Prayagraj Row: ‘देश में जहां भी छिपा होगा, अब उसकी खैर नहीं...’, श्रीकृष्ण को ‘मुसलमान’ बताने वाले मौलाना पर भड़के प्रयागराज के साधु-संत; दे डाली खुली चेतावनी

Prayagraj Row: ‘देश में जहां भी छिपा होगा, अब उसकी खैर नहीं...’, श्रीकृष्ण को ‘मुसलमान’ बताने वाले मौलाना पर भड़के प्रयागराज के साधु-संत; दे डाली खुली चेतावनी

उत्तर प्रदेश के इटावा में मौलाना जरजिश द्वारा 23 जून को एक धार्मिक तकरीर के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए एक विवादित बयान ने तूल पकड़ लिया है। मौलाना ने अपने बयान में श्रीकृष्ण को मुसलमान और उन्हें 'पांच वक्त का नमाजी' बताया था। इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद सनातन धर्म के साधु-संतों और हिंदू संगठनों का गुस्सा भड़क उठा है। प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर स्वामी शांडिल्य महाराज ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मौलाना जरजिश को एक 'आक्रांता' करार दिया है।

'तलवार के डर से पूर्वजों ने बदला था धर्म'— शांडिल्य महाराज

स्वामी शांडिल्य महाराज ने मौलाना जरजिश को देश के किसी भी कोने से ढूंढ निकालने की चेतावनी देते हुए उनके दुस्साहस पर सवाल उठाए हैं।

शांडिल्य महाराज का कड़ा पलटवार: उन्होंने कहा कि अगर हम उनके आराध्य के लिए कह दें कि वे पांच वक्त की संध्या वंदन या हिंदू पूजा करते थे, तो मुस्लिम समुदाय को कैसा महसूस होगा? उन्होंने मौलाना को नसीहत देते हुए कहा कि वह इतिहास उठाकर देख लें, तलवार के बल पर उनके पूर्वजों ने ही धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाया था। जब जरजिश अपना असली इतिहास खंगालेगा, तो उसे साफ पता चल जाएगा कि उसके पूर्वज पांच वक्त नमाज पढ़ने वाले नहीं, बल्कि पांच वक्त संध्या वंदन करने वाले सनातनी हिंदू थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सनातन धर्म इस पूरी पृथ्वी की मूल जड़ है, जिससे बाकी सभी पंथों की उत्पत्ति हुई है।

टीआरपी बटोरने का हथकंडा: जूना अखाड़ा

इस पूरे विवाद पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद महाराज ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने मौलाना के इस कृत्य को सिर्फ सस्ती टीआरपी (TRP) बटोरने का एक जरिया बताया।

स्वामी शैलेशानंद ने कहा कि ऐसे विवादित और अस्तित्वहीन व्यक्तियों के बयानों पर ज्यादा बहस या चर्चा करके उन्हें महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। बल्कि मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों को ही आगे आना चाहिए और अपने धर्मग्रंथों का सही हवाला देकर ऐसे नफरत फैलाने वाले मौलानाओं के मुंह पर ताला लगाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि सनातन विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परंपरा है, इसलिए इसे किसी भी प्रकार के धार्मिक वैमनस्य या विवाद का विषय नहीं बनाया जा सकता।

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