

Editorial Note: खुले तेल या बिना ब्रांड वाले लोकल वेंडर्स से सरसों का तेल खरीदने से बचें। हमेशा FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) और एगमार्क (Agmark) प्रमाणित पैक्ड तेल का ही इस्तेमाल करें।

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