सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी समेत 43 के खिलाफ फौजदारी रिवीजन की सुनवाई टली; कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ विपक्षी पक्ष

सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी समेत 43 के खिलाफ फौजदारी रिवीजन की सुनवाई टली; कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ विपक्षी पक्ष

उत्तर प्रदेश के रायबरेली की एक स्थानीय अदालत में सोमवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सांसद केएल शर्मा सहित 43 लोगों के खिलाफ चल रहे एक हाई-प्रोफाइल फौजदारी रिवीजन (Criminal Revision) मामले की सुनवाई टल गई. जिला जज अमित पाल सिंह की अदालत में इस मामले की पुकार की गई, लेकिन विपक्षी पक्षकारों की ओर से कोई भी न्यायालय में हाजिर नहीं हुआ. इसके चलते कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तिथि निर्धारित की है.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद सरकारी जमीन के अभिलेखों (रिवेन्यू रिकॉर्ड्स) में कथित तौर पर हेराफेरी करने और कूट रचित (फर्जी) दस्तावेजों के माध्यम से एक विद्यालय को मान्यता दिलाने से संबंधित है.

वादी बृजेंद्र शरण गांधी और लाखन सिंह ने इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जो सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे. वादियों का आरोप है कि सरकारी भूमि से जुड़े कागजात में हेरफेर कर गलत तरीके से स्कूल को मान्यता दिलाई गई थी.

तत्कालीन डीएम समेत 43 लोग हैं आरोपी

जिला जज की अदालत में विचाराधीन इस फौजदारी रिवीजन में कुल 43 लोगों को पक्षकार (आरोपी) बनाया गया है. इस केस के मुख्य पक्षकारों में देश के कई बड़े राजनेताओं के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं:

  • राजनीतिक चेहरे: पूर्व सांसद सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व सांसद राहुल गांधी, वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी और रायबरेली के स्थानीय सांसद केएल शर्मा.

  • प्रशासनिक व शिक्षा अधिकारी: रायबरेली की तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) हर्षिता माथुर, जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) संजीव कुमार सिंह, पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) पीएन सिंह, शिवेंद्र सिंह और आनंद प्रकाश शर्मा.

  • अन्य नाम: ओंकार राणा और चंद्रशेखर मालवीय.

विपक्षी पक्षकारों की गैरमौजूदगी से नहीं बढ़ सकी बात

सोमवार को कोर्ट रूम में मामले की औपचारिकताएं शुरू होने के बाद माननीय न्यायाधीश द्वारा जब विपक्षी खेमे को पुकारा गया, तो उनकी तरफ से कोई भी कानूनी प्रतिनिधि या पक्षकार अदालत में उपस्थित नहीं मिला. इस अनुपस्थिति के कारण मामले में आगे की बहस या कोई अन्य कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी, जिसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अगली सुनवाई की तारीख जुलाई के पहले हफ्ते (4 जुलाई) में तय कर दी. राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों से जुड़े होने के कारण इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं.

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