नींद पूरी न होने पर भी दिमाग को सुपरफास्ट रखेंगी ये 2 खास ट्रिक्स, नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

नींद पूरी न होने पर भी दिमाग को सुपरफास्ट रखेंगी ये 2 खास ट्रिक्स, नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

आज की आधुनिक जीवनशैली, ऑफिस के लंबे शिफ्ट्स, देर रात तक स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहने और अनियमित दिनचर्या के कारण अधूरी नींद एक आम समस्या बन चुकी है। अक्सर यह देखा जाता है कि जब रात को नींद पूरी नहीं होती, तो अगले दिन सुबह उठते ही दिमाग सुस्त पड़ जाता है, सिर भारी रहता है और छोटी-छोटी बातें जैसे चाबी कहां रखी, किसी का नाम या कोई जरूरी काम भूलने की आदत बढ़ जाती है। नींद की कमी सीधे तौर पर हमारी सोचने-समझने और नई जानकारियों को दिमाग में सहेजने की क्षमता को प्रभावित करती है। लेकिन अगर किसी जरूरी काम या परीक्षा के चलते आपको देर रात तक जागना पड़ जाए, तो क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे याददाश्त कमजोर न पड़े? प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' में प्रकाशित एक ताजा और क्रांतिकारी रिसर्च में इस सवाल का बेहद प्रभावी समाधान निकाला गया है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि अगर आपकी नींद पूरी नहीं भी हुई है, तो भी महज 20 मिनट की एक आसान गतिविधि या छोटी झपकी आपके दिमाग को रीसेट करके याददाश्त को पहले जैसा तेज बनाए रख सकती है।

30 घंटे जागने के बाद भी दिमाग रहेगा चौकन्ना: 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज ने दिखाया कमाल

वैज्ञानिक शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह चौंकाने वाला निष्कर्ष सामने आया कि लगातार 30 घंटे तक बिना सोए जागने के बावजूद अगर कोई व्यक्ति केवल 20 मिनट के लिए हल्की एरोबिक एक्सरसाइज (जैसे जॉगिंग, ब्रिस्क वॉक या साइकिलिंग) कर लेता है, तो उसके दिमाग की नई यादों को स्टोर करने की क्षमता में जबर्दस्त सुधार दर्ज किया जाता है। रिसर्च में यह भी पाया गया कि अगर किसी के पास एक्सरसाइज करने का समय नहीं है और वह केवल 90 मिनट की एक गहरी नैप (दिन की झपकी) ले लेता है, तो उसका प्रभाव भी ठीक एक्सरसाइज जितना ही शक्तिशाली साबित होता है। इस विशेष वैज्ञानिक परीक्षण में 18 से 35 वर्ष के 53 पूरी तरह स्वस्थ युवाओं को शामिल किया गया था। इन सभी प्रतिभागियों को शोध के दौरान लगातार 30 घंटे तक पूरी तरह जगाए रखा गया, जिससे उनके शरीर और दिमाग पर नींद की गंभीर कमी का वास्तविक दबाव बन सके।

तीन ग्रुप्स पर हुआ अनूठा मेमोरी टेस्ट: एक्सरसाइज और नैप लेने वालों का स्कोर रहा सबसे आगे

30 घंटे की लंबी अनिद्रा की स्थिति के बाद शोधकर्ताओं ने इन 53 लोगों को तीन अलग-अलग समूहों में विभाजित कर दिया। पहले ग्रुप को 20 मिनट तक हल्की एरोबिक एक्सरसाइज करने को कहा गया। दूसरे ग्रुप को 90 मिनट की आरामदायक नींद यानी नैप लेने की अनुमति दी गई। वहीं तीसरे नियंत्रण समूह (कंट्रोल ग्रुप) के लोगों को केवल एक जगह स्थिर एक्सरसाइज बाइक पर बैठा दिया गया, लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार की शारीरिक हलचल या एक्सरसाइज करने से रोक दिया गया। इसके तुरंत बाद सभी प्रतिभागियों की मेमोरी क्षमता जांचने के लिए एक जटिल 'पिक्चर रिकॉग्निशन टेस्ट' कराया गया, जिसमें उन्हें पहले दिखाई गई छवियों को दोबारा पहचानना था। इस परीक्षण के नतीजे हैरान करने वाले रहे। 20 मिनट एक्सरसाइज करने वाले ग्रुप ने 56 प्रतिशत सटीकता के साथ तस्वीरें सही पहचानीं, जबकि 90 मिनट की नैप लेने वाले ग्रुप का स्कोर 57 प्रतिशत रहा। इसके उलट, जिस तीसरे ग्रुप ने न तो एक्सरसाइज की और न ही झपकी ली, उसका स्कोर गिरकर मात्र 46 प्रतिशत पर अटक गया। यह साफ दिखाता है कि नींद न मिलने की स्थिति में भी शारीरिक सक्रियता और पावर नैप याददाश्त को बचाने में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं।

ईईजी जांच में खुला दिमाग का राज: थकान मिटाने और नई सूचनाएं सहेजने का अलग-अलग मैकेनिज्म

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों के मस्तिष्क की गतिविधियों को समझने के लिए इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राम (EEG) जांच का सहारा लिया। इस न्यूरोलॉजिकल जांच से यह भेद खुला कि एक्सरसाइज और नैप दोनों भले ही एक जैसा परिणाम देते हैं, लेकिन मस्तिष्क के भीतर उनके काम करने का तरीका बिल्कुल अलग होता है। 90 मिनट की झपकी लेने से दिमाग के न्यूरॉन्स को आराम मिला, जिससे मानसिक थकान (मेंटल फटीग) तुरंत खत्म हो गई और दिमाग की ओवरऑल प्रोसेसिंग परफॉर्मेंस सुधर गई। वहीं दूसरी ओर, 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज ने शरीर में रक्त प्रवाह और मस्तिष्क में ऑक्सीजन की आपूर्ति को तेजी से बढ़ा दिया। इससे दिमाग के हिप्पोकैम्पस क्षेत्र में नई जानकारियों और डेटा को प्रोसेस व एनकोड करने की जैविक क्षमता में सीधा सुधार हुआ। यद्यपि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि यह शोध अभी नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में किया गया है और दैनिक जीवन की जटिलताओं पर इसके और भी विस्तृत क्लिनिकल ट्रायल किए जाने बाकी हैं।

डीप Non-REM और REM नींद का महत्व: अधूरी नींद से ब्रेन फॉग और डिप्रेशन का मंडराता है खतरा

मानव शरीर में नींद केवल आराम का जरिया नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क की मरम्मत की एक जटिल जैविक प्रक्रिया है। न्यूरोलॉजिस्ट्स के अनुसार, जब हम गहरी 'Non-REM' नींद में होते हैं, तब हमारा मस्तिष्क दिन भर सीखी गई बातों और यादों को स्थायी मेमोरी बैंक में ट्रांसफर करता है। वहीं दूसरी तरफ, 'REM' (रैपिड आई मूवमेंट) नींद हमारी भावनाओं और मानसिक संतुलन को स्थिर रखने का काम करती है। यदि कोई व्यक्ति लगातार अपनी नींद की बलि चढ़ाता है, तो उसे क्रॉनिक ब्रेन फॉग, लगातार भारीपन, सिरदर्द, गंभीर चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता और यहां तक कि डिप्रेशन व एंग्जायटी जैसी मानसिक बीमारियों का शिकार होना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जो लोग नाइट शिफ्ट या बीपीओ में काम करते हैं, वे ड्यूटी के दौरान 15 से 20 मिनट की छोटी पावर नैप लेकर अपनी ऊर्जा बहाल रख सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह सख्त चेतावनी भी दी है कि एक्सरसाइज या झपकी केवल आपातकालीन बचाव हो सकते हैं; ये कभी भी रोजमर्रा की अनिवार्य 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक नींद का स्थायी विकल्प नहीं बन सकते।