यूपी में मूसलाधार बारिश के बीच खुले नाले में समाया मासूम, घंटों चले रेस्क्यू के बाद पाइप में फंसा मिला शव

यूपी में मूसलाधार बारिश के बीच खुले नाले में समाया मासूम, घंटों चले रेस्क्यू के बाद पाइप में फंसा मिला शव

उत्तर प्रदेश में मानसून की तेज बारिश जहां एक तरफ उमस और गर्मी से राहत लेकर आई, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नगर निकायों और प्रशासनिक दावों की पोल खोलते हुए एक बार फिर जानलेवा साबित हुई है। भारी बारिश के चलते सड़क पर लबालब भरे पानी के बीच खुला पड़ा एक गहरा नाला मासूम बच्चे के लिए 'डेथ ट्रैप' साबित हुआ। तेज बहाव में संतुलन बिगड़ने के कारण बच्चा खुले नाले में समा गया और पानी के प्रचंड वेग में बहता हुआ ड्रेनेज पाइपलाइन के भीतर जाकर फंस गया।

स्थानीय गोताखोरों, फायर ब्रिगेड और पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए गए घंटों लंबे संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्चे का शव नाले से काफी दूर एक संकरे सीमेंटेड पाइप में अटका हुआ बरामद किया गया। जब तक बच्चे को मलबे और पानी से बाहर निकाला गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। इस हृदयविदारक हादसे की खबर मिलते ही पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया और बदहवास परिजनों के आंसुओं ने हर किसी का कलेजा चीर दिया। घटना के बाद इलाके के आक्रोशित स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर नगर निगम और जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

सड़क पर जलभराव बना जानलेवा: न कोई ढक्कन, न चेतावनी बोर्ड

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, दोपहर के समय अचानक शुरू हुई तेज बारिश के कारण इलाके की मुख्य सड़क और गलियों में घुटनों तक पानी भर गया था।

  • अदृश्य हो गया था मौत का गड्ढा: नाले के ऊपर सीमेंट की स्लैब या जाली (Iron Grating) न होने के कारण सड़क और नाले का जलस्तर एक समान हो गया था, जिससे यह पहचानना नामुमकिन था कि पक्की सड़क कहां खत्म हो रही है और गहरा नाला कहां से शुरू हो रहा है।

  • पलक झपकते ही बहाव में खिंच गया बच्चा: मासूम जरूरी सामान लेने या घर की दहलीज के पास ही था कि अचानक उसका पैर फिसला और वह नाले के तेज भंवर में समा गया। आसपास के दुकानदारों और राहगीरों ने बच्चे को बचाने के लिए हाथ बढ़ाया और शोर मचाया, लेकिन पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह देखते ही देखते आंखों से ओझल होकर गहरे नाले में विलीन हो गया।

  • चेतावनी का अभाव: स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नाला महीनों से खुला पड़ा था और नगर निगम को कई बार लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन न तो वहां कोई ढक्कन लगाया गया और न ही बारिश के दिनों में कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड लगाया गया था।

3 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन: जेसीबी से तोड़ा गया स्लैब, पाइप काटकर निकाला गया शव

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस क्षेत्राधिकारी, नगर निगम के अधिकारी और आपदा राहत दस्ता मौके पर पहुंचा।

  • नाले में ऑक्सीजन सिलेंडरों के साथ उतरे गोताखोर: शुरू में स्थानीय तैराकों और पुलिसकर्मियों ने रस्सियों के सहारे नाले में उतरकर बच्चे को खोजने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव, कीचड़ और प्लास्टिक कचरे के जमावड़े के कारण बचाव कार्य में भारी रुकावट आई।

  • जेसीबी की मदद से तलाशी: जब मुख्य नाले में बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला, तो बहाव की दिशा में आगे स्थित एक बड़े अंडरग्राउंड ड्रेनेज पाइप के पास संदेह गहराया। नगर निगम ने तुरंत भारी जेसीबी मशीनों को बुलाकर नाले के ऊपरी कंक्रीट स्लैब को तोड़ना शुरू किया।

  • पाइप में फंसा मिला शव: लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और नाले का पानी पंपों से डाइवर्ट करने के बाद रेस्क्यू टीम ने देखा कि बच्चा बहाव के साथ घिसटते हुए एक संकरे पाइप के मुहाने पर कचरे के बीच बुरी तरह फंसा हुआ था। पाइप को कटर से काटकर जब बच्चे को बाहर निकाला गया, तो डॉक्टरों ने मौके पर ही उसे मृत घोषित कर दिया।

'यह दुर्घटना नहीं, प्रशासनिक हत्या है': लोगों का फूटा भारी आक्रोश

मासूम की मौत के बाद स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब दे गया। सैकड़ों की संख्या में जमा हुए नागरिकों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगाने का प्रयास किया और नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हर साल बरसात से पहले नालों की तलीझार सफाई और खुले मेनहोल्स व नालों को ढकने के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट पास किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते यह काम केवल कागजों में सिमट कर रह जाता है। लोगों ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है; जब भी तेज बारिश होती है, प्रदेश के अलग-अलग शहरों में खुले नाले और मैनहोल मासूम जिंदगियों को लील लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी बड़े अफसर पर स्थायी जिम्मेदारी तय नहीं की जाती।

पुलिस ने संभाली स्थिति, डीएम ने दिए मजिस्ट्रेट जांच और कार्रवाई के आदेश

हंगामे की सूचना मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ और शोकाकुल परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया:

  • मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश: जिलाधिकारी ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के संबंधित जोनल इंजीनियर, ड्रेनेज सुपरवाइजर और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही की मजिस्ट्रेट जांच बैठा दी है।

  • एफआईआर दर्ज करने की तैयारी: परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस गैर-इरादतन हत्या और सार्वजनिक सुरक्षा की आपराधिक अनदेखी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया में जुटी है।

  • शहर भर के खुले नालों का 24 घंटे में सर्वे: नगर आयुक्त ने सभी क्षेत्रीय अभियंताओं को आपातकालीन निर्देश जारी किए हैं कि अगले 24 घंटे के भीतर शहर के सभी खुले नालों, मैनहोल्स और जलभराव वाले डेंजर पॉइंट्स की जियो-टैगिंग कर उन पर तुरंत मजबूत लोहे की जालियां या स्लैब लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसा खौफनाक हादसा दोबारा न हो।

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