India Monsoon 2026: मानसून क्यों पड़ा कमजोर? देश में 51% कम बारिश ने बढ़ाई चिंता, जानिए 'एल नीनो' का कितना पड़ रहा है असर
देशभर में मानसून के दस्तक देने के बावजूद मौसम के बदलते मिजाज ने वैज्ञानिकों और किसानों को बड़ी चिंता में डाल दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 9 से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में सामान्य से 51 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जहां इस दौरान 63.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, वहां केवल 31.2 मिमी ही पानी बरसा। बादलों की लुकाछिपी के बीच बढ़ती उमस और खेतों में कम होती नमी ने सूखे जैसी स्थिति की आहट दे दी है।
दक्षिण और मध्य भारत में हाहाकार, 1 जून से अब तक 23% की कमी
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बारिश की सबसे भीषण कमी दक्षिण और मध्य भारत में देखी गई है। दक्षिण भारत में सामान्य से 77 प्रतिशत और मध्य भारत में 76 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं, 1 जून से अब तक के पूरे सीजन की बात करें तो देश में कुल मिलाकर सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में यह आंकड़ा 36 प्रतिशत की कमी तक पहुंच चुका है।
पूरे देश में पहुंचा मानसून, पर 'एल नीनो' ने रोकी रफ्तार
राहत की बात यह थी कि मानसून 9 जुलाई को राजस्थान, हरियाणा और पंजाब को कवर करते हुए पूरे भारत में पहुंच गया था (सामान्य तिथि से केवल एक दिन की देरी)। लेकिन इसके बाद भी मानसून के कमजोर पड़ने की सबसे बड़ी वजह एल नीनो (El Nino) प्रभाव को माना जा रहा है। प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म होने के कारण एल नीनो सक्रिय है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून के दौरान इसके और मजबूत होने की आशंका है, जो अगस्त और सितंबर में भी बारिश को प्रभावित कर सकता है।
16 से 22 जुलाई: इन राज्यों में होगी भारी से बहुत भारी बारिश
कमजोर मानसून के बीच राहत की खबर यह है कि अगले कुछ दिनों में उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश का अनुमान है:
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जम्मू-कश्मीर: 21 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी।
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हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड: हिमाचल में 19 से 22 जुलाई और उत्तराखंड में 18 से 21 जुलाई के बीच भारी बारिश से फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा।
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उत्तर प्रदेश व बिहार: पूर्वी यूपी में 19 से 21 जुलाई और बिहार-उत्तर बंगाल में 18 से 20 जुलाई के बीच अच्छी बारिश होगी।
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ओडिशा व पूर्वोत्तर: बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा में 16 जुलाई को भारी बारिश और असम-मेघालय में पूरे हफ्ते वर्षा जारी रहेगी।
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दिल्ली-NCR: इस सप्ताह हल्की फुहारें पड़ सकती हैं, लेकिन अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री अधिक रहने के कारण उमस से पूरी राहत नहीं मिलेगी।
जुलाई के महीने में 'हीट वेव' का अनोखा संकट
मानसून के सबसे सक्रिय महीने (जुलाई) में देश के कुछ हिस्सों में गर्म हवाओं (हीट वेव) का चलना बेहद हैरान करने वाला है। आसमान साफ होने और तेज धूप के कारण तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु और पुडुचेरी में 16 और 17 जुलाई को हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, 23 से 29 जुलाई के बीच देश में कहीं भी हीट वेव की संभावना नहीं है।
23 से 29 जुलाई तक मौसम में सुधार की उम्मीद और किसानों को सलाह
मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के आखिरी सप्ताह (23 से 29 जुलाई) में मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति में लौटेगी। इससे गुजरात, कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में बारिश की रफ्तार बढ़ेगी।
किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन: जुलाई खरीफ फसलों (धान, दाल, तिलहन) की बुआई का सबसे मुख्य समय होता है। IMD ने सलाह दी है कि जिन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी है, वहां खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने का इंतजाम करें और कीटनाशकों का छिड़काव अभी टाल दें। वहीं, कम बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों को बचाने के लिए हल्की सिंचाई का सहारा लें।