रुपया कब संभलेगा, कब तक चढ़ेगा और कब बढ़ने लगेगा दबाव? इस रिपोर्ट में समझें करेंसी का पूरा गणित
अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) की चाल को लेकर बाजार में जारी कयासों के बीच एक विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है. एलारा सिक्योरिटीज (Elara Securities) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले महीनों में भारतीय रुपये पर से दबाव काफी हद तक कम हो सकता है.
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता की कमी, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियां और देश में बढ़ते विदेशी निवेश (Foreign Investment) के दम पर वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली छमाही भारतीय करेंसी के लिए काफी अनुकूल रहने वाली है.
डॉलर के मुकाबले 93 से 95 की रेंज में रह सकता है रुपया
रिपोर्ट के अनुसार, चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव कम होने और विदेशी फंडों के बेहतर प्रवाह (Inflow) की वजह से रुपया मजबूत स्थिति में दिखेगा. अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 93 से 95 की रेंज में कारोबार कर सकता है. मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक हालात भारतीय करेंसी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं.
RBI के ऐतिहासिक फैसलों और विदेशी निवेश (FPI) से मिला सहारा
रुपये को स्थिर रखने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार और आरबीआई के नीतिगत फैसलों का बड़ा सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है:
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टैक्स-फ्री हुआ निवेश: 5 जून 2026 को जारी ऐतिहासिक इनकम टैक्स ऑर्डिनेंस (Incentive Policy) के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए भारत की सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश को पूरी तरह टैक्स-फ्री (Tax-Free) कर दिया गया है.
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10 दिनों में बंपर निवेश: इस टैक्स छूट नीति के लागू होने के बाद केवल 10 ट्रेडिंग दिनों के भीतर 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR Route) के जरिए भारतीय डेट मार्केट में FPI निवेश बढ़कर 1.7 बिलियन डॉलर पहुंच गया. इस नीति से पहले के 10 दिनों में यह आंकड़ा महज 229 मिलियन डॉलर था.
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बॉन्ड इंडेक्स की उम्मीद: रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत को आगामी ब्लूमबर्ग ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल कर लिया जाता है, तो देश में कुल विदेशी निवेश का प्रवाह 80 से 85 बिलियन डॉलर के विशाल स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे रुपये को भारी मजबूती मिलेगी.
सावधान! दूसरी छमाही (FY27 की छमाही के बाद) में फिर बढ़ सकता है दबाव
जहां शुरुआती महीने रुपये के लिए अच्छे रहने वाले हैं, वहीं एलारा सिक्योरिटीज ने आगे के लिए कुछ चिंताएं और चुनौतियां भी उजागर की हैं:
1. अमेरिका का 'AI सेक्टर' और ग्लोबल कैपिटल शिफ्ट
वैश्विक स्तर पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में सुस्ती देखने को मिल रही है. टेक सेक्टर (विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - AI) में भारी निवेश का आकर्षण अमेरिका की तरफ केंद्रित हो रहा है, जिससे वैश्विक पूंजी (Global Capital) उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिकी बाजारों की ओर शिफ्ट हो सकती है. इसके चलते भारतीय इक्विटी मार्केट में FPI का रुख थोड़ा कमजोर बना हुआ है.
2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) बढ़ा सकता है ब्याज दरें
रुपये पर दोबारा दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक का रुख हो सकता है. रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में कुल 50 बेसिस पॉइंट (bps) की दर वृद्धि कर सकता है.
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फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर 2026, दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 में 25-25 बेसिस पॉइंट की तीन अलग-अलग बढ़ोतरी किए जाने की संभावना है.
यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी करता है, तो डॉलर अन्य वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अधिक मजबूत होगा. ऐसी स्थिति में भारतीय रुपये समेत अन्य उभरते बाजारों की करेंसी पर दोबारा दबाव बढ़ेगा और रुपये की मजबूती का दायरा सीमित हो सकता है.