ऑवरग्लास फिगर की चाहत में पसलियां तुड़वा रहीं महिलाएं, जानिए कितनी जानलेवा है रिब मॉडलिंग और रिमूवल सर्जरी

ऑवरग्लास फिगर की चाहत में पसलियां तुड़वा रहीं महिलाएं, जानिए कितनी जानलेवा है रिब मॉडलिंग और रिमूवल सर्जरी

दुनिया भर में परफेक्ट बॉडी शेप और 'वास्प वेस्ट' यानी मधुमक्खी जैसी पतली कमर पाने का जुनून इस हद तक बढ़ चुका है कि महिलाएं अपनी प्राकृतिक शारीरिक बनावट के साथ जानलेवा छेड़छाड़ करने से भी नहीं हिचक रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर फिल्टर की गई तस्वीरों, कर्दाशियां जैसी सेलिब्रिटीज के ऑवरग्लास बॉडी ट्रेंड और तथाकथित 'बार्बी लुक' ने युवतियों के बीच बॉडी डिस्मॉर्फिया को हवा दी है। केवल डाइट और घंटों जिम में पसीना बहाकर शरीर के एक खास हिस्से यानी कमर को अत्यधिक संकरा नहीं किया जा सकता, क्योंकि हड्डियों का ढांचा आनुवंशिक होता है। इसी प्राकृतिक सीमा को जबरन तोड़ने के लिए अब महिलाएं 'रिब मॉडलिंग' और 'रिब रिमूवल' जैसी बेहद दर्दनाक और जटिल कॉस्मेटिक सर्जरीज का सहारा ले रही हैं।

क्या है रिब रिमूवल और रिब मॉडलिंग सर्जरी: शरीर के ढांचे से छेड़छाड़

मानव शरीर में कुल 12 जोड़ी यानी 24 पसलियां होती हैं, जो फेफड़ों, दिल, लिवर, तिल्ली और किडनी जैसे अतिसंवेदनशील अंगों को बाहरी चोट से बचाती हैं। इनमें नीचे की 11वीं और 12वीं जोड़ी को 'फ्लोटिंग रिब्स' (तैरती हुई पसलियां) कहा जाता है, क्योंकि वे आगे की तरफ ब्रेस्टबोन यानी स्टर्नम से नहीं जुड़ी होती हैं। रिब रिमूवल सर्जरी में जनरल एनेस्थीसिया देकर पीठ के निचले हिस्से में चीरा लगाया जाता है और इन 11वीं और 12वीं पसलियों को काटकर शरीर से पूरी तरह निकाल दिया जाता है। वहीं, इसके नए विकल्प के रूप में पेश की जा रही 'रिब मॉडलिंग' तकनीक में पसलियों को पूरी तरह निकाला नहीं जाता, बल्कि अल्ट्रासोनिक टूल्स या खास मेडिकल उपकरणों से पसलियों की हड्डियों को आंशिक रूप से तोड़ा या मोड़ा जाता है और फिर मरीज को कई महीनों तक सख्त मेडिकल कोर्सेट पहनने के लिए कहा जाता है ताकि हड्डियां अंदर की ओर मुड़कर जुड़ें और कमर संकरी दिखे।

आंतरिक अंगों की सुरक्षा दीवार खत्म: क्या हैं इसके सबसे बड़े जोखिम

चिकित्सा विशेषज्ञ और प्लास्टिक सर्जन इस सर्जरी को गैर-जरूरी और बेहद जोखिम भरा मानते हैं। पसलियों का मुख्य कार्य छाती और पेट के ऊपरी अंगों को सुरक्षा कवच प्रदान करना है। जब 11वीं और 12वीं पसलियां हटा दी जाती हैं, तो पीछे की तरफ मौजूद दोनों किडनियां (गुर्दे), लिवर का निचला हिस्सा और प्लीहा (तिल्ली) सीधे बाहरी आघात के संपर्क में आ जाते हैं। एक सामान्य सा गिरना, सड़क पर झटका लगना या खेलकूद के दौरान पेट पर लगा हल्का सा मुक्का भी इन अंदरूनी अंगों को सीधे चोट पहुंचा सकता है, जिससे अंदरूनी रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) और अंग फेल होने का खतरा पैदा हो जाता है। प्रकृति ने शरीर में किसी भी हड्डी को बिना कारण नहीं बनाया है, और सुरक्षात्मक हड्डियों को हटाने का यह कदम जीवनभर के लिए भारी पड़ सकता है।

सर्जरी टेबल से लेकर जिंदगी भर के दर्द तक: फेफड़े फटने का खतरा

रिब रिमूवल और रीशेपिंग सर्जरी की प्रक्रिया अपने आप में बेहद नाजुक होती है। पसलियां फेफड़ों की बाहरी झिल्ली यानी प्लूरा के बेहद करीब स्थित होती हैं। सर्जरी के दौरान जरा सी भी चूक होने पर फेफड़ों की झिल्ली कट सकती है, जिससे छाती की गुहा में हवा या खून भर सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'न्यूमोथोरैक्स' या 'हीमोथोरैक्स' कहा जाता है। यह एक जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें मरीज की सांस तुरंत उखड़ सकती है और आपातकालीन वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है। इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी के पास से गुजरने वाली नसों को नुकसान पहुंचने का स्थायी खतरा बना रहता है, जिसके परिणामस्वरूप कमर और कूल्हों के हिस्से में स्थायी सुन्नता, लकवा या जीवनभर असहनीय न्यूरोपैथिक दर्द की समस्या हो सकती है।

लंबा रिकवरी पीरियड, सख्त कोर्सेट और दोबारा सामान्य न होने वाली बनावट

यह प्रक्रिया केवल ऑपरेशन थियेटर में खत्म नहीं होती, बल्कि इसके बाद की रिकवरी बेहद कष्टदायी होती है। मरीजों को हड्डियों के जुड़ने तक हफ्तों तक बिस्तर पर रहना पड़ता है, जहां खांसने, छींकने या करवट लेने पर भी तेज दर्द का अहसास होता है। रिब मॉडलिंग कराने वाली महिलाओं को हड्डियों को नया आकार देने के लिए 24 घंटे कई महीनों तक भारी दबाव वाला कोर्सेट पहनना पड़ता है, जो पेट के अंदरूनी अंगों पर अत्यधिक दबाव डालता है। इसके कारण पाचन तंत्र खराब होना, एसिड रिफ्लक्स, सांस लेने में उथलापन और फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि एक बार यदि पसलियां काट दी जाएं, तो वे दोबारा कभी नहीं उगतीं, यानी यह एक अपरिवर्तनीय (इर्रिवर्सिबल) प्रक्रिया है।

अवास्तविक सौंदर्य मानकों के खिलाफ डॉक्टरों की चेतावनी और मानसिक स्वास्थ्य का पहलू

वैश्विक स्तर पर जाने-माने सर्जन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कॉस्मेटिक सर्जरी केवल शारीरिक बदलाव का नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और अवास्तविक ब्यूटी स्टैंडर्ड्स से जुड़ा मामला है। कई देशों में जिम्मेदार और प्रमाणित सर्जन बिना किसी गंभीर मेडिकल आवश्यकता के केवल सुंदरता के लिए पसलियां निकालने से साफ इनकार कर देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि इस तरह के जानलेवा कदमों के पीछे अक्सर 'बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर' होता है, जहां व्यक्ति अपने प्राकृतिक शरीर में कमियां ढूंढता रहता है। विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि किसी भी सोशल मीडिया ट्रेंड या क्षणिक ग्लैमर के पीछे भागकर अपने शरीर के प्राकृतिक रक्षा तंत्र को नष्ट करना समझदारी नहीं, बल्कि जीवन को दांव पर लगाने जैसा गंभीर आत्मघाती कदम है।