आक्रांता मंदिर तोड़ सकते हैं लेकिन आस्था नहीं; जन्माष्टमी पर बोले योगी आदित्यनाथ- भारत को मिटाने की कोशिश करने वाले खुद इतिहास में मिट गए

आक्रांता मंदिर तोड़ सकते हैं लेकिन आस्था नहीं; जन्माष्टमी पर बोले योगी आदित्यनाथ- भारत को मिटाने की कोशिश करने वाले खुद इतिहास में मिट गए

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित रिजर्व पुलिस लाइंस में आयोजित भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत की सनातन आस्था, सांस्कृतिक अमरता और ऐतिहासिक पुनरुत्थान पर एक ओजस्वी वक्तव्य दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि विदेशी हमलावर और आक्रांता भारत के मंदिरों को तोड़ सकते थे, मूर्तियों को खंडित कर सकते थे और उनके ऊपर अपनी इमारतें खड़ी कर सकते थे, लेकिन वे भारतवासियों के रोम-रोम में रचे-बसे श्रीराम और श्रीकृष्ण तथा उनकी शाश्वत आस्था को कभी छू तक नहीं पाए।

मुख्यमंत्री ने दो-टूक शब्दों में कहा कि जिन ताकतों ने भारत के अस्तित्व, उसकी संस्कृति और सनातन आस्था को मिटाने का दुस्साहस किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दफन हो गए और आज उनका नामलेवा भी कोई नहीं बचा। इसके विपरीत, भारत हजारों वर्षों की इस यात्रा में आज भी पूर्ण रूप से जीवित, जागृत और अपनी अजेय पताका के साथ विश्व पटल पर आगे बढ़ रहा है।

सोमनाथ, अयोध्या और काशी का दिया उदाहरण: बार-बार टूटे, पर भारत ने बार-बार बनाया

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों के ऐतिहासिक संघर्ष और उनके गौरवशाली पुनरुद्धार का क्रमवार उल्लेख किया:

  • सोमनाथ मंदिर: उन्होंने कहा कि गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को आक्रांताओं द्वारा बार-बार तोड़ा और लूटा गया, लेकिन भारत की अटूट आस्था ने उसे हर बार दोबारा खड़ा कर दिखाया।

  • अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि: प्रभु श्रीराम की पावन जन्मस्थली पर बने मंदिर को भी सदियों तक हमलों और विध्वंस का सामना करना पड़ा, लेकिन पांच सौ वर्षों के संघर्ष के उपरांत आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर अपनी अजेय पताका फहराते हुए विश्व के सामने खड़ा है।

  • काशी विश्वनाथ धाम: काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर भी कई बार तोड़ा गया, जिसे पहले लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने और वर्तमान आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ने 'भव्य और दिव्य काशी विश्वनाथ धाम' के रूप में नया जीवन दिया।

5,000 वर्षों से जारी गोवर्धन पूजा: प्रकृति और अन्नदाता के प्रति सनातन सम्मान

मथुरा और वृंदावन के अपने हालिया दौरे का संस्मरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रजभूमि में लाखों की संख्या में श्रद्धालु बिना किसी मौसम या असुविधा की परवाह किए केवल बांके बिहारी और कान्हा के दर्शन के लिए उमड़ रहे थे।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र पूजा के स्थान पर शुरू कराई गई गोवर्धन पूजा का उदाहरण देते हुए कहा कि पांच हजार वर्ष पहले श्रीकृष्ण ने यह संदेश दिया था कि जो पर्वत, नदियां, गौ-माता और अन्नदाता किसान हमारा भरण-पोषण करते हैं, सम्मान और पूजा के वास्तविक हकदार वही हैं। यही कारण है कि आज भी ब्रज के लोग न पहाड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और न ही पेड़ों को काटते हैं। यह परंपरा इस बात का साक्षात प्रमाण है कि भारत के आध्यात्मिक मूल्य किसी भी भौतिक विध्वंस से परे और अमर हैं।

जेल की काल कोठरी से महाभारत तक: अंधकार को चीरकर कर्तव्य पथ पर चलने की सीख

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य आधी रात को कारागार की अंधेरी कालकोठरी में हुआ था। लेकिन विपरीत और विषम परिस्थितियों में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने आजीवन अंधकार को परास्त कर मानवता को प्रकाश, सत्य, धर्म और न्याय का मार्ग दिखाया।

उन्होंने कहा कि जब भी मानव जीवन में संशय, भ्रम और असमंजस की स्थिति आती है, तब श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण का निष्काम कर्मयोग ही समाज का सच्चा मार्गदर्शन करता है। कंस के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष से लेकर कुरुक्षेत्र के मैदान में दिए गए गीता के उपदेश तक, श्रीकृष्ण का पूरा जीवन कर्तव्य पालन की सर्वोच्च प्रेरणा है।

विकसित भारत और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देश एक नई सकारात्मक ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा के साथ विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिन शक्तियों ने भारत की आस्था को चोट पहुंचाने की कोशिश की थी, उनकी सोच नकारात्मक और विनाशकारी थी, इसलिए उनका विनाश निश्चित हुआ।

उन्होंने प्रदेशवासियों और 140 करोड़ देशवासियों से आह्वान किया कि 'विकसित भारत' का संकल्प केवल सरकार के भरोसे पूरा नहीं हो सकता, बल्कि जब प्रत्येक नागरिक अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी और निष्काम भाव से कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, तभी सशक्त और समर्थ उत्तर प्रदेश तथा विकसित भारत की संकल्पना साकार होगी।

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