Treadmill History: जिम में जिस ट्रेडमिल पर पसीना बहाते हैं आप, वह फिटनेस के लिए नहीं... बल्कि कैदियों को भयानक दर्द और तड़पाने के लिए बनाई गई थी! जानिए इसका खौफनाक इतिहास
आजकल किसी भी जिम में चले जाइए, आपको वहां फिटनेस फ्रीक लोग ट्रेडमिल (Treadmill) पर घंटों दौड़ते और पसीना बहाते हुए नजर आ जाएंगे। लोग इसे वजन घटाने (Weight Loss) और अपनी कैलोरी बर्न करने की सबसे बेहतरीन मशीन मानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मशीन को आज हम फिटनेस का सिंबल मानते हैं, उसका आविष्कार सेहत बनाने के लिए नहीं, बल्कि कैदियों को दर्दनाक और क्रूर सजा देने के लिए किया गया था? जी हां, ट्रेडमिल का शुरुआती इतिहास बेहद खौफनाक और चौंकाने वाला है।
1818 में 'ट्रेडव्हील' के नाम से हुआ था आविष्कार
ट्रेडमिल का आविष्कार ब्रिटेन के एक सिविल इंजीनियर विलियम क्यूबिट (William Cubitt) ने साल 1818 में किया था। शुरुआत में इसका नाम ट्रेडमिल नहीं, बल्कि 'ट्रेडव्हील' (Treadwheel) रखा गया था। उस समय की मशीन आज की तरह स्लीक और स्मार्ट नहीं थी। इसमें बड़े-बड़े पहिए लगे होते थे और एक पट्टी होती थी, जो लगातार चलती हुई सीढ़ियों (Stairs) की तरह घूमती रहती थी।
कैदियों को दी जाती थी 8-8 घंटे की खौफनाक सजा
इस मशीन को बनाने का एकमात्र मकसद जेल में बंद खूंखार और आलसी कैदियों को कड़ी सजा देना और उनसे मशक्कत करवाना था।
सजा का तरीका: कैदियों को इस मशीन पर 6 से 8 घंटे तक लगातार चढ़ने और दौड़ने के लिए मजबूर किया जाता था। अगर कोई रुकने की कोशिश करता या उसका बैलेंस बिगड़ता, तो वह सीधे नीचे गिरकर बुरी तरह घायल हो जाता था।
कैदियों के इस मशीन पर लगातार चलने से जो भारी ऊर्जा पैदा होती थी, उसका इस्तेमाल अनाज पीसने या पानी पंप करने जैसे भारी कामों में किया जाता था। कुछ जेलों में तो इसे सिर्फ कैदियों को तड़पाने (Torture) के लिए ही रखा गया था। यह सजा इतनी क्रूर थी कि कई कैदियों की जान तक चली जाती थी। धीरे-धीरे मानवाधिकार का मुद्दा उठा और 19वीं सदी के अंत तक जेलों में इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई।
1960 में सजा से बनी 'फिटनेस मशीन'
जेलों से बैन होने के बाद यह मशीन लगभग भुला दी गई थी। लेकिन 1960 के दशक में इसमें कुछ क्रांतिकारी बदलाव किए गए। वैज्ञानिकों और फिटनेस एक्सपर्ट्स ने पाया कि इस पर चलने से शरीर की कैलोरी बहुत तेजी से बर्न होती है। इसके बाद इसे 'फिटनेस मशीन' के रूप में री-लॉन्च किया गया। समय के साथ यह अपडेट होती गई और आज आधुनिक फीचर्स, बटन्स और स्पीड कंट्रोल के साथ हर जिम और घर की जरूरत बन चुकी है।